वसंत पंचमी पर करें इन मंत्रों का जाप, मां सरस्वती की होगी विशेष कृपा; जानें-तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि

Vasant Panchami 2022 मां सरस्वती के पूजन का पर्व वसंत पंचती पांच फरवरी मनाई जाएगी। ज्ञानदात्रा मां सरस्वती के पूजन के साथ ही होलिका दहन स्थलों पर अरंड की डाल की स्थापना होगी। भारतीय कैलेंडर के मुताबिक इस दिन से शादियों के लिए शुभ मुहूर्त शुरू होते हैं।

Vikas MishraPublish: Mon, 24 Jan 2022 10:23 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 08:24 PM (IST)
वसंत पंचमी पर करें इन मंत्रों का जाप, मां सरस्वती की होगी विशेष कृपा; जानें-तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। मां सरस्वती के पूजन का पर्व वसंत पंचती पांच फरवरी होगी। ज्ञानदात्रा मां सरस्वती के पूजन के साथ ही होलिका दहन स्थलों पर अरंड की डाल की स्थापना होगी। इसी दिन शादी का शुभ मुहूर्त होेने की वजह से शादियों की धूम होगी। कोराेना संक्रमण के चलते शादियों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन इस दिन अन्य दिनों के मुकाबले अधिक शादियां होंगी। लान के बजाय होटलों और रेस्टोरेंटों में शादियां अधिक बुक हैं। 

छह हजार शादियाें की बुकिंगः वसंत पंचमी के दिन शहर और ग्रामीण क्षेत्र मिलाकर छह हजार से अधिक शादियों की बुकिंग हो चुकी है। कोरोना के चलते बुकिंग आगे बढ़ाई जा रही है, बावजूद इसके दो हजार के करीब शादियां होंगी। लखनऊ आदर्श टेंट कैटर्स व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि वेडिंग इंडस्ट्रीज को सरकार द्वारा जो गाइडलाइन दी गई है इससे वेडिंग इंडस्ट्रीज से जुड़े सभी व्यापारी नाखुश है, व्यापारियों की मांग है कि खुले में क्षमता का 50 फीसद की अनुमति दी जाए। पिछले कोरोना काल से ही टेंट, लाइट, कैक्टर्स फ्लावर, बैंड, बग्गी और वैंकेट हाल व लान के मालिक सभी कर्ज में डूबे हैं। शादी के इस मौसम में यदि गाइड लाइन में संशोधन न हुआ तो वेडिंग इंडस्ट्रीज पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। 

सुबह से दोपहर बाद तक है पूजन का मुहूर्तः खेतों में खिले सरसों के फूल जहां इसके आने की आहट दे रहे हैं तो दूसरी ओर यज्ञोपवीत संस्कारों की तैयारियां सुरक्षा के साथ शुरू हो हो चुकी हैं। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि मां सरस्वती की पूजा पांच फरवरी को सुबह 7:10 बजे से दोपहर 12: 40 बजे के बीच करना श्रेयस्कर होगा। दोपहर 12:15 से एक बजे के बीच होलिका स्थापना का मुहूर्त है। राहुकाल सुबह 9:51 बजे से 11:13 बजे तक रहेगा। 15 जनवरी से शादियों का दौर शुरू हो गया है। 23 फरवरी से 26 मार्च तक 31 दिन गुरु तारा अस्त हो जाएगा और 14 मार्च से 14 अप्रैल मीन खरमास रहेगा जिसके कारण विवाह नहीं होगें।

आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि मार्च में विवाह मुहूर्त नहीं हैैं। 15 अप्रैल से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे और 10 जुलाई तक विवाह रहेंगे। 10 जुलाई से देवशयनी एकादशी से चार नवंबर देवोत्थानी एकादशी तक चातुर्मास होने के कारण चार माह तक विवाह आदि कार्य नहीं होंगे। आचार्य अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि दो अक्टूबर से 20 नवंबर तक शुक्र तारा अस्त है जिसके कारण विवाह 24 नवंबर से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे। सामूहिक विवाह अनुदान के इच्छुक दस्तावेजों के साथ जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं।

Edited By Vikas Mishra

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