जहां जाएंगे कामगार उसका होगा बेड़ा पार

संजीव वर्मा पिलखुवा उत्तर प्रदेश के महापर्व में हिस्सा लेने के लिए हर किसी में उत्साह है। ब

JagranPublish: Thu, 27 Jan 2022 06:16 PM (IST)Updated: Thu, 27 Jan 2022 06:16 PM (IST)
जहां जाएंगे कामगार उसका होगा बेड़ा पार

संजीव वर्मा, पिलखुवा:

उत्तर प्रदेश के महापर्व में हिस्सा लेने के लिए हर किसी में उत्साह है। बेसब्री से 10 फरवरी का इंतजार है। इस दिन प्रदेश के सिंहासन के लिए वोटरों के रूप में पहली किश्त इवीएम में कैद हो जाएगी। किसके सिर सेहरा बंधेगा और किसे शिकस्त मिलेगी यह 10 मार्च को पता चलेगा। मगर, चुनावी हलचल वर्तमान में जोरों पर है। वोट का प्रयोग तो वैसे सभी वर्ग करते थे लेकिन, जिस वोट बैंक को धड़ा कहा जाता है। इस बार उनके मूड बदले हुए हैं। चुनावी युद्ध में राजा से लेकर उसकी सेना तक पर उनकी निगाह है। अपने हितों के साथ राष्ट्र निर्माण, प्रदेश की तरक्की और क्षेत्र के विकास के लिए वोट करने के पक्ष में है। पेश है हमारे संवाददाता संजीव वर्मा की रिपोर्ट..

---------- सुबह के आठ बजे थे। सूर्यदेव आज भी नदारद थे। शहर के प्रमुख बाजार गांधी रोड स्थित अधौड़ी वालों की धर्मशाला के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। ये उन लोगों की भीड़ थी जो दिहाड़ी पर काम करते हैं। राज मिस्त्री, मजदूर आदि काम मिलने का इंतजार कर रहे थे। इस इंतजार के बीच ही कामगारों के बीच चुनावी चर्चा शुरू हुई। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के साथ मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा हो रही थी। सद्दीकपुरा कालोनी निवासी निजाम ने गांधी रोड की सड़क से चुनावी चर्चा को शुरू किया। कहा, इस सड़क का बनना और ना बनना बराबर रहा है। तभी इकराम ने कहा कि कमीशन का जमाना है, तभी आर्यनगर निवासी ललित ने उसे रोका और बोला तभी तो कह रहे हैं कि भाई इस चुनाव में तो जात-धर्म से उठकर मतदान करो। जिससे यह भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी समाप्त हो जाए। उसकी बात को सुनकर हंसते हुए अलाउद्दीन ने कहा कि यार, कभी तो बिना राजनीति के बात कर लिया करो। बेशक भाजपा सरकार में बहुत कुछ बदला गया है, लेकिन अखिलेश और मायावती के राज में भी भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। बस फिर क्या था चुनावी बातचीत बहस में बदल गई। श्रमकार्ड, कोरोना संकट काल में निश्शुल्क राशन, महिला सुरक्षा, पेंशन आदि बहस के मुद्दे बन गए और देखते-देखते कंपकंपाती ठंड में माहौल गरमा गया। तभी एक व्यक्ति पहुंचा और उसने मकान बनवाने के लिए राजमिस्त्री से बात की। हालांकि इस दौरान भी चुनावी चर्चा जारी थी। जिस पर उस व्यक्ति ने चर्चा कर रहे लोगों को शांत कराते हुए कहा कि भाई सरकार किसी की भी आए, हमें तो केवल कामकाज से मतलब है। जिस पर चर्चा में शामिल ललित ने व्यक्ति को रोका, सेठजी ऐसा नहीं है। सरकार हमारी वोट के आधार पर ही बनती है। अच्छी और टिकाऊ सरकार होगी तो हर तबके का सम्मान होगा। हर व्यक्ति को काम मिलेगा। अब देख लो, पिछले आधे घंटे से इस सर्दी में काम का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, किसी ने आकर नहीं पूछा है। पिछले तीन दिन से यही हालात है रोज आते हैं और खाली हाथ घर चले जाते हैं। इसके बाद सेठजी एक राजमिस्त्री और दो मजदूरों को लेकर चले गए। बाकी लोग काम नहीं मिलने पर मुरझाए चेहरों के साथ घर लौट गए।

Edited By Jagran

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