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हरी सब्जियां के बाद फल हुए सस्‍ते, 25 रुपये किलो बिक रहा किनू और पपीता- यह है कारण

गोरखपुर में फलों की कीमत में भारी गिरावट आई है। यहां फुटकर में संतरा जैसा दिखने वाला किनू और पपीता 25 रुपये किलो भी नहीं बिक पा रहा है। मौसम को देखते हुए कई फुटकर फल विक्रेताओं ने सब्जी बेचनी शुरू कर दी है।

Pradeep SrivastavaTue, 19 Jan 2021 05:29 PM (IST)
हरी सब्जियां के बाद फल हुए सस्‍ते, 25 रुपये किलो बिक रहा किनू और पपीता- यह है कारण

गोरखपुर, जेएनएन। महेवा मंडी में सब्जियों की तरह फलों की आवक भी भरपूर हो रही है, लेकिन खरीदार न होने के कारण थोक व फुटकर विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिक्री न होने की सबसे बड़ी वजह ठंड है। फल की तासीर ठंडी मानी जाती है इसलिए ज्यादा ठंड पडऩे से लोग फल खाने से कतराते हैं। आलम यह है कि फुटकर में संतरा जैसा दिखने वाला किनू और पपीता 25 रुपये किलो भी नहीं बिक पा रहा है। मौसम को देखते हुए कई फुटकर फल विक्रेताओं ने सब्जी बेचनी शुरू कर दी है।

पचास फीसद कम हुई फलों की बिक्री

महेवा मंडी से ही आसपास के जिलों में फलों की आपूर्ति होती है। मंडी में प्रतिदिन सेब, संतरा, पपीता, मौसमी, अनार, किनू, अंगूर और केला की 15 से ज्यादा गाडिय़ां देशभर के विभिन्न हिस्सों से आ रही है। इसके बावजूद फलों की बिक्री आम दिनों के मुकाबले पचास फीसद तक कम हो गई है। कश्मीरी सेब, अंगूर एवं अमरूद को छोड़ दिया जाए तो फुटकर बाजार में कोई भी फल 50 रुपये किलो से ज्यादा नहीं है। यह अलग बात है कि कुछ विक्रेता ग्राहकों से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। सबसे सस्ता किनू है जो 20 से 30 रुपये किलो के बीच बिक रहा है। आंबेडकर चौराहा से लेकर शास्त्री चौक के बीच सिर्फ किनू के 20 से ज्यादा ठेले नजर आते हैं। कुछ ऐसा ही संतरे के साथ है। संतरा 35 से 40 रुपये किलो के बीच बिक रहा है।

सेब, पपीता, अंगूर भी सस्‍ता

फुटकर बाजार में सेब 100 से 140, अनार 40 से 60, अंगूर 80 से 100, पपीता 25 से 30 रुपये किलो तक बिक रहा है, जबकि मंगलवार को केला 25 से लेकर 40 रुपये दर्जन तक बिका। सूरजकुंड में फल बेचने वाले रंजीत कुमार ने बताया ग्राहक न होने के कारण मंडी से बहुत कम माल उठाया जा रहा है। ठंडी की वजह से नियमित ग्राहक भी दूरी बना ली है। कुछ ही लोग हैं जो सेब खरीद रहे हैं। 15 फरवरी के बाद ही स्थिति सामान्य होगी। थोक विक्रेता राजेंद्र कुमार के मुताबिक बिक्री न होने से फुटकर माल उठाने से कतरा रहे हैं। माल न बिकने से कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Edited By: Pradeep Srivastava

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