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कानपुर में इलाज के अभाव में बच्चे ने अपने पिता के कंधे पर दम तोड़ा

कानपुर के हैलट अस्पताल में आए दिन यहां इलाज के अभाव मे मौतें होती हैं और मेडिकल कॉलेज प्रशासन सिर्फ जांच के आदेश देकर मामला रफा-दफा कर देता है।

Dharmendra PandeyTue, 30 Aug 2016 07:53 PM (IST)
कानपुर में इलाज के अभाव में  बच्चे ने अपने पिता के कंधे पर दम तोड़ा

कानपुर (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल आए दिन खुलती ही रहती है। नया मामला प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर के प्रख्यात लाला राजपत राय (हैलेट) अस्पताल का है। जहां पर लगता है कि डॉक्टर संवेदनहीनता की सभी हदें पार कर चुके हैं।

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यहां बीती 26 अगस्त को एक पिता सुनील कुमार अपने 12 वर्ष के बेटे अंश के इलाज के लिए पहुंचा तो जरूर लेकिन कंधे पर बच्चे को लेकर जगह-जगह घूमता रहा। इसी दौरान बच्चे ने उसके कंधे पर ही दम तोड़ दिया। अब मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

संवेदनहीनता : कानपुर में कंधे पर बच्चे को लेकर दौड़ता रहा पिता, हालत गंभीर

बाल आयोग के साथ जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग भी सक्रिय हो गया है, लेकिन काश यह सक्रियता उस समय होती जब 12 वर्ष के बच्चे को इलाज की नितांत जरूरत थी।

कानपुर के हैलट अस्पताल में आए दिन यहां इलाज के अभाव मे मौतें होती हैं और मेडिकल कॉलेज प्रशासन सिर्फ जांच के आदेश देकर मामला रफा-दफा कर देता है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। इस बार एक ऐसी तस्वीर देखने के मिली है, जो आपके रोंगटे खड़े कर सकती है।

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एक पिता इलाज के लिए अपने बच्चे को कंधे पर लाद कर हैलट के चक्कर लगाता रहता है, लेकिन उसको भर्ती नहीं किया जाता और बच्चा पिता के कंधे पर ही दम तोड़ देता है, फिर भी लाचार पिता अपने बेटे की लाश को कंधे पर लादे हुए जगह-जगह ले कर जाता है और अंत में थक-हार कर हैलट के बाल रोग अस्पताल मे पहुंचता है, जहां पर डॉक्टर उसे देखते तो हैं, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पिता ने इस दौरान कभी डॉक्टरों से विनती की तो कभी स्ट्रेचर के लिए भागदौड़, लेकिन किसी का दिल नहीं पिघला। बीमार बेटे ने पिता के कंधों पर ही अपना दम तोड़ दिया।वह पिता हार नहीं मानता और एक निजी नर्सिंग होम लेकर जाता है, लेकिन वहां से भी वही जवाब मिलता है कि इलाज में देरी की वजह से उसके बच्चे की मौत हो गई।

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पूरा मामला चार दिन पहले का है जहां फजलगंज के रहने वाले सुनील के पुत्र अंश को जिसकी उम्र सिर्फ 12 वर्ष थी उसको तीन दिन से बुखार आ रहा था। जब बुखार मे आराम नही मिला तो सुनील अंश को हैलट अस्पताल लेकर पहुंचा मगर वहां उसे भर्ती ही नहीं किया गया और इलाज के अभाव मे उसकी मौत हो गई। इस पूरे मामले की जानकारी होने के बाद भी किसी भी डॉक्टर पर कोई भी कार्रवाई प्रमुख अधीक्षक ने नहीं की है और मीडिया के सामने भी आने से कतरा रहे है।

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हैलेट अस्पताल का दावा है कि बच्चे की मौत उससे पहले हो चुकी थी, जब उसके पिता उसे लेकर उनके पास पहुंचे थे। अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ आरसी गुप्ता ने कहा कि हमने उसे दाखिल किया था। हमने पाया, दिल की धड़कन नदारद थी, नब्ज नदारद थी, आंखों की पुतलियां फिरी हुई थीं, और फैल चुकी थीं। हमें उसकी हालत देखकर ही पता चल रहा था कि उसकी मौत हमारे पास लाए जाने से दो-तीन घंटे पहले ही हो चुकी थी।

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अपने बेटे को खो चुके पिता ने कहा कि मैं जब अपने बेटे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचा तो उन्होंने कहा आपने देर कर दी। दस मिनट पहले आते तो बच जाता। हैलट अस्पताल में हमें कोई सुविधा नहीं मिली, सिर्फ जूनियर डॉक्टर मिले। मैं बेटे को कंधे पर लादकर एक जगह-से दूसरी जगह तक दौड़ता रहा। सुनील कुमार बताते हैं कि 12 वर्षीय अंश छठी कक्षा में पढ़ता था, और बहुत होशियार था, मैं सिर्फ नौ मिनट में उसे लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंच गया था, जहां से मुझे सरकारी अस्पताल में जाने के लिए कहा गया। दरअसल रविवार रात से ही अंश को बहुत तेज बुखार था।

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