गेहूं खरीद जारी, लक्ष्य से काफी दूर

जागरण संवाददाता घोसी (मऊ) जिले में आढ़तियों व शासकीय केंद्रों के बीच गेहूं खरीद को ले

JagranPublish: Wed, 18 May 2022 06:00 AM (IST)Updated: Wed, 18 May 2022 06:00 AM (IST)
गेहूं खरीद जारी, लक्ष्य से काफी दूर

जागरण संवाददाता, घोसी (मऊ) : जिले में आढ़तियों व शासकीय केंद्रों के बीच गेहूं खरीद को लेकर प्रतिस्पर्धा है पर इसका स्वरूप पश्चिमी उत्तर प्रदेश व अन्य प्रांतों जैसा नहीं है। इस कारण जिले के शासकीय क्रय केंद्रों पर खरीद की गति भले ही कम हुई है पर ठप नहीं हुई है। अब तक 35 हजार टन गेहूं खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 8162.317 टन खरीद हुई है।

इस वर्ष मार्च के प्रथम सप्ताह से ही आसमान आग उगलने लगा। इस कारण गेहूं के दाने पतले हो गए। संपूर्ण गेहूं उत्पादक क्षेत्र में यही हाल रहा। इस कारण उत्पादन में भारी कमी आई है। कम उत्पादन के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध ने गेहूं की मांग बढ़ा दिया है। गेहूं के सीधे निर्यात की व्यवस्था के कारण आढ़तियों ने किसानों से सीधे समर्थन मूल्य 2015 प्रति क्विटल के आसपास की कीमत पर गेहूं खरीदना प्रारंभ कर दिया। खरीदे गए गेहूं को ट्रकों से गुजरात के कांडला पोर्ट भेजा जाता है। वहां से जलयान से इस गेहूं को विदेशों में भेजा जाता है। गेहूं की मांग व लाभ के कारण आढ़तिए सीधे किसान के घर पहुंच कर गेंहू की तौल कर ट्रकों से अपने गोदाम ले आते हैं। इस कारण किसान पंजीकरण से लेकर तौल, ट्राली में गेहूं की लोडिग, परिवहन व केंद्र पर अनलोडिग, तौल आदि के खर्च से बच जाता है। केंद्र तक गेहूं ले जाने और तौल कराने में किसान को प्रति क्विटल लगभग 89-90 रुपये व्यय करना पड़ता है। उधर व्यवसायी प्रति क्विटल 1900 रुपये या अधिक दर पर गेहूं खरीद ले रहे हैं। ऐसे में दोनों में बात लगभग बराबर होने के बावजूद किसान व्यवसायी को बहुत प्राथमिकता न देकर क्रय केंद्रों को वरीयता दे रहा है। एक तो शासकीय क्रय केंद्रों पर एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित है तो दूजे कीमत के लिए चक्कर न लगाना होगा। कुछ क्षेत्रों में पूर्व में व्यवसायी को धान-गेहूं बेचकर अब तक उसकी तलाश करने वाले किसानों को देखकर अधिसंख्य किसान शासकीय क्रय केंद्रों का ही रुख कर रहे हैं। जिले के बहुसंख्य किसान गेहूं बेंच दिए हैं। मांगलिक आयोजनों में व्यस्त किसान ही गेहूं न बेच सके हैं। अब ऐसे किसान ही गेहूं बेचने को केंद्र पर आ रहे हैं। इन दिनों औसतन प्रतिदिन जिले में क्रय केंद्रों पर 1500 क्विटल गेहूं की खरीद हो रही हे। इससे स्पष्ट है कि तय सीमा में 15 दिनों की वृद्धि से निश्चित ही खरीद मात्रा बढ़ेगी। बावजूद इसके अब तक मात्र 3162.317 क्विटल ही खरीद होने के कारण लक्ष्य के सापेक्ष खरीद होने में पूर्ण संशय है।

-----------------------------------

खरीद सीमा में वृद्धि है मुफीद

गेहूं की खरीद सीमा में वृद्धि के कारण तय है कि व्यवसायी बीच में कीमत नही घटा सकेंगे। अब तक गेहूं बेचने से वंचित किसानों के लिए भी यह वृद्धि मुफीद होगी। निर्यात पर रोक से कीमत स्थिर, नही है किल्लत

गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर केंद्र सरकार ने खुले बाजार में गेहूं की कीमत नियंत्रित कर दिया है। इसका एक अन्य लाभ यह कि खुले बाजार में बाद में अच्छी कीमत पर गेहूं बेचने का सपना संजोए किसान अब केंद्रों पर ही गेहूं बेचेंगे।

-----------------------------

गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने के साथ ही हरेक किसान का गेहूं क्रय होगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूर्णतया भारतीय खाद्य निगम से नियंत्रित होता है।

- विपुल कुमार सिन्हा, जिला खाद्य व विपणन अधिकारी मऊ।

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept