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दो मिनट को ठहरा वक्त, संवेदनाओं का सैलाब

वक्त की हर शै गुलाम होती है। माना कि हम वक्त के तमाम सितम झेलते

JagranThu, 10 Jun 2021 04:48 AM (IST)
दो मिनट को ठहरा वक्त, संवेदनाओं का सैलाब

जागरण संवाददाता, मैनपुरी: वक्त की हर शै गुलाम होती है। माना कि हम वक्त के तमाम सितम झेलते आए हैं मगर, इसी वक्त ने कोरोना के कहर रूपी सजा देकर बहुत पीड़ा पहुंचाई। तमाम ऐसे थे, जो कोरोना से लड़ते-जूझते हुए इस जंग में अपनी जिदगी हार गए। पता नहीं, कितने घर उजड़ गए। कितनी मांओं की बुढ़ापे की लाठी टूट गई तो मांग का सिदूर मिट गया। बच्चों के सिर पर पिता का साया उठा, मां की ममता छिन गई। कहर अभी भी रहम नहीं कर रहा है। तमाम अस्पताल में भर्ती हैं। ये कोरोना को हराने के कगार पर हैं।

कहते हैं कि वक्त कभी ठहरता नहीं। दो मिनट। वक्त का ये पैमाना भले ही कम प्रतीत होता है मगर, बुधवार को सुबह 9 बजे यही दो दिन का वक्त ठहर गया। ठहरता भी क्यों नहीं? ''दैनिक जागरण का ''सर्व धर्म प्रार्थना सभा का आह्वान, अपील, अनुरोध, आग्रह ही कुछ ऐसा था। जिससे समाज का हर तबका किसी न किसी रूप में जुड़ा था। कोई अपने नैतिक फर्ज से बंधा था तो कोई इंसानियत में। किसी ने कोरोना से जंग में अपनी जी जान लगा दी थी तो किसी ने हांफती जिदगी को नई सांसें दी थीं। प्रार्थना सभा का उद्देश्य था कि हमेशा के लिए बिछुड़ गए अपनों को श्रद्धांजलि अर्पित करें। जो कोरोना से जंग लड़ रहे हैं, उन्हें भगवान जीतने की ताकत दे।

दैनिक जागरण की इस प्रार्थना सभा के दौरान चहुंओर संवेदनाओं का सैलाब बह रहा था। सहयोग, समन्वय और सहभागिता का अहसास कराना था। लोगों का दर्द उमड़ रहा था। जिदगी के सफर में इस पीड़ादायक मोड़ से गुजरी दास्तां विचलित कर रही थी। जो गुजर गया, वो दौर अब न आए, इसी कामना के साथ मंदिरों में विशेष पूजा पाठ हुए, मस्जिदों में नमाज, गुरुद्वारे में विशेष अरदास और गिरिजाघरों में विशेष प्रार्थना। कोरोना काल में पुलिस ने क्या-क्या नहीं देखा और झेला। अस्पताल से लेकर श्मशान घाट तक के हालात फ्लैशबैक में चल रहे थे। सख्त मिजाज वाली पुलिस भी प्रार्थना सभा के मौके पर द्रवित थी। वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों, पुलिस लाइन, थाने, चौकियों पर खाकी वर्दीधारी अपनी भावनाएं उड़ेल रहे थे। सड़कों पर वीरानी छाई थी। चौराहों पर भले ही ग्रीन सिग्नल सफर जारी रखने का संकेत दे रहे थे मगर, पहिए वाहन को आगे बढ़ने की इजाजत ही नहीं दे रहे थे। दो मिनट के दौरान वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। मगर रोज की तरह न तो वाहनों के हार्न गूंज रहे थे और न ही वाहन चालकों में जल्द जाने की बेचैनी हो रही थी। कोरोना के खूनी शिकंजे से तमाम जिदगियों को बाहर निकालने वाले चिकित्सक भी व्यथित थे। ये वो चिकित्सक थे जिन्होंने संक्रमण के दौर में औरों के लिए अपनी जिदगी खतरे में डाल दी। सुबह से लेकर रात तक एक-एक मरीज की चिकित्सा में जुटे रहे। ये चिकित्सक अपने रुटीन कार्य से दो मिनट निकाल प्रार्थना कर रहे थे कि यद्यपि पूरे प्रयास के बावजूद कुछ जिदगियां नहीं बचा पाए मगर, हे प्रभु, ऐसी क्षमता प्रदान करो कि अब कोई सितारा न टूटे। शहर की पाश कालोनियों, गली-मुहल्ला, तिराहे-चौराहे से लेकर गांव-गांव की पगडंडियों पर इन दो मिनट में मानवता के अटूट रिश्ते बना दिए। ये मौन मानो आवाज बुलंद कर रहा था कि जो गुजर गया, उस दौर से अब कभी भी मुलाकात न हो। दफ्तरों से धर्मस्थलों तक प्रार्थना की गूंज

कलक्ट्रेट सभागार में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के अलावा शिक्षाविद और प्रमुख उद्योगपतियों ने मृतकों के प्रति संवेदना जताई। डीएम ने कार्यालय कक्ष में कर्मचारियों के साथ सहभागिता करते हुए पीड़ितों के प्रति भाव जाहिर किया। परिवहन कार्यालय ने भी पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताई। पुलिस लाइन में भी पुलिसकर्मियों ने प्रार्थना में मौजूद रहकर पीड़ितों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। दीवानी बार एसोसिएशन में भी मृतकों के प्रति सहानुभूति जताने को सर्वधर्म प्रार्थना हुई तो शिक्षण संस्थाओं ने भी इस संवेदना का इस सागर में सहभागिता निभाई। शिक्षक संघ के अलावा तमाम सामाजिक और युवा संगठनों, व्यापारी संगठनों ने संवेदना के भाव जताए। सर्व धर्म प्रार्थना का कार्यक्रम सभी धार्मिक स्थलों पर हुआ।

यहां भी हुए आयोजन- कस्बा भोगांव, करहल, बेवर, किशनी, कुसमरा, बिछवां, अजीतगंज, ज्योंती, औंछा, घिरोर, दन्नाहार, बरनाहल, कुरावली, सुल्तानगंज आदि कस्बों और गांवों के अलावा खेल- खलिहानों में भी सर्व धर्म प्रार्थनाएं हुईं। किशनी में तो तालाब की खोदाई करने वालों ने भी मृतकों के प्रति सहानुभूति जताते हुए काम रोककर श्रद्धांजलि दी।

- राजनीतिक दल भी नहीं रहे पीछे

सर्वधर्म प्रार्थना सभा में विभिन्न दलों के नेताओं ने आयोजन में प्रतिभाग किया। भाजपा जिला कार्यालय पर प्रार्थना का आयोजन हुआ। सपा जिला कार्यालय, बसपा जिला कार्यालय पर मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। सभी दलों के कस्बों व नगर कार्यालयों पर भी विशेष प्रार्थना की गई।

Edited By Jagran

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