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बहाना न कहानी, मुढ़ारी गांव मांगे पानी

जागरण संवाददाता, महोबा : महोबा में वैसे तो कई गांव ऐसे हैं जहां हर साल गर्मी के दिनों म

By JagranEdited By: Published: Wed, 11 Apr 2018 03:01 AM (IST)Updated: Wed, 11 Apr 2018 03:01 AM (IST)
बहाना न कहानी, मुढ़ारी गांव मांगे पानी
बहाना न कहानी, मुढ़ारी गांव मांगे पानी

जागरण संवाददाता, महोबा : महोबा में वैसे तो कई गांव ऐसे हैं जहां हर साल गर्मी के दिनों में पानी का संकट आ जाता है। बेबस लोगों के सामने हैंडपंप, कुएं ही एकमात्र सहारा होते हैं। इन्हीं गांवों में से एक है मुढ़ारी गांव। यहां हर साल की तरह इस बार भी पानी का भीषण संकट मुंह बाए खड़ा है। यहां के लोगों का कहना है कि अब हमें कोई बहाना और कहानी नहीं सुननी हमें पानी मिले यह हमारी सबसे बड़ी वर्तमान की जरूरत है। अतिरिक्त हैंडपंप लगें और पानी की टंकी की व्यवस्था कराई जाए।

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पानी का संकट हर साल गर्मी आते है बढ़ने लगता है लेकिन संकट आने से पहले ही यदि इसके इंतजाम हो जाएं दो मुढ़ारी गांव जैसे हालात कहीं के न होने पाएं। सरकार की योजनाओं को चीख चीख कर जनता के कानों तक पहुंचाने से, आंकड़े दिखाने और दीवारें पोतने से आम जनता का कोई भला होने वाला नहीं है। मुढ़ारी के परमानंद का कुछ ऐसा ही कहना है। कहते हैं सरकार लाखों का हिसाब किताब समझाती है पर हमें उससे पानी तो नहीं मिल रहा। हमारी समस्या है कि गांव में ऐसे इंतजाम हो जाएं कि पूरे साल शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध हो जाए। गांव में कहने को तो पचीस कुएं हैं लेकिन इसमें मात्र दो का ही पानी सही है और लोगों की सुबह से लेकर शाम तक यहां लाइन लगाए रहते हैं।

40 हैंडपंप में एक सही

गांव में गिनने के लिए चालीस हैंडपंप लगे हैं लेकिन इनमें से मात्र एक हैंडपंप सही है वह भी गांव के दो किलो मीटर दूर लगा है। सुबह से ही लोग यहां पानी भरने के लिए पहुंचने लगते हैं।

जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आते

कुलपहाड़ से पांच किमी दूर मुढ़ारी गांव की आबादी 12000 है। यहां के प्रधान उमाशंकर मिश्रा कहते हैं कि जनप्रतिनिधि भी कोई सहयोग नहीं करते। इतनी विकट समस्या के बाद भी कोई समाधान नहीं करने वाला है। जन सुविधाओं और शासन से मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।


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