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सड़क पर ही कर रहे 40 फीसद पानी की बर्बादी

जागरण संवाददाता, मैनपुरी : जिस विकास भवन में बैठकर जल संरक्षण की बात होती है, उसी भवन में पानी की बे

JagranWed, 28 Mar 2018 11:54 PM (IST)
सड़क पर ही कर रहे 40 फीसद पानी की बर्बादी

जागरण संवाददाता, मैनपुरी : जिस विकास भवन में बैठकर जल संरक्षण की बात होती है, उसी भवन में पानी की बेहिसाब बर्बादी हो रही है। विकास भवन की दूसरी मंजिल पर रखी पानी की टंकी करीब एक माह से लीक हो रही है। दिन भर में एक टंकी पानी तो केवल ऐसे ही छत पर बह जाता है, लेकिन जिम्मेदारों ने कभी इसकी सुधि नहीं ली। पूरा दिन टंकी का पानी बहता है और छत के रास्ते नालियों में बह जाता है।

विकास भवन में पानी की ये बर्बादी तो एक उदाहरण है। लेकिन हकीकत है ये कि चालीस फीसद पानी तो ऐसे ही बर्बाद हो रहा है। इनमें बीस फीसद पाइप लाइन के लीकेज और टोटी विहीन नलों से बर्बाद हो रहा है। दरअसल, पानी की टंकी से घरों तक पहुंचने वाली पाइप लाइन कई स्थानों पर लीक हैं, ऐसे में काफी पानी सड़क पर बह जाता है। धरती की कोख छलनी कर रही सबमर्सिबल के जरिए भी खूब पानी की बर्बादी हो रही है। बीते पांच सालों में भूजलस्तर में तेजी से गिरावट आई है। नगर पालिका द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पाइप लाइन में कई स्थानों पर लोगों की सहूलियत के लिए टोटी लगाई गई हैं। तीस फीसद से अधिक स्थान ऐसे हैं जहां या टोटी खराब है या फिर टोटी लगी ही नहीं है। बॉक्स

बारिश का पानी सहेजने को करने होंगे इंतजाम

जल निगम के अधिशाषी अभियंता ओमवीर दीक्षित कहते हैं कि भूजलस्तर जिस तेजी से गिर रहा है, वह ¨चता जनक है। बरनाहल बराबर डार्क जोन में है। इसके पीछे एक बड़ा कारण बारिश के पानी को न सहेजना भी है। यदि बारिश के पानी के सहेजने के इंतजाम बराबर किए जाएंगे तो भूजलस्तर में तेजी से उछाल आ गया। वह कहते हैं कि सरकारी इमारतों के साथ ही लोगों को निजी मकानों में भी रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम लगाना होगा। इस सिस्टम में अधिक लागत भी नहीं आती है। ज्यादातर घरों में लगे हैंडपप जवाब दे रहे हैं, इसका बड़ा कारण भूजलस्तर का गिरना है। बॉक्स बारिश आंकड़ों में

वर्ष औसतन बारिश (मिमी)

2015 90.13

2016 252.75

2017 112.70 बॉक्स

पालिका के संसाधनों पर एक नजर

1201 हैंडपंप

23 नलकूप

23 सबमर्सिबल

8 टैंकर

18 पानी की टंकी बॉक्स

ये उपाय करें तो दूर हो सकता जलसंकट

-अधाधुंध लग रहे सबमर्सिबल पर लगाना होगा अंकुश।

-वाहन धुलाई सेंटरों पर सख्ती जरूरी।

-तालाब और पोखरों को गांव के पानी के निकास से जोड़ना होगा।

-पानी की लाइनों की बराबर करनी होगी मॉनीट¨रग।

-हर घर में रेन वाटर हार्वे¨स्टग सिस्टम जरूरी। क्या कहते हैं लोग पानी के लिए सबको पहल करने की जरूरत है। जब तक पानी बचाने का भाव लोगों में स्वत: ही जागृत नहीं होगा, तब तक पानी बचाने की दिशा में बेहतर काम नहीं हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि लोग खुद ही इसके लिए जागरूक होकर कार्य करें।

सुनील अग्रवाल, उद्योगपति। हमें अपने ही घर से पानी बचाने की शुरुआत करनी होगी। हम अक्सर पानी को लेकर दूसरों की ओर ताकते हैं, लेकिन खुद इसकी बर्बादी करते हैं। ये हाल तब है जब हम खुद ही पानी के संकट से जूझते हैं। यही हाल रहा तो आने वाले समय में स्थित और खराब होगी।

आलोक वर्मा, व्यवसायी। पानी बचाने की बातें अब बंद कमरों में नहीं बल्कि सड़क पर होनी चाहिए। हम सबको सामूहिक रूप से इसके लिए संकल्प लेना होगा। जब तक हम इसके लिए संकल्प नहीं लेंगे, तब तक पानी बचाना मुश्किल होगा। इसलिए जरूरी है कि हम इसके लिए गंभीर प्रयास करें।

डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य, साहित्यकार। पानी हमारी ¨जदगानी है। ये बातें हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं। लेकिन इसे सहेजने के लिए कभी गंभीर कोशिश होते नहीं देखी गई। यदि हम केवल बारिश के पानी को ही सहेंजे और व्यर्थ पानी न बहाने का संकल्प लें तो जलसंकट अपने आप खत्म हो जाएगा।

घनश्याम दास गुप्ता, कारोबारी।

Edited By Jagran

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