जिदगी की टूटती डोर को दे रहीं सांसें

आज भी दूरदराज व ग्रामीण अंचल में रहने वाले गंभीर मरीजों के सामने एक बड़ी समस्या आ जाती है।

JagranPublish: Sun, 02 Jan 2022 12:10 AM (IST)Updated: Sun, 02 Jan 2022 12:10 AM (IST)
जिदगी की टूटती डोर को दे रहीं सांसें

जासं, हाथरस : आज भी दूरदराज व ग्रामीण अंचल में रहने वाले गंभीर मरीजों के सामने एक बड़ी समस्या यह रहती है कि साधन के अभाव में उन्हें इलाज नहीं मिल पाता है और जिंदगी की जंग हार जाते हैं। ऐसे ही गरीब लोगों की संवेदनाएं दिल को झकझोर देती हैं। समाज में ऐसे लोग हैं जो कि डाक्टरी पेशे से जुड़े होने के बावजूद ऐसे मरीजों की मदद के लिए आगे आए हैं। ऐसा ही नेक काम शहर की डा. माधवी शर्मा कर रही हैं। वे कम खर्च पर एंबुलेंस की सेवा दे रही हैं। वे इस पेशे से जुड़े अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी हुई हैं।

ढाई महीने पहले शुरू की थी सेवा

समाज में ऐसे भी लोग हैं जो कि इलाज कराने के लिए अपने जिला मुख्यालय या फिर आसपास के जिलों में नहीं जा पाते हैं। इसकी एक वजह यह है कि सरकारी एंबुलेंस हर समय उपलब्ध नहीं हो पाती हैं और निजी एंबुलेंस महंगी पड़ती हैं। इन हालातों को देखते हुए ढाई महीने पहले एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। इस सेवा के लिए समाजसेवियों की भी मदद ली गई।

तेल के खर्च पर ही एंबुलेंस

गांव से शहर लाने में एंबुलेंस के लिए तेल का खर्चा ही लिया जाता है। आसपास के जिले अलीगढ़, आगरा व अन्य स्थानों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाती है। फोन आने पर एंबुलेंस मरीज के घर भेज देते हैं।

तेल न मिलने पर भी भेज देते हैं एंबुलेंस

जब कोई ऐसा मरीज होता है जो कि एंबुलेंस में तेल भी नहीं डलवा सकता है तो ऐसे मरीजों की एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजकर मरीजों की मदद की जाती है। इस एंबुलेंस में आक्सीजन की सुविधा भी रहती हैं।

व्यस्त जिदगी में कुशल प्रबंधन

डा. माधवी शर्मा अपनी क्लीनिक का संचालन पहले से ही कर रही हैं। इसी व्यस्त जिदगी में उन्होंने समाजसेवा करने की ठानी है। 24 घंटे एंबुलेंस सेवा देने के कार्य का संचालन उनके ही नेतृत्व में किया गया है।

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept