Anti Sikh Riots: डीआइजी बालेंदु भूषण ने कहा, प्रकरण की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई, एसआइटी करेगी पैरवी

एसआइटी (विशेष जांच दल) ने सिख विरोधी दंगों में भले ही गिरफ्तारियां शुरू कर दी हो लेकिन अभी भी एसआइटी के डीआइजी का मानना है कि इस प्रकरण की जब तक फास्ट ट्रैक काेर्ट में सुनवाई नहीं होगी तब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा।

Abhishek VermaPublish: Fri, 24 Jun 2022 06:01 PM (IST)Updated: Fri, 24 Jun 2022 06:01 PM (IST)
Anti Sikh Riots: डीआइजी बालेंदु भूषण ने कहा, प्रकरण की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई, एसआइटी करेगी पैरवी

कानपुर, जागरण संवाददाता। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के 38 साल बाद सिख विरोधी दंगों की गूंज एक बार फिर सुनाई पड़ी है। इस बार यह गूंज पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए है, क्योंकि लंबे समय बाद एसआइटी (विशेष जांच दल) ने हत्याकांड से जुड़े आरोपितों की गिरफ्तारियां शुरू की हैं। सिख विरोधी दंगों के तथ्यों को जानने के लिए तमाम शहरवासी उत्सुक हैं। गुरुवार को हमारे संवाददाता गौरव दीक्षित ने एसआइटी के डीआइजी बालेंदु भूषण सिंह से साक्षात्कार में केस की विवेचना और आगे की योजना के बारे में वार्ता की। इस बातचीत का सबसे अहम हिस्सा यह है कि एसआइटी का मानना है कि पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा, जब इस प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...

: एसआइटी का गठन कब हुआ और इसके गठन के क्या उद्देश्य थे?

31 अक्टूबर व एक नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगों में कानपुर में 127 सिखों की हत्या हुई थी। आरोप लगा कि तत्कालीन सरकारों की ढुलमुल नीतियों की वजह से पीड़ितों को न्याय नहीं मिला। ऐसे में वर्तमान सरकार ने 35 साल बाद 27 मई 2019 को दोबारा जांच के लिए एसआइटी का गठन किया। एसआइटी गठन के दो उद्देश्य थे। पहला ऐसे मामले जिनमें चार्जशीट लगी हो, उसकी पुनरावलोकन व परीक्षण कर दोबारा जांच के लिए संस्तुति। दूसरा, अंतिम रिपोर्ट लगे मामलों में अदालत से अनुमति लेकर दोबारा जांच। 

: सिख विरोधी दंगों में कितने मुकदमे दर्ज हुए और मौजूदा क्या परिदृश्य है

कानपुर में दंगों के बाद कुल 1251 मुकदमे दर्ज हुए, जिसमें 40 मामलों में जघन्य अपराध की धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। 40 मामलों में 11 में जांच के बाद जार्चशीट लगी, जिसमें चार मामलों में दोबारा जांच के लिए संस्तुति शासन को जा चुकी है। लापरवाही में नाम खोलने की वजह से सभी केस में आरोपित बरी हो गए हैं। जबकि 29 में फाइनल रिपोर्ट लगी, जिसमें 9 मामले एसआइटी से जांच के बाद तत्काल बंद कर दिए थे। बाकी बचे 20 मामलों में जांच की। इनमें छह प्रकरणों को तत्काल जांच बंद कर दी। दो अन्य मामलों में हाल ही में साक्ष्य न मिलने की वजह से जांच बंद कर दी गई। एक मामले में कार्रवाई प्रचलन में है, जबकि 11 मामलों में साक्ष्य मिले हैं। इनमें भी आठ प्रकरणों में गिरफ्तारी छोड़कर जांच पूरी हो चुकी है। 

: जांच में आरोपित और गवाहों की क्या स्थिति है?  

11 मामलों में 96 आरोपित प्रकाश में आए, जिसमें 23 की मृत्यु हो चुकी है। 73 की गिरफ्तारी होनी है और 11 अब तक गिरफ्तार हो चुके हैं। एसआइटी ने करीब एक हजार लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें से 174 गवाह चश्मदीद हैं। इनमें से 22 की अदालत में गवाही कराई जा चुकी है। 

: विवेचना को लेकर आपके अनुभव कैसे हैं? 

मेरे जीवन की सबसे कठिन परीक्षा थी। शून्य से चले। सबसे पहले रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट आधार बनी, जिसमें कानपुर हिंसा से जुड़े 654 लोगों के शपथपत्र लगे थे, इनमें से 135 शपथ पत्रों में दंगाइयों के नाम थे। 11 के 11 केस ब्लाइंड थे। निराला नगर हत्याकांड सबसे ज्यादा चुनौती भरा था, क्योंकि इसमें कई बड़े नाम शामिल थे। पूर्व राज्यमंत्री शिवनाथ सिंह कुशवाहा का भतीजा राघवेंद्र इसमें आरोपित है। पंजाब जाकर एसआइटी ने जिस तरीके से साक्ष्य जुटाए, वह बड़ा चुनौती का कार्य था।  

: दंगे में शामिल कुछ बड़े नाम प्रकाश में आए हों तो बताएं

आरोपितों में पूर्व पार्षद, वकील, व्यापारी सभी के नाम हैं, जिनके नाम अभी खोलना ठीक नहीं है। 

:  आगे की क्या योजनाएं हैं?

अभी तो गिरफ्तारियां ही करनी हैं। जल्द ही मैं एसआइटी के अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध करूंगा कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट करे। ताकि आरोपितों को सजा और पीड़ितों को न्याय मिल सके। 

: सफलता का श्रेय किसे देंगे?

वैसे तो सभी ने मेहनत की, लेकिन एसआइटी की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय सब इंस्पेक्टर एसपी सिंह को है। 11 में से पांच मामलों को उन्होंने ही खोला। 

Edited By Abhishek Verma

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept