जागरण विमर्श 2021: उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने दिलाया भरोसा, नवोन्वेषी छात्राें को सरकार दे रही प्रोत्साहन

Jagran Vimarsh 2021 उक्त वक्तव्य प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने दिया। मंगलवार को वह जागरण विमर्श में उच्च व तकनीकी शिक्षा संभावनाएं व प्रयास सत्र को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पहले उच्च शिक्षा नीति की स्थिति बदहाल थी।

Shaswat GuptaPublish: Tue, 28 Dec 2021 11:48 PM (IST)Updated: Tue, 28 Dec 2021 11:48 PM (IST)
जागरण विमर्श 2021: उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने दिलाया भरोसा, नवोन्वेषी छात्राें को सरकार दे रही प्रोत्साहन

कानपुर, [विजय प्रताप सिंह]। Jagran Vimarsh 2021 प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत बदहाल थी, सोचनीय थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से जो नई शिक्षा नीति लागू की गई है, उससे उच्च शिक्षा के  लिए नामांकन दर में बढ़ोतरी होगी। क्योंकि पहले महज 23 से 25 प्रतिशत लोग ही उच्च शिक्षा के लिए अपना नामांकन करा पाते थे। अब नई  शिक्षा नीति के तहत 2035 तक नामांकन दर 50 प्रतिशत तक पहुंचाने  का लक्ष्य है। 

उक्त वक्तव्य प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने दिया। मंगलवार को वह जागरण विमर्श में उच्च व तकनीकी शिक्षा संभावनाएं व प्रयास सत्र को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पहले उच्च शिक्षा नीति की स्थिति बदहाल थी, जिसे प्रधानमंत्री ने बदलते हुए वर्ष 2020 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की और मुख्यमंत्री के निर्देशन में इसे धरातल पर तेजी से उतारा जा रहा है। नई शिक्षा नीति की योजनाएं मिशन मोड पर चल रही हैं। महाविद्यालय, विश्वविद्यालय व हास्टल बनाए जा रहे हैं। अब तक 78 महाविद्यालय बनाए जा रहे हैं, जिनमें 13 महाविद्यालयों का काम लगभग अंतिम चरण में और 42 महाविद्यालयों में लगभग 75 फीसद काम हो चुका है। सरकार तीन राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटी भी शुरू करेगी। इसके साथ ही 28 प्राइवेट यूनीवर्सिटी खोले जाने का अनुबंध भी हुआ है। शिक्षा से ही राष्ट्र का विकास होता है और नई शिक्षा नीति से छात्रों का सर्वांगीण विकास होगा। नई शिक्षा नीति के तहत छात्र-छात्राएं अपने मन के अनुसार विषय चुन सकेंगे। कोरोना काल में शिक्षकों ने बच्चों को आनलाइन पढ़ाकर नई टेक्नोलाजी ईजाद की, जिसका असर पढ़ाई पर नहीं पड़ा। आने वाले समय में नई शिक्षा नीति काफी लाभकारी होगी। 

छत्रपति शााहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विनय पाठक ने समाज के समृद्ध लोगों से आह्वान किया कि शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए आगे आना होगा। ऐसे लोग छोटे-छोटे शिक्षण संस्थान खोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानपुर में एक्सीलेंट एजूकेशनल सेंटर अवश्य खुलना चाहिए। कानपुर का समाज इस ओर ध्यान दे और ऐसे संस्थान खोलने का प्रयास करे जिसमें उनके ही बच्चे पढ़ सकें। शिक्षा का लोकतांत्रिककरण तभी हो सकेगा, जब बच्चे को उसके मन के संस्थान में प्रवेश मिल सकेगा। अभी जो कानपुर में शिक्षण संस्थान हैं, उसमें काफी कम बच्चे ही प्रवेश पा सकते हैं। 

चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीआर सिंह ने कृषि क्षेत्र में ऐसी तकनीक विकसित करने पर बल दिया कि युवा इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बनाएं। क्योंकि हमारे किसान 60 से 65 वर्ष के हैं। इस कारण कोई ऐसी नई तकनीक कारगर साबित नहीं हो रही है, जो अगले पांच साल तक चले। कोरोना काल में जितनी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, उतना कभी नहीं हुआ। 2016 में प्रधानमंत्री ने जब किसानों की आय दो गुनी करने की घोषणा की तो सबसे ज्यादा कृषि विज्ञानियों के लिए बड़ी चुनौती सामने आ गई और वह मजबूर हो गए कि उनके पास जो तकनीक है, उसमें किस तरह से सुधार किया जाए। विज्ञानियों ने सुधार किए तो आय बढ़ी है। विश्वविद्यालय से संबद्ध 14 जिलों से आंकड़े एकत्र किए गए तो सैकड़ों किसानों  की आय दो गुनी हो चुकी है। सीएसए ने अब तक 300 वैरायटियां दी हैं। इसमें मटर की आजाद (पी-1) प्रजाति ऐसी है जो पूरे देश में मटर के उत्पादन में 80 प्रतिशत इसी प्रजाति की है।

एसएन सेन डिग्री कालेज की प्राचार्य डा. निशा अग्रवाल ने नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों को अपने विषय चुनने की आजादी मिलेगी। समाज के हर वर्ग को अच्छी  शिक्षा चाहिए। ऐसी शिक्षा जो कौशल दे। जीवकोपार्जन के लिए उलझाये नहीं। 

इनका का मंच पर हुआ सम्मान: दैनिक जागरण की आयोजित विमर्श कार्यक्रम में चुन्नीगंज के अभिकर्ता राकेश पांडेय, नौबस्ता, सर्वोदय नगर डिपो के निखिल अग्रवाल, बिरहाना रोड के अभिकर्ता प्रणय तिवारी, रामादेवी डिपो से दिलीप तिवारी व विजयनगर डिपो के वैभव दीक्षित को मंच पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने सम्मानित किया।

Edited By Shaswat Gupta

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