आज हाई कोर्ट कर सकता है यूपीसीए और एपेक्स के विवाद का अंत, निर्णय आने पर तय होगा भविष्य

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में 42 वर्षों के बाद चुनाव और एजेंडे को लेकर चल रहे विवाद को हाइकोर्ट आज फैसला सुना सकता है। सुनवाई पर ही एसोसिएशन के आला अधिकारियों के साथ उप्र का क्रिकेट भविष्य भी टिका हुआ है।

Abhishek VermaPublish: Mon, 10 Jan 2022 03:51 PM (IST)Updated: Mon, 10 Jan 2022 03:51 PM (IST)
आज हाई कोर्ट कर सकता है यूपीसीए और एपेक्स के विवाद का अंत, निर्णय आने पर तय होगा भविष्य

कानपुर, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में 42 वर्षों के बाद चुनाव और एजेंडे को लेकर चल रहे विवाद पर सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। लंबे समय से यूपीसीए में चल रहे इस विवाद के कारण पिछले दिनों वार्षिक आमसभा और एपेक्स काउंसिल की बैठक भी प्रभावित हो चुकी है। हाई कोर्ट से निर्णय आने के बाद यूपीसीए का भविष्य तय होगा।

हाई कोर्ट में एपेक्स सदस्य मनोज पुंडीर की मनमानी से हुई एजीएम और एपेक्स काउंसिल की बैठक को लेकर याचिका दायर की गई है। हालांकि यूपीसीए ने पिछली सुनवाई से पहले ही एपेक्स सदस्यों और अधूरे कोरम के बीच एजीएम और बैठक का आयोजन करा लिया है। जिसको लेकर भी विवाद बढ़ सकता है।

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में 42 वर्षों के बाद चुनाव और एजेंडे को लेकर चल रहे विवाद होने वाली सुनवाई पर एसोसिएशन के आला अधिकारियों के साथ उप्र का क्रिकेट भविष्य भी टिका हुआ है। लंबे समय से विवादों में चल रहे यूपीसीए ने वार्षिक आमसभा और एपेक्स काउंसिल की बैठक को मनमानी से पूरा किया है। जिसको लेकर बागी गुट का आक्रोश और भी बढ़ गया है। एपेक्स सदस्य मनोज पुंडीर को उम्मीद है कि यूपीसीए की ओर से हुई एजीएम और एपेक्स काउंसिल की बैठक तथा चुनाव नहीं कराने पर सुनवाई हाई कोर्ट सुनवाई कर सकता है। 

इसके साथ ही यूपीसीए की मनमानी पर वर्किंग कमेटी के सदस्य पूरन डाबर के इस्तीफे और दूसरे सदस्य अशोक बांबी को उम्र का हवाला यूपीसीए ने कमेटी से बाहर किया है। जो पूरी तरह से गलत बताया जा रहा है। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से इसकी जानकारी रखने की बात कही जा रही है। वे अगर वर्चुअल बैठक हुई तो फिर से विरोध करके बायकाट किया जाएगा। मनमानी नहीं करने दी जाएगी। ई-मेल करके जानकारी दे दी जाएगी। क्रिकेट विकास के लिए 15 सदस्यों के एक बैठक में होना जरूरी होता है। जबकि यूपीसीए ने ऐसा नहीं किया। जिसको लेकर भी विवाद बढ़ने की उम्मीद है।

Edited By Abhishek Verma

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