सरसों के लिए वरदान और आलू के लिए अभिशाप बना मौसम, जानें- कृषि विशेषज्ञों की राय

मौसम में आया बदलाव आलू के लिए अभिशाप बना तो सरसों के लिए वरदान साबित हुआ है। मौसम में हुए अचानक परिवर्तन से आलू की फसल बहुत अधिक प्रभावित हो रही है पिछले वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष आलू का रकबा भी कम हुआ है।

Vikas MishraPublish: Thu, 20 Jan 2022 08:34 AM (IST)Updated: Thu, 20 Jan 2022 03:14 PM (IST)
सरसों के लिए वरदान और आलू के लिए अभिशाप बना मौसम, जानें- कृषि विशेषज्ञों की राय

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। मौसम में आया बदलाव आलू के लिए अभिशाप बना तो सरसों के लिए वरदान साबित हुआ है। मौसम में हुए अचानक परिवर्तन से आलू की फसल बहुत अधिक प्रभावित हो रही है पिछले वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष आलू का रकबा भी कम हुआ है और उत्पादन यदि कम होता है तो कहीं न कहीं आलू जनसामान्य तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। बख्शी का तालाब के चंद्र भानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कृषि कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा.सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मौसम में जो पारा निरंतर गिरता चला जा रहा है वह आलू, टमाटर, मिर्च व मटर की फसलों के लिए बहुत हानिकारक होता है।

आलू की फसल में इस समय झुलसा बीमारी का प्रकोप बढ़ता है हमारे किसान भाई यदि समय से इस बीमारी का प्रबंधन कर लें तो उत्पादन के ऊपर प्रभाव नहीं पड़ता। यह रोग आलू के पौधों की पत्तियों, डंठलो एवं कंदो पर दिखाई देने लगता है। पत्तियों पर छोटे हल्के पीले हरे अनियमित आकार के धब्बों के रूप में यह नजर आता है और यह धब्बे बहुत ही शीघ्र बढ़ने लगते हैं और गीले दिखाई देते हैं।यह धब्बे अपने चारों अंगूठी नुमा सफेद फफूंदी जैसा जमा लेते। हमारे किसान इस बीमारी को आसानी से पहचान लेते हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि जब इस प्रकार की समस्या देखने को मिले तो कापर आक्सिक्लोराइड को दो किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव कर देना चाहिए।

अधिक प्रकोप की दशा में फफूंदी नाशक डाइथेन एम 45 की दो ग्राम दवा को प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। यदि यह दवा उपलब्ध नहीं होती है तो कार्बेंडाजिम नामक फफूंदी नाशक की तीन ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर के छिड़काव करना लाभप्रद होता है। फफूंदी नाशक का छिड़काव 10 - 15 दिन के अंतराल पर दोहरा देना चाहिए। आलू में इस समय कंद बनना प्रारंभ हो जाता है। नवंबर में आलू की बुआई करने वाले झुलसा की समस्या नहीं है फिर भी किसान अपनी फसल की निगरानी करते रहें और जब उनका आलू 70 से 80 दिन का हो जाए तो प्रति बीघा 10 किलोग्राम नाइट्रोजन और दो किलोग्राम सल्फर का प्रयोग करने से आलू में कंदो का आकार एक समान हो जाता है और उत्पादन भी बढ़ जाता है।

फफूंदी नाशक का छिड़काव करते समय यह अवश्य ध्यान रखें कि खेत बहुत गिला नहीं होना चाहिए और अच्छी धूप निकली हुई हो उस समय छिड़काव लाभदायक होता है। फफूंदी नाशक का घोल अधिक समय तक बनाकर नहीं रखना चाहिए ताजा घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। ठंडा तापक्रम सरसों की फसल के लिए लाभदायक भी है। डा.सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यदि तापक्रम बढ़ता है तो सरसों की फसल पर मांहू का भीषण प्रकोप हो जाएगा उस स्थिति में मांहू का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाएगा फिर भी किसानों को सलाह दी कि जैसे ही खेत में मांहू दिखाई दे इमिडाक्लोप्रिड नामक कीटनाशक की 0.5 मात्रा को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव लाभकारी होगा। उक्त रसायन न उपलब्ध होने की दशा में क्लोरोपारीफास 20 ईसी एक मिली को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। रानी पर छिड़काव दोहराते रहे। सिंचाई बिल्कुल न करें।

Edited By Vikas Mishra

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