UP Chunav 2022: भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी को आरक्षण के मुद्दे पर घेरने के लिए सुभासपा ने बनाई नई रणनीति

UP Vidhan Sabha Chunav 2022 लंबे समय से निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल कर आरक्षण देने की मांग उठ रही है। सपा सरकार ने 17 जातियों को ओबीसी की श्रेणी से एससी में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था लेकिन मामला कोर्ट में फंस गया।

Umesh TiwariPublish: Fri, 21 Jan 2022 08:05 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 08:11 PM (IST)
UP Chunav 2022: भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी को आरक्षण के मुद्दे पर घेरने के लिए सुभासपा ने बनाई नई रणनीति

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। समाजवादी पार्टी (सपा) की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी निषाद पार्टी को उनके ही नारे 'आरक्षण नहीं तो वोट नहीं' पर घेरेगी। पूर्वांचल की धरती पर निषाद पार्टी को आरक्षण के ही मसले पर सुभासपा ने घेरने की तैयारी कर ली है। दोनों ही दल अति पिछड़ों की राजनीति करते हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में लंबे समय से निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल कर आरक्षण देने की मांग उठ रही है। दिसंबर 2016 को तत्कालीन सपा सरकार ने केवट, बिंद, मल्लाह, नोनिया, मांझी, गौंड, निषाद, धीवर, बिंद, कहार, कश्यप, भर और राजभर सहित 17 जातियों को ओबीसी की श्रेणी से एससी में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। कोर्ट में इस मामले के फंस जाने के कारण निषाद समाज के आरक्षण का मुद्दा हल नहीं हो पाया। इसी मसले को हल कराने के लिए निषाद पार्टी लगी हुई थी।

भाजपा की सहयोगी निर्बल इंडियल शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने आरक्षण नहीं तो वोट नहीं का भी नारा दे दिया था। निषाद पार्टी के अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद ने भाजपा को कई बार अल्टीमेटम भी दिया था कि अगर 2022 में सरकार बनानी है तो तत्काल निषाद समाज के आरक्षण सहित अन्य मुद्दे हल होने चाहिए। इसके बावजूद उनका मसला हल नहीं हो सका है। निषाद पार्टी इस बार भी भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है।

वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के सहयोगी रहे सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने अब निषाद पार्टी को आरक्षण के मसले पर घेरने की तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी निषाद समाज को कुछ दिन पहले आरक्षण दिला रही थी अब तो आरक्षण पर बोली भी नहीं निकल रही। उन्होंने कहा कि निषाद समाज भी अब पूछ रहा है कि 10 प्रतिशत सवर्णों को आरक्षण 48 घंटे में दोनों सदनों में पास हो गया था जबकि निषादों को आरक्षण के नाम पर भाजपा ने धोखा दिया। सुभासपा पूर्वांचल में जहां निषाद पार्टी लड़ेगी वहां आरक्षण के मुद्दे की याद दिलाएगी।

Edited By Umesh Tiwari

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