शास्त्रीय नृत्य व गायन में पारंगत अपर्णा यादव के सियासी सफर में आए कई उतार चढ़ाव, जानिए उनके बारे में सब कुछ

UP Vidhan Sabha Chunav 2022 अपर्णा यादव ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के कोरोना वैक्सीन न लगवाने के बयान पर अपनी अलग प्रतिक्रिया देकर यह संकेत दे दिया था कि परिवार में उनकी दूरी बढ़ती जा रही है।

Umesh TiwariPublish: Wed, 19 Jan 2022 01:28 PM (IST)Updated: Wed, 19 Jan 2022 01:38 PM (IST)
शास्त्रीय नृत्य व गायन में पारंगत अपर्णा यादव के सियासी सफर में आए कई उतार चढ़ाव, जानिए उनके बारे में सब कुछ

लखनऊ [निशांत यादव]। गीत घूमर-घूमर पर कभी सार्वजनिक मंच पर नृत्य की प्रतिभा दिखाने वाली अपर्णा यादव के लिए उनकी सियासी डगर कभी आसान नहीं रही। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र प्रतीक यादव से शादी के बाद अपर्णा ने लखनऊ की कैंट विधानसभा को अपनी कर्मभूमि बनाया। वह वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उतरीं लेकिन हार का सामना करना पड़ा। अपर्णा यादव की भारतीय जनता पार्टी और विशेषकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बढ़ती नजदीकी से ही उनके सपा छोड़ने के कयास लगाए जाने लगे थे।

दरअसल, अपर्णा यादव ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के कोरोना वैक्सीन न लगवाने के बयान पर अपनी अलग प्रतिक्रिया देकर यह संकेत दे दिया था कि परिवार में उनकी दूरी बढ़ती जा रही है। चाचा शिवपाल सिंह यादव से विवाद के बाद अखिलेश यादव पर कई बार अपर्णा यादव हमलावर रहीं। हालाकि पिछले साल इस चर्चा को कुछ हद तक तब विराम लगा जब अपर्णा यादव ने एक शुभकामना संदेश में अखिलेश यादव की फोटो को भी अपनी होर्डिंग में स्थान दिया। लेकिन इससे भी अपर्णा और अखिलेश यादव के बीच तल्खी कम न हुईं। तब से उनके दोबारा कैंट से लड़ने की भी अटकलें तेज होने लगी।

अपर्णा यादव ने कैंट में सपा कार्यकर्ताओं की एक अलग टीम तैयार की। उनकी सक्रियता पिछले दिनों कैंट में तेजी से बढ़ी। मंदिरों में आरती के अलावा कैंट के गुरुद्धारों में जाने के साथ क्षेत्र में कई शिविर भी लगवाए। अपर्णा ने दिलकुशा स्थित बाबा रामानंद आश्रम में खिचड़ी भोज किया। लोहड़ी में गुरुद्वारा सिंह सभा भी गईं। मुलायम सिंह यादव के जन्म दिन पर अपर्णा यादव और अखिलेश यादव भी साथ नजर आए थे।

पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह की मृत्यु पर उनके अंतिम दर्शन के लिए अखिलेश यादव नहीं गए थे। लेकिन अपर्णा कल्याण सिंह के माल एवेन्यू स्थित आवास पर जाकर श्रद्धांजलि दी थी। अपर्णा यादव की कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की फोटो भी सामने आयी। जबकि अपर्णा यादव की सुरक्षा बढ़ाए जाने के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार अपर्णा यादव के चलाए जा रहे गौशाला भी पहुंचे थे।

अब बदल रही कैंट की तस्वीर : अब तक अपर्णा यादव के सपा से कैंट से चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही थी। अब वह भाजपा में आने के बाद कैंट से प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। अपर्णा यादव के इस सीट पर आने के बाद भाजपा के अन्य दावेदारों के बीच संशय बन गया है। कभी इस सीट से उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा को लड़ाने की चर्चा तेज हुई तो कभी इसी सीट से 2012 और 2017 का चुनाव जीतने वाली डा. रीता बहुगुणा जोशी अपने बेटे मयंक जोशी के लिए सांसद पद से इस्तीफा देने की बात कहते हुए नजर आयीं। अब सपा की ओर से भी नगर अध्यक्ष सुशील दीक्षित, व्यापारी नेता पवन मनोचा और राजू गांधी के बीच टिकट की दावेदारी है। अपर्णा यादव लखनऊ लौटेंगी तब यह साफ हो जाएगा कि उनको कैंट से लड़ना है या फिर कोई और सीट उनके लिए तैयार की जा रही है।

विक्रमादित्य मार्ग पर परिवार एक पार्टी तीन : यूपी की राजनीति का केंद्र बिन्दु विक्रमादित्य मार्ग है। अब इसी विक्रमादित्य मार्ग पर अखिलेश यादव परिवार के तीन महत्वपूर्ण सदस्य अलग-अलग पार्टी की आवाज बुलंद करते दिखायी देंगे। विक्रमादित्य मार्ग पर पहला मकान सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का है। जबकि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के घर के बगल में प्रसपा लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का घर है। इनके ही बगल में प्रतीक यादव का घर है। जो अब भाजपा से जुड़ गए हैं।

तेजी से बढ़ने लगे अपर्णा के फालोअर : भाजपा की सदस्यता लेने के बाद ही अपर्णा यादव के ट्विटर पर फालोअर लगातार बढ़ने लगे। बुधवार सुबह तक ट्विटर पर अपर्णा यादव के कुल फालोअर 22.8 हजार थे। मात्र एक घंटे में यह संख्या बढ़कर 23.9 हजार हो गई।

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