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गोरखपुर में दिनदहाड़े लूट : मैनेजर व कर्मचारियों ने ही रची थी लूट की साजिश

गोरखपुर मे वोडाफोन के स्‍टोर में लूट की साजिश स्‍टोर के मैनेजर और कर्मचारियों ने ही रची थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

Pradeep SrivastavaSun, 23 Sep 2018 02:12 PM (IST)
गोरखपुर में दिनदहाड़े लूट : मैनेजर व कर्मचारियों ने ही रची थी लूट की साजिश

गोरखपुर, (जेएनएन)। कोतवाली क्षेत्र में अग्रसेन तिराहे के पास वोडाफोन स्टोर में लूट नहीं, बल्कि लूट की नौटंकी की गई थी, जिसका पुलिय ने पर्दाफाश कर दिया। गबन की गई रकम का हिसाब-किताब दुरुस्त करने के लिए मैनेजर और दोनों कर्मचारियों ने एक ट्रक चालक को भाड़े पर लेकर लूट का नाटक किया था। नाटक के किरदार स्टोर मैनेजर, दो कर्मचारी और ट्रक चालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन और सिमकार्ड के अलावा ट्रक चालक को दी गई रकम में से दस हजार रुपयों के साथ ही स्टोर मैनेजर के चेंबर में लाकर से 57830 रुपये बरामद किए गए हैं।

इनकी हुई है गिरफ्तार

- दिलेजाकपुर, कोतवाली निवासी कर्मचारी शशांक गुप्त

- खोखर टोला, राजघाट निवासी ट्रक चालक अफजल खां

- मिर्जापुर, राजघाट में रहने वाले दोहरीघाट, मऊ निवासी अभिषेक त्रिपाठी

- जमशेदपुर, झारखंड के हरहरपुर, गुट्टू कालोनी निवासी स्टोर मैनेजर मयूरी शर्मा

पुलिस को सुनाई थी लूट की यह कहानी

एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि वोडाफोन स्टोर में 19 सितंबर को दिन दहाड़े लूट होने की पुलिस को सूचना दी गई थी। तब कर्मचारियों ने बताया था कि दिन में 12.30 बजे के आसपास मुंह बांधे एक युवक ने मैनेजर मयूरी शर्मा के चैंबर में घुसकर 7.50 लाख रुपये की लूट की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो स्टोर मैनेजर और कर्मचारियों द्वारा बताए गए घटनाक्रम में कई विरोधाभाष नजर आने लगा। गहराई से छानबीन करने पर पता चला कि रुपयों की लूट तो हुई ही नहीं थी, बल्कि स्टोर मैनेजर और दो कर्मचारियों ने ट्रक चालक के साथ मिलकर लूट की कहानी तैयार कर नाटक किया था।

नहीं मिल रहा था 7.50 लाख रुपये का हिसाब

स्टोर और आसपास दुकानों के बाहर लगे सीसी टीवी कैमरों की फुटेज चेक करने और स्टोर के एक-एक कर्मचारी से अलग-अलग और कड़ाई से पूछताछ करने पर सच सामने आ गया। पता चला कि कर्मचारी शशांक गुप्त स्टोर में रुपये ट्रांसफर करने का काम करता था और इसका हिसाब-किताब भी वही रखता था। कंप्यूटर आपरेट करने की ठीक से जानकारी न होने की वजह से 7.50 लाख रुपये का उसका हिसाब गड़बड़ हो गया। सिस्टम में यह रकम जमा तो दिख रही थी लेकिन कहां गई इसका पता नहीं चल रहा था। इससे परेशान शशांक ने अपनी परेशानी स्टोर में ही काम करने वाले करीबी दोस्त अभिषेक त्रिपाठी को बताई। अभिषेक के जरिए इस बारे में स्टोर मैनेजर मयूरी शर्मा को पता चला तो वह भी सकते में आ गई। रुपये के हेरफेर की वजह से उन्हें अपनी नौकरी खतरे में पड़ती दिखाई देने लगी।

बदमाश बनकर स्टोर में आया था परिचित ट्रक चालक

गायब रुपयों का हिसाब-किताब दुरुस्त करने के लिए उन्होंने लूट की कहानी तैयार की। इसके बाद शशांक ने अपने परिचित ट्रक चालक अफजल खां से संपर्क किया। काफी समझाने और 20 हजार रुपये देने का लालच देने पर अफजल ने लूट के नाटक में शामिल होने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद योजना के तहत 19 सितंबर को वह स्टोर में गया। इससे एक दिन पहले भी ट्रक चालक स्ओर पर गया लेकिन हिम्मत नहीं जुटा सका।

सीसी टीवी फुटेज देखकर पुलिस को हुआ था संदेह

स्टोर मैनेजर के चैंबर में किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। कमरे की सीसीटीवी फुटेज चेक करते ही पुलिस घटना को संदिग्ध मानने लगी थी। फुटेज में ट्रक चालक रुमाल से मुंह बांधकर आराम से स्टोर मैनेजर के पास पहुंचता है और उनके पीछे से घूमकर बाईं तरफ जाने के बाद हाथ पकड़कर उठने का इशारा करता है। बिना किसी प्रतिरोध के वह उठ भी जाती हैं और उसके साथ आराम से बाथरूम की तरफ चल पड़ती हैं। रास्ते में वह मुस्करा देती है। ट्रक चालक खाली हाथ ही अंदर जाते और बाहर आते दिखता है।

कर्मचारियों ने की थी दूसरी मंजिल पर पहुंचने में मदद

मुंह बांधकर स्टोर में घुसते समय ट्रक चालक को गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया था लेकिन खुद को एसी मरम्मत करने वाला बताकर वह अंदर आ गया। इसके बाद सीढिय़ों की तरफ जाने लगा तो स्टोर में काम करने वाले सुशांत ने उसे टोका। इस पर अभिषेक और शशांक एक साथ बोल पड़े। सुशांत को उन्होंने उसे पानी वाला बताकर ऊपर जाने देने के लिए कहा। दोनों के कहने पर सुशांत अपने काम में व्यस्त हो गए और ट्रक चालक ऊपर पहुंच गया।

स्टोर मैनेजर ने दो कर्मचारियों पर जताया था संदेह

स्टोर मैनेजर मयूरी शर्मा की तहरीर पर इस मामले मे मुकदमा दर्ज हुआ था। तहरीर में उन्होंने स्टोर में ही काम करने वाले सुशांत और असलम पर घटना में शामिल होने का संदेह जताया था। इस आधार पर पुलिस ने दोनों से पूछताछ भी की लेकिन उन पर संदेह करने का कोई आधार नहीं मिला।

पुलिस टीम को मिलेगा पुरस्कार

एसएसपी शलभ माथुर ने घटना का पर्दाफाश करने वाली टीम को नकद इनाम देने की घोषणा की है। टीम में कोतवाली थानेदार गिरिजेश त्रिपाठी, क्राइम ब्रांच के उप निरीक्षक धीरेंद्र राय, राजेंद्र कुमार सिंह और सिपाही विपेंद्र मल्ल, राजमंगल सिंह, कामेश्वर दुबे, शिशकांत राय, राशिद अख्तर खां, सनातन सिंह, मनोज चौरसिया, मोहसिन खां, शिवानंद उपाध्याय, कुतुबुद्दीन, राकेश यादव, विजय प्रकाश द्विवेदी, अरुण कुमार यादव, शशिशंकर राय, शशिकांत जायसवाल और महिला सिपाही अनिषा चौहान शामिल हैं।

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