कायाकल्प में करोड़ों बर्बाद, फिर भी टूटे हैं खिड़की व दरवाजे

जिले में कुल 1695 परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत 19 पैरामीटर पर कार्य कराए जाने हैं। इसमें पेयजल शौचालय से लेकर बाउंड्रीवाल सहित फर्नीचर और रंग रोदन का कार्य भी समाहित है। कायाकल्प योजना के कार्य कराए जाने के लिए शासन ने पंचायती राज विभाग को नोडल बनाया।

JagranPublish: Wed, 01 Dec 2021 09:47 PM (IST)Updated: Wed, 01 Dec 2021 09:47 PM (IST)
कायाकल्प में करोड़ों बर्बाद, फिर भी टूटे हैं खिड़की व दरवाजे

महराजगंज : कायाकल्प के तहत जिले में करोड़ों रुपये का वारा न्यारा होने के बावजूद जिले के परिषदीय विद्यालयों का हाल बेहाल है। टूटी खिड़की व दरवाजों से विद्यालयों में घुस रही सर्द हवाएं जहां बच्चों के स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव डाल रहीं हैं, वहीं योजना कायाकल्प योजना के दावों की पोल भी खुल रही है। हालांकि प्रशासनिक आंकड़ों में जिले के 90 फीसद से अधिक विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य हो चुका है, लेकिन धरातल की कहानी कुछ और ही है।

जिले में कुल 1695 परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत 19 पैरामीटर पर कार्य कराए जाने हैं। इसमें पेयजल, शौचालय से लेकर बाउंड्रीवाल सहित फर्नीचर और रंग रोदन का कार्य भी समाहित है। कायाकल्प योजना के कार्य कराए जाने के लिए शासन ने पंचायती राज विभाग को नोडल बनाया। इसके लिए रुपये भी पंचायतों के ही खातों में जाते हैं, जिसके बाद विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष अर्थात प्रधान की देखरेख में कार्य का संपादन होता है। इन कार्यों सहित ग्राम पंचायतों के लिए इस बार शासन से केंद्र व वित्त राज्य आयोग से कुल 79.72 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। इसमें से ग्राम पंचायतों ने कुल 72.36 करोड़ रुपये मतलब 90.76 फीसद की धनराशि का उपभोग भी कर लिया है। लेकिन ग्राम सभाओं की लापरवाही के चलते अभी भी सैकड़ों विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य अधूरा है। विद्यालयों में शिक्षक तो अपने आफिस में हीटर आदि जलाकर ठंड से बचने का प्रबंध कर लेते हैं, लेकिन टूटी खिड़कियों से घुस रही सर्द हवाओं से बच्चों को ठंड से जूझना पड़ता है। बुधवार को जागरण की पड़ताल में निचलौल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मोजरी में विद्यालय की खिड़कियां टूटी मिली। यही हाल कुछ प्राथमिक विद्यालय वसुली फार्म का भी है। दरवाजों के लिए तरस रहे कई अतिरिक्त कक्षा-कक्ष

कई प्राथमिक विद्यालयों में बने अतिरिक्त कक्षा-कक्ष में खिड़कियां तो दूर की बात हैं। वे दरवाजों के लिए तरस रहे हैं। विद्यालयों के शिक्षकों के अनुसार देखरेख की समुचित व्यवस्था न होने की वजह से यह हाल है।

जिन विद्यालयों में खिड़किया और दरवाजे नहीं हैं। उनकी सूची खंड शिक्षा अधिकारियों से प्राप्त कर वहां बेहतर व्यवस्था कराने के लिए पंचायती राज विभाग को पत्र लिखा जाएगा।

ओपी यादव, बीएसए महराजगंज कायाकल्प के लिए चयनित विद्यालयों में कार्य कराए जा रहे हैं। अगर योजना में ग्राम पंचायतों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। तो मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

केबी वर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी

Edited By Jagran

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