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डाक्टर और मरीज दोनों को राहत देगा यह टोकन, जानें- कैसे.. Gorakhpur News

गोरखपुर जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग दो हजार की ओपीडी (वाह्य रोगी विभाग) होती है। मरीजों को लाइन लगानी पड़ती है। अब इन मरीजों को टोकन सिस्‍टम से देखा जाएगा।

Pradeep SrivastavaThu, 12 Mar 2020 06:09 PM (IST)
डाक्टर और मरीज दोनों को राहत देगा यह टोकन, जानें- कैसे.. Gorakhpur News

गोरखपुर, जेएनएन। जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग दो हजार की ओपीडी (वाह्य रोगी विभाग) होती है। मरीजों को लाइन लगानी पड़ती है। कतार तोड़कर पहले दिखाने की कोशिश में विवाद भी हो जाता है। इससे निजात के लिए अस्पताल प्रशासन टोकन की व्यवस्था करने जा रहा है। ओपीडी के सामने एंबुलेंस खड़ा करने वाली जगह पर मरीजों के बैठने के लिए शेड बनवाया जाएगा। पर्चा जमा कर टोकन दे दिया जाएगा। नंबर आने पर माइक से बुलाया जाएगा।

ऐसे लागू होगी यह व्‍यवस्‍था

इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ओपीडी के सामने से स्टैंड हटा दिया गया है। पार्क खोल दिया गया है। कर्मचारियों की कॉलोनी में खाली कराई गई भूमि पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां एंबुलेंस खड़ी होगी। ओपीडी गेट पर एक व्यक्ति की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो नंबर आने पर मरीजों को माइक से बुलाएगा। इससे मरीजों की भीड़ नहीं होगी और न ही उन्हें कोई शिकायत होगी कि बाद में आए लोग पहले डॉक्टर को दिखा रहे हैं।

 इस माह के अंत तक टोकन व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। इससे मरीजों के साथ ही डॉक्टरों को भी राहत मिलेगी। ओपीडी में भीड़ कम हो जाएगी। मरीज आराम से डॉक्टर को दिखा सकेंगे। - डॉ. एके सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल

सुधर रही 19 स्वास्थ्य केंद्रों की सेहत

गोरखपुर में धीरे-धीरे स्वास्थ्य केंद्रों की सेहत सुधर रही है। अभी तक 12 स्वास्थ्य केंद्र मानक के अनुरूप हुए तो उन्हें कायाकल्प एवार्ड हासिल हुआ। पुन: 19 स्वास्थ्य केंद्रों को इसके लिए तैयार किया जा रहा है। ये सभी केंद्र मंडल स्तर से पास हो चुके हैं। इनकी असली परीक्षा राज्य स्तरीय टीम के सामने होगी। मूल्यांकन के लिए टीम आने वाली है। पूरा स्वास्थ्य विभाग इन स्वास्थ्य केंद्रों को उत्तीर्ण कराने में जुटा हुआ है। जिन स्वास्थ्य केंद्रों को कायाकल्प मिल चुका है। उनका हर साल मूल्यांकन होता है, ताकि वे मानक से नीचे न उतरें। इस बार जिन स्वास्थ्य केंद्रों का मूल्यांकन होना है, उनमें वे भी केंद्र शामिल हैं, जिन्हें पूर्व में कायाकल्प एवार्ड मिल चुका है।

इन केंद्रों को पास कराने की चल रही तैयारी

पिपराइच, कैंपियरगंज, सरदारनगर, जंगल कौडिय़ा, कौड़ीराम, ब्रह्मपुर, खोराबार, भटहट, मछलीगांव, बसंतपुर, दीवान बाजार, गोरखनाथ, जिला महिला अस्पताल, पिपरौली, डेरवा, जाफरा बाजार, बिछिया, तारामंडल व शिवपुर सहबाजगंज।

हमारी पूरी कोशिश है कि जिन्हें कायाकल्प एवार्ड मिल चुका है, वे अपने स्थान पर बने रहें और नए स्वास्थ्य केंद्रों को भी यह एवार्ड मिल सके। एवार्ड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 85 हजार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एक लाख व जिला स्तरीय अस्पतालों को तीन लाख रुपये विकास के लिए मिलते हैं। - डॉ. मुस्तफा, जनपदीय परामर्शदाता

Edited By: Pradeep Srivastava

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