फसलों को बेसहारा पशुओं से बचाने को लगाएं तुलसी, मेंथा, पिपरेटा

जागरण संवाददाता जौनपुर केंद्र व प्रदेश की सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का भले ही

JagranPublish: Thu, 02 Dec 2021 04:52 PM (IST)Updated: Thu, 02 Dec 2021 04:52 PM (IST)
फसलों को बेसहारा पशुओं से बचाने को लगाएं तुलसी, मेंथा, पिपरेटा

जागरण संवाददाता, जौनपुर : केंद्र व प्रदेश की सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का भले ही दंभ भर रही हो, लेकिन दूसरी तरफ बेसहारा पशु, नील गाय, वन सुअर किसानों के परेशानी का सबब बन गए हैं। झुंड के रूप में विचरण करने वाले यह पशु लहलहाती आलू, सरसों आदि फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। जिसके चलते खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। इससे वह मुंह मोड़ रहे हैं। त्राहि-त्राहि कर रहे किसानों की समस्या की ओर जनप्रतिनिधि व अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में फसलों की सुरक्षा के लिए कृषि विभाग की तरफ से गाइड लाइन जारी की गई है कि जहां पर नील गायों का ज्यादा आतंक हो ऐसे स्थानों पर तुलसी, मेंथा, पिपरेटा, जिरेनियम, खस, लेमनग्रास, पामारोजा, सिट्रोनिला आदि पौधों को लगाएं।

वन विभाग, जिला प्रशासन व अन्य संस्थानों के सहयोग से फसल उत्पादन वाले स्थानों से पकड़कर संरक्षित जंगलों में छोड़ने से भी इनके आतंक से फसलों को बचाया जा सकता है। इसके साथ ही नर नीलगायों को बंध्याकरण कर इनकी जनसंख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है। फिनायल के घोल के छिड़काव से फसलों को बचाया जा सकता है। इसके साथ ही गधे की लीद, गौमूत्र, सड़ी सब्जियों की पत्ती को घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करने से नीलगाय से फसल की सुरक्षा होती है।

रबी के फसलों में शुमार सब्जियों का राजा आलू की बोआई का कार्य किसान शुरू कर दिए हैं। अब छुट्टा पशु, नीलगाय, जंगली सुअर के कारण बड़े पैमाने की जगह कम बोआई करने का मन बना लिए है। अच्छी आय के लिए किसान आलू की अगेती खेती करते रहे हैं। उसके बाद उसको तैयार करके मंडी में पहुंचाते हैं। इससे उनकी आय अच्छी हो जाती है। सिकरारा क्षेत्र के किसान रामचंद्र ने बताया कि बेसहारा पशुओं के लिए अब अधिकांश किसान पौधारोपण करना अधिक फायदेमंद समझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगली व बेसहारा पशुओं से फसल और पौधों को बचाने के लिए दो एकड़ से अधिक लंबाई में खंभा गाड़कर बाढ़ बना दिए है, जिससे फसलों की सुरक्षा होती रही। आलम यह कि छुट्टा पशुओं से परेशान होकर लोग खेतों को परती छोड़ दे रहे हैं। यही स्थिति सुजानगंज के क्षेत्रों में बनी हुई है। यहां पर नदी किनारे के रसिकापुर, नेवादा, रामनगर, हिम्मत नगर, नारीपुर, सबेली, तिलहरा, बखोपुर, अलैया, पतहना, हिसामुद्दीनपुर, चांदपुर, पियारेपुर, विकैपुर आदि ऐसे गांव है जहां किसान बुरी तरह प्रभावित है। बदलापुर के कृष्णापुर, कम्मरपुर, जगजीवनपट्टी, बेसहूपुर, मदापुर, दुगौली खुर्द, शाहपुर, ऊदपुर गेल्हवा, रूपचंद्रपुर आदि गांवों में तैयार खड़ी फसल को जहां रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। किसान राजेंद्र तिवारी, शिव पूजन सिंह, लाल साहब यादव ने बताया कि यही स्थिति रही तो अगले वर्ष में हम सभी खेतों की बोआई बंद कर देंगे।

Edited By Jagran

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