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UP Assembly Election 2022: ...तो संगठन के दम पर ही मैदान मार लेगी भाजपा!, जानिए रणनीति

UP Assembly Election 2022 वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में प्राणवायु पाने वाली भाजपा को ऊर्जा मिली तो संगठन पर काम तेज हुआ और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की सपा सरकार को न सिर्फ बेदखल किया बल्कि 312 सीटों पर जीत का इतिहास भी रच डाला।

Umesh TiwariTue, 23 Nov 2021 09:19 AM (IST)
UP Assembly Election 2022: ...तो संगठन के दम पर ही मैदान मार लेगी भाजपा!, जानिए रणनीति

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। विकास के दावे और वादों से जनता का वोट जीतने का प्रयास कर रही भाजपा संगठन की ताकत भी इस रणनीति के साथ बढ़ा रही है, जो चुनाव की तस्वीर बदल दे। पिछले विधानसभा चुनाव में अपने कार्यकर्ता और आम मतदाता के मिलाकर लगभग साढ़े तीन करोड़ वोट भाजपा को मिले थे, उसी ने 312 सीटों की प्रचंड जीत दिला दी थी। इस वक्त पार्टी के करीब ढाई करोड़ सदस्य हैं, जिसे बढ़ाकर चार करोड़ करने के लक्ष्य के साथ हर बूथ पर सदस्यता अभियान शुरू कर दिया गया है।

वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव की मोदी लहर से उत्तर प्रदेश में प्राणवायु पाने वाली भाजपा को ऊर्जा मिली तो संगठन पर काम तेज हुआ और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की सपा सरकार को न सिर्फ बेदखल किया, बल्कि 312 सीटों पर जीत का इतिहास भी रच डाला। उस चुनाव के रणनीतिकार तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अमित शाह थे, जिन्होंने बूथ प्रबंधन पर ही जोर दिया और प्रचंड जीत दिलाई।

बूथ पर युद्ध का मोर्चा सजाने की इसी रणनीति का लाभ पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में भी मिला। वह रणनीति इतनी कारगर रही कि धुर विरोधी सपा और बसपा का गठबंधन भी पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। अब सामने 2022 के विधान सभा चुनाव की चुनौती है। इसके लिए भी पार्टी ने बूथ जीतो, चुनाव जीतो की नीति ही अपनाई है। हर बूथ पर पार्टी की ताकत बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

पिछले दिनों लखनऊ से ही गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी के सदस्यता अभियान का शुभारंभ किया। हर बूथ पर शिविर लगाकर और मिस्ड काल के जरिए नए सदस्य बनाए जा रहे हैं। कुल करीब पौने दो लाख बूथों पर यह अभियान चलाया जा रहा है। सभी पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हर बूथ पर सौ नए सदस्य बनाने का लक्ष्य : पार्टी ने हर बूथ पर सौ नए सदस्य का फार्मूला देते हुए कुल डेढ़ करोड़ नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके पीछे रणनीति है कि संगठन की ताकत से ही चुनाव का परिदृश्य बदल दिया जाए। दरअसल, 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा 403 में से 384 सीटों पर लड़ी थी। बाकी सहयोगी दलों के लिए छोड़ी थीं। प्रदेश में कुल मतदाता 14.5 करोड़ थे, जिसमें से पार्टी को कुल तीन करोड़ 44 लाख 32 सौ 99 वोट मिले थे। इसमें पार्टी के तब के सदस्यों और आमजन का वोट था। इसी से 312 का प्रचंड बहुमत पा लिया। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में लगभग ढाई करोड़ सदस्य हैं। इसे बढ़ाकर चार करोड़ करने की तैयारी है। यह पिछले चुनाव में भाजपा को मिले वोटों से भी अधिक है। ऐसे में संगठन की ताकत से ही जीत की राह आसान की जा सकती है।

नए सदस्यों के साथ पुरानों का सत्यापन : बूथ सदस्यता अभियान के लिए कार्यकर्ताओं को दो पत्रक दिए गए हैं। एक पत्रक नए बन रहे सदस्यों से भरवाया जा रहा है। उनसे मिस्ड काल कराया जा रहा है। उन्हें भाजपा की पट्टिका पहनाकर घर पर 'मेरा परिवार, भाजपा परिवार' का स्टीकर लगाया जा रहा है। इसके अलावा वर्तमान में पार्टी के ढाई करोड़ में से लगभग डेढ़ करोड़ का ही डेटा उपलब्ध है। अब पुरानों से भी पत्रक भरवाकर और मिस्ड काल कराकर उनका सत्यापन करते हुए डेटा अपडेट किया जा रहा है।

Edited By: Umesh Tiwari

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