नेपाल से भटककर महराजगंज के सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में पहुंचा गैंडा

आशंका जताई जा रही है कि भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से भटककर यह गैंडा पहले सोहगीबरवा के जंगल में पहुंचा और फिर जंगल से बाहर निकलकर ग्रामीण इलाके में आ गया । कुछ ग्रामीण छोटी गंडक नदी के किनारे खेत में काम करने गए थे।

Navneet Prakash TripathiPublish: Tue, 25 Jan 2022 03:53 PM (IST)Updated: Thu, 27 Jan 2022 09:08 AM (IST)
नेपाल से भटककर महराजगंज के सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में पहुंचा गैंडा

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल रेंज के जंगल से निकलकर एक गैंडा 24 जनवरी को घुघली थाना क्षेत्र के ग्रामीण इलाके में पहुंच गया। पौहारी गांव से सटे खेत में गैंडे को देख ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। लोगों के शोर मचाने पर गैंडा पुन: खेत की तरफ निकल गया। ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है। मौके पर पहुंचे वनकर्मी गैंडा की गतिविधियों को जानने में जुट गए हैं। वन विभाग उसे रेस्क्यू करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाया है।

छोटी गंडक नदी के किनारे दिखा गैंडा

आशंका जताई जा रही है कि भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से भटककर यह गैंडा पहले सोहगीबरवा के जंगल में पहुंचा और फिर जंगल से बाहर निकलकर ग्रामीण इलाके में आ गया । सोमवार की सुबह पौहारी गांव के कुछ ग्रामीण छोटी गंडक नदी के किनारे खेत में काम करने गए थे। इसी बीच नदी के उस पार गैंडे को देख सहम गए । देखते ही देखते गैंडा नदी में प्रवेश कर दूसरी तरफ पहुंच गया और खेत के रास्ते इधर- उधर भागने लगा । डीएफओ पुष्प कुमार के. ने बताया कि सूचना के आधार पर वनकर्मियों को भेजा गया है। खेत में उसके पदचिन्ह मिले हैं।

पहले भी चितवन से आ चुके हैं गैंडे

महराजगंज के सोहगीबरवा जंगल में गैंडे का देखा जाना कोई संयोग नहीं है। पहले भी यहां पर गैंडे आते रहे हैं। अगस्त 2017 की बाढ़ में पहली बार नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से 16 गैंडे एक साथ सोहगीबरवा जंगल में आ गए थे। एक की मौत उसी समय कुशीनगर सीमा में हो गई थी। बाकी 15 गैंडे भारतीय क्षेत्र के जंगल में रह रहे थे। जिनमें से मई 2018 तक 12 को व 2019 में अन्य तीन गैंडों को नेपाल के वनकर्मी बिना भारत की अनुमति के ही उठा ले गए। इसको लेकर दोनों देशों के वन कर्मियों के बीच तकरार भी हुई थी।

Edited By Navneet Prakash Tripathi

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