जागरूकता का सबक दे रहे दीपावली में प्रदूषण के आंकड़े, बीते वर्ष की तुलना में इस बार अध‍िक हुआ प्रदूषण

Pollution Situation in Gorakhpur बीते तीन वर्षों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि दीपावली पर आतिशबाजी को लेकर बढ़े थोड़े से उत्साह ने बीते वर्ष के मुकाबले प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया।

Pradeep SrivastavaPublish: Sun, 07 Nov 2021 10:00 AM (IST)Updated: Sun, 07 Nov 2021 10:00 AM (IST)
जागरूकता का सबक दे रहे दीपावली में प्रदूषण के आंकड़े, बीते वर्ष की तुलना में इस बार अध‍िक हुआ प्रदूषण

गोरखपुर, डा. राकेश राय। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। यह कहावत इस बार दीपावली के बाद जारी पर्यावरण प्रदूषण के आंकड़ों से साबित होती नजर आ रही है। बीते तीन वर्षों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि दीपावली पर आतिशबाजी को लेकर बढ़े थोड़े से उत्साह ने बीते वर्ष के मुकाबले प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया। हालांकि 2019 के आंकड़ों के मुकाबले इस वर्ष के दीपावली के आंकड़े सुकून देने वाले हैं लेकिन अगर बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष के आंकड़ों की बात करें तो सतर्कता को लेकर हल्की लापरवाही सामने आई है। यह आंकड़े लापरवाही के प्रति सतर्क करने के साथ-साथ जागरूकता का सबक भी दे रहे।

2019 के मुकाबले बीते वर्ष के आंकड़ों में दिखी थी प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर सतर्कता

कोरोना संक्रमण की वजह से प्रदूषण को लेकर बढ़ी सतर्कता ने बीते वर्ष दीपावली के बाद आंकड़ों ने सुकून का अहसास कराया था। 2019 के मुकाबले 2020 में प्रदूषण के स्तर में काफी कमी दर्ज की गई थी। यह कमी रिहायशी इलाकों से लेकर व्यावसायिक इलाकों तक रिकार्ड की गई थी। लेकिन यह सुखद एहसास महज एक वर्ष ही रह सका। इस वर्ष दीपावली के बाद आंकड़े बीते वर्ष के मुकाबले थोड़ा ही सही मगर बढ़े हुए मिले हैं। इससे यह साफ संदेश मिलता है कि लापरवाही बढ़ते ही पर्यावरण में प्रदूषण का संतुलन बिगड़ने लगा है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के आचार्य और पर्यावरणविद् प्रो. गोविंद पांडेय के निर्देशन में विश्वविद्यालय के शोधार्थी सत्येंद्र कुमार ने दीपावाली के बाद बढ़े प्रदूषण के जो आंकड़े जुटाए, वह उत्साह पर नियंत्रण को लेकर सतर्क करने वाले हैं।

चिंता का विषय है दीपावली के चलते प्रदूषण का बढ़ना

प्रो. गोविंद पांडेय ने बताया कि गोरखपुर में पीएम-10, एसओ2 और एनओ2 का स्तर रिहायशी और व्यवसायिक इलाकों में पहले से मानक से अधिक रहता है। ऐसे में दीपावली में इसका और बढ़ जाना खतरे का संकेत है। बीते वर्ष के दीपावली के आंकड़े प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर उत्साहित करने वाले थे लेकिन इस वर्ष फिर उनका बढ़ना चिंता का विषय है। निश्चित रूप से इस उत्साह पर काबू पाना होगा। आतिशबाजी के दौरान पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैसें वायुमंडल की गैसों का संतुलन बिगाड़ देती हैं। इससे आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इसका हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

पीएम-10 का बीते तीन वर्षों का तुलनात्मक (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)

रिहायशी इलाका व्यावसायिक इलाका

2019 : 202.18 326.92

2020 : 134.23 248.37

2021 : 123.36 286.37

एसओ2 का बीते तीन वर्षों का तुलनात्मक

रिहायशी इलाका व्यावसायिक इलाका

2019 : 5.09 15.67

2020 : 2.09 7.01

2021 : 2.19 9.13

एनओ2 का बीते तीन वर्षों का तुलनात्मक

रिहायशी इलाका व्यावसायिक इलाका

2019 : 14.18 29.45

2020 : 5.81 19.27

2021 : 6.73 23.78।

Edited By Pradeep Srivastava

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