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Medicines Problem: कॉरपोरेशन से नहीं आ पाईं दवाइयां, कानपुर के हैलट में किल्लत बरकरार

हैलट अस्पताल को एक माह बाद मिला आइडी पासवार्ड अब ट्रेनिंग की समस्या। ऑनलाइन आर्डर देने में दिक्कत प्राचार्य ने ट्रेनिंग कराने के लिए शासन को लिखा। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में दवाइयों खरीद की स्थानीय व्यवस्था खत्म कर दी है।

ShaswatgFri, 25 Dec 2020 09:42 AM (IST)
Medicines Problem: कॉरपोरेशन से नहीं आ पाईं दवाइयां, कानपुर के हैलट में किल्लत बरकरार

कानपुर, जेएनएन। हैलट अस्पताल में दवाइयों की किल्लत बरकरार है। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (यूपीएमएससी) छह माह में दवाइयों की आपूर्ति नहीं कर सका है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्राचार्य ने 25 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। ताकि अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाई जा सके। साथ ही शासन को हकीकत से अवगत भी कराया है। 

दोबारा खरीदी गई दवाओं का स्टॉक भी खत्म

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. रजनीश दुबे ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में दवाइयों खरीद की स्थानीय व्यवस्था खत्म कर दी है। उसकी जगह जुलाई से दवा आपूर्ति का जिम्मा यूपीएमएसएसी को सौंप दिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद से कॉरपोरेशन ने दवाइयों की आपूर्ति नहीं की है। कॉलेज प्रशासन शासन से अनुमति लेकर दोबारा 25-25 लाख रुपये की दवाइयां खरीद चुका है। उन दवाइयों का स्टॉक भी अब खत्म होने लगा है। इस समस्या को देखते हुए एक माह पहले प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने अपर मुख्य सचिव को अस्पताल में दवाइयों के संकट से अवगत कराया था। इस पर अपर मुख्य सचिव ने यूपीएमएससी के महाप्रबंधक को सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों को आइडी एवं पासवर्ड देने के आदेश दिए थे। 

एक माह बाद मिली आइडी

आदेश के एक माह बाद यूपीएमएससी ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट समेत सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों को आइडी एवं पासवर्ड दो दिन पहले ही दिए हैं। ट्रेनिंग नहीं होने से पर्चेच आर्डर जनरेट नहीं हो रहा है। इस वजह से दवाइयों के आर्डर नहीं दिए जा सके हैं।

ट्रेनिंग कराने के निर्देश 

प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने शासन को समस्या से अवगत कराया था। इस पर यूपीएमएससी के अधिकारियों ने निजी एप के जरिए ऑनलाइन वर्कशॉप की है। हालांकि यह वर्कशॉप स्वास्थ्य विभाग के फार्मासिस्टों के लिए की गई। जल्द ही मेडिकल कॉलेज के लिए भी ट्रेनिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। 

 इनका ये है कहना

ई-हॉस्पिटल सिस्टम की ई-फार्मेसी से यूपीएमएससी को जोड़ा गया है। इसे चलाने की ट्रेनिंग न होने से दिक्कत हो रही है। इस समस्या से शासन को अवगत कराया है। ताकि जल्द से जल्द ट्रेनिंग कराई जा सके। उसके बाद दवाइयों के आर्डर देकर अस्पताल में दवाइयों के संकट को दूर किया जा सके। यूपीएमएससी को पहले ही 1.30 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। - प्रो. आरबी कमल, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

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