Sakat Chauth 2022: गणेश संकष्टी चतुर्थी आज, संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी महिलाएं; जानें- शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

संतान की दीर्घायु के लिए माताएं दिनभर निर्जला व्रत रख काले तिल और गुड़ का लड्डू बनाती हैं। ऐसी मान्यता है कि दिनभर व्रत रहने के बाद शाम को छत और आंगन में आंटे से चौक बनाकर गाय के गोबर से गणेश जी का प्रतीक बनाकर पूजन करेंगी।

Vikas MishraPublish: Fri, 21 Jan 2022 09:16 AM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 03:20 PM (IST)
Sakat Chauth 2022: गणेश संकष्टी चतुर्थी आज, संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी महिलाएं; जानें- शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

लखनऊ, जागरण संवाददाता। संतान की समृद्धि की कामना के पर्व सकट पर माताएं दिनभर निर्जला व्रत रख काले तिल व गुड़ से बने लड्डू बनाती है। शुक्रवार की शाम को छत और आंगन में आंटे से चौक बनाकर गाय के गोबर से गणेश जी का प्रतीक बनाकर पूजन करेंगी। रात 8:40 बजे चंद्रोदय के निर्धारित समय से एक घटे बाद तक पूजन चलेगा।

पूजा स्थल पर दीपक जलाकर गौरी गणेश की पूजा कर संतान की सुख समृद्धि की कामना की जाएगी। आचार्य अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि माघ महीने की चतुर्थी संतान के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करती है। सकट को संकष्टी चतुर्थी और तिलकुट चौथ भी कहते हैं। बलि के पीछे मान्यता है कि संतान पर पड़ने वाली बला दूर हो जाए। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान श्री गणेश कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।

आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि सकट का कथानक है कि मां पार्वती स्नान कर रही थीं और श्री गणेश को पहरेदारी के लिए लगा दिया था। भगवान शंकर आए और अंदर जाना चाहते थे, लेकिन श्री गणेश ने जाने से रोक दिया। भगवान शंकर क्रोधित होकर उनका सिर काट देते हैं। मां पार्वती के विलाप के चलते भगवान शिव ने उन्हें हाथी का सिर लगा दिया। इसके बाद से श्री गणेश गजानन हो गए। उस दिन से सभी की रक्षा के लिए संकष्ठी चतुर्थी पर श्री गणेश जी की पूजा होती है। 

यह भी है कथानकः आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि एक बार जब कुम्हार ने जब बर्तन बनाकर आंवां लगाया तो आंवां नहीं पका। परेशान होकर वह राजा के पास गया और बोला कि महाराज न जाने क्या कारण है कि आंवां पक ही नहीं रहा है। राजा ने राजपुरोहित को बुलाकर कारण पूछा। राजपुरोहित ने कहा कि हर बार आंवां लगाते समय एक बच्चे की बलि देने से आंवां पक जाएगा। जिस परिवार की बारी होती, वह अपने बच्चों में से एक बच्चा बलि के लिए भेज देता। एक बुजुर्ग के इकलौते बेटे का नंबर आया तो उसने लड़के को सकट की सुपारी तथा दूब देकर कहा कि भगवान का नाम लेकर आंवां में बैठ जाना। सकट माता तेरी रक्षा करेंगी। इस बार सकट माता की कृपा से एक ही रात में आंवां पक गया। सवेरे कुम्हार ने देखा तो हैरान रह गया। आंवां पक गया और बुजुर्ग का बेटा जीवित व सुरक्षित था।तब से सकट माता की पूजा और व्रत का विधान चला आ रहा है।

Edited By Vikas Mishra

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept