तमगे मिले बड़े-बड़े, शहर के नाले मल से भरे पड़े

ओडीएफ प्लस प्लस का प्रमाण पत्र और स्वच्छ सिटी का अवार्ड मिलना बेशक नगर निगम समेत शहर के लिए गौरव की बात है। लेकिन यहां जमीनी हकीकत कुछ और है। हमारे शहर मेरठ में अभी भी 55 प्रतिशत आबादी बिना सीवेज सिस्टम के रह रही है।

JagranPublish: Wed, 24 Nov 2021 08:53 AM (IST)Updated: Wed, 24 Nov 2021 08:53 AM (IST)
तमगे मिले बड़े-बड़े, शहर के नाले मल से भरे पड़े

मेरठ, जेएनएन। ओडीएफ प्लस प्लस का प्रमाण पत्र और स्वच्छ सिटी का अवार्ड मिलना बेशक नगर निगम समेत शहर के लिए गौरव की बात है। लेकिन यहां जमीनी हकीकत कुछ और है। हमारे शहर मेरठ में अभी भी 55 प्रतिशत आबादी बिना सीवेज सिस्टम के रह रही है। यहां का सीवेज या खुलकर कहें तो मानव मल खुले नालों में बहाया जाता है। जिन्होंने सेप्टिक टैंक बनाया हुआ है, वे सेप्टिक टैंक किसी प्राइवेट आपरेटर से खाली कराते हैं, क्योंकि नगर निगम के पास सेप्टिक टैंक की सफाई का कोई प्रबंध नहीं है। जो लोग प्राइवेट आपरेटर से सेप्टिक टैंक खाली कराते हैं, वे आपरेटर उसे दूर जाकर किसी नाले में बहा देते हैं। वहीं, जल निकासी की व्यवस्था भी लचर है। बारिश होते ही शहर के कुछ इलाके डूबने लगते हैं।

ये हैं मानक

- किसी भी स्थान पर कोई भी व्यक्ति खुले में शौच व पेशाब करते हुए न पाया जाए।

- सभी सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालय हमेशा खुले रहें और क्रियाशील हों।

- सीवेज का निस्तारण सुरक्षित और बेहतर प्रबंधन के साथ हो।

- मानव मल और सीवेज किसी नाली, नाले, तालाब या खुले क्षेत्र में प्रवाहित या डंप नहीं किया जाता हो।

आवेदन के समय इन शर्तो का पालन जरूरी

- ओडीएफ प्लस प्लस के लिए आवेदन करने के लिए सभी शौचालयों का सीवेज नेटवर्क होना जरूरी है। इसका घोषणा पत्र देना होता है।

- कुछ आपरेटरों से यह लिखवाना होता है कि घरों या शौचलयों के मल को मशीन से खाली करने का कार्य किया जाता है। फिर उस मल को एसटीपी जैसे संयंत्रों को भेजा जाता है।

- घोषणा पत्र देना होता है कि कहीं भी बिना उपचार किया हुआ मल खुले में नहीं जाता।

आइए मेरठ की इंदौर से तुलना करते हैं

क्या इंदौर मेरठ

खुले में शौच मुक्त पूरी तरह खुले में शौच तो नहीं करते लेकिन मल खुले में बहता है

खुले में पेशाब करना शौचालयों का प्रयोग करते हैं। बाजारों में भी शौचालय हैं। खुले में पेशाब करना आम बात है। बाजार में शौचालय नहीं हैं।

सीवर लाइन 100 प्रतिशत 45 प्रतिशत

नाले में मल का बहना इस समस्या से मुक्त है 55 प्रतिशत आबादी का मल नाले में जाता है जो बाद में बहकर काली नदी में पहुंचता है।

जल निकासी सभी छोटी-बड़ी नाली-नालियां नेटवर्क से जुड़े हैं कई नाले किसी नेटवर्क से नहीं जुड़़े हैं लिहाजा उफनते रहते हैं

एसटीपी के पानी का उपयोग प्रत्येक एसटीपी का पानी पार्काें में छिड़काव होता है एमडीए के 13 व जल निगम के एक एसटीपी हैं, लेकिन इसका पानी नाले में बहाया जाता है

नगर निगम की अब क्या है तैयारी

- 10 बाजारों में एक एक पिक टायलेट बनाया जाएगा।

- सेप्टिक टैंक का मल नाले में न बहे इसलिए कमालपुर स्थित 72 एमएलडी एसटीपी के परिसर में 50 केएलडी का एफएसटीपी का निर्माण चल रहा है। जल्द कार्य पूरा होने वाला है। इससे प्राइवेट आपरेटर अब वहां टैंक लेकर जाएंगे।

- नालों में बायो रेमिएडिएशन प्रणाली से पानी को ट्रीट करने का प्रयास जारी हैं।

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शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने के कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। सीवर लाइन नेटवर्क पर भी काम चल रहा है। सेप्टिक टैंक को ठीक करने के लिए कमालपुर में एक एफएसटीपी का निर्माण अंतिम चरण में है। शहर को जल्द ही विभिन्न समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

मनीष बंसल, नगर आयुक्त

Edited By Jagran

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