कानपुर में मच्छरों पर प्रभावी नियंत्रण को नहीं बन सकी एंटोमोलाजिकल यूनिट, केंद्र से मिला बजट शासन ने किया था आवंटित

केंद्र सरकार की पहल पर शासन से वित्तीय वर्ष 2017-18 में प्रत्येक मंडल में एंटोमोलाजिकल यूनिट की स्थापना के लिए 4. 64 लाख रुपये बजट आवंटित किया गया था। ताकि यूनिट की स्थापना की जा सके। इस यूनिट की लैब में मच्छरों का घनत्व का आकलन किया जा सकता था।

Shaswat GuptaPublish: Fri, 05 Nov 2021 09:21 AM (IST)Updated: Fri, 05 Nov 2021 09:21 AM (IST)
कानपुर में मच्छरों पर प्रभावी नियंत्रण को नहीं बन सकी एंटोमोलाजिकल यूनिट, केंद्र से मिला बजट शासन ने किया था आवंटित

कानपुर, जेएनएन। प्रदेश के सर्वाधिक वेक्टर बार्न डिजीज से प्रभावित जिलों में मच्छरों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एंटोमोलाजी यूनिट स्थापित करने की कवायद चार साल पहले शुरू हुई थी, ताकि डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया और टायफाइड प्रभावित जिलों में मच्छरों का परीक्षण, संक्रमण का पता लगाकर उस हिसाब से प्रभावित नियंत्रण किया जा सके। स्वास्थ्य महकमे के अफसरों की हीलाहवाली की वजह से यहां आज तक जोनल एंटोमोलाजिकल यूनिट की स्थापना नहीं हो सकी है। शहर में जीका वायरस की दस्तक के बाद एंटोमोलाजिकल यूनिट की कमी खल रही है। ऐसे में मच्छरों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली व लखनऊ भेजने पड़ रहे हैं। शहर में जीका वायरस की दस्तक के बाद मंडल में फिर से जोनल एंटोमोलाजिकल यूनिट की स्थापना की कवायद शुरू हो गई है।

केंद्र सरकार की पहल पर शासन से वित्तीय वर्ष 2017-18 में प्रत्येक मंडल में एंटोमोलाजिकल यूनिट की स्थापना के लिए 4. 64 लाख रुपये बजट आवंटित किया गया था। ताकि यूनिट की स्थापना की जा सके। इस यूनिट की लैब में मच्छरों की प्रजाति का पता लगाने एवं घनत्व का आकलन किया जा सकता था। यहां की प्रयोगशाला में मच्छरों पर परीक्षण कर संक्रमण फैलाने का भी पता लगाना संभव होता। फिर उसके हिसाब से मच्छरों की रोकथाम एवं इलाज की गाइडलाइन जारी होती।

अपर निदेशक का होता पूरा नियंत्रण: एंटोमोलाजिकल यूनिट अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के नियंत्रण में होती। यहां होने वाले कार्यों एवं आंकड़ों की रिपोर्ट सीधे स्वास्थ्य महानिदेशालय के अपर निदेशक मलेरिया एवं निदेशक संचारी एवं वेक्टर बार्न डिजीज को भेजी जाती।

लैब में होते यह कार्य : इस यूनिट की लैब में कीट वैज्ञानिक मच्छरों का विच्छेदन कर संक्रमण का अध्ययन करते। माइक्रोस्कोप से मच्छरों पर अध्यन व उनके खून के नमूने की जांच भी करते। यहां का अध्ययन मच्छ जनित बीमारियों के रोकथाम में सहायक होता। इसके लिए कीट वैज्ञानिक, लैट टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट, कार्यालय सहायक, वार्ड ब्वाय एवं सफाईकर्मी की तैनाती का प्रविधान किया गया था।

इनका ये है कहना: 

मेरे संज्ञान में एंडोमोलाजिकल यूनिट का प्रकरण नहीं है। इसका पता लगाएंगे, अगर ऐसा है तो मंडल में इस यूनिट की स्थापना के लिए प्रयास करेंगे, जिससे मच्छर जनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।  - डा. जीके मिश्रा, एडी हेल्थ, कानपुर मंडल।

Edited By Shaswat Gupta

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