बोर्ड लगाने तक सिमटा बस्ती में साइबर थाने का निर्माण

उच्च तकनीक की मदद से सूचना प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं को रोकने साइबर अपराध के मामलों में संदिग्धों को पकड़ने व डिजिटल साक्ष्य जुटाने मामले में त्वरित कार्रवाई करने आदि के मकसद से जिले में साइबर थाने का निर्माण कराया जाना था।

Navneet Prakash TripathiPublish: Mon, 24 Jan 2022 06:00 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 06:00 PM (IST)
बोर्ड लगाने तक सिमटा बस्ती में साइबर थाने का निर्माण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। वर्ष 2019-20 में प्रदेश सरकार ने 18 जिलों में साइबर थाने के निर्माण को मंजूरी दी थी। इनमें बस्ती भी शामिल था। जिले में साइबर थाना बनाने की कार्यवाही महज चिन्हित जमीन पर बोर्ड लगाने तक ही सिमटी है। स्‍थापना के बाद से ही अभी तक साइबर थाना कोई काम करता नजर नहीं आया और न ही कोई उल्‍लेखनीय उपलब्धि इसके खाते में है।

साइबर अपराध रोकने के उद्देश्‍य से स्‍थापित है साइबर थाना

उच्च तकनीक की मदद से सूचना प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं को रोकने, साइबर अपराध के मामलों में संदिग्धों को पकड़ने व डिजिटल साक्ष्य जुटाने, मामले में त्वरित कार्रवाई करने आदि के मकसद से जिले में साइबर थाने का निर्माण कराया जाना था। साइबर थाना खुलने से सरकारी वेबसाइटों व इसके डाटा की हैकिंग, साइबर से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों का पता लगाने में काफी मदद मिलती।

भूमि आवंटित होने के बाद भी नहीं हुआ साइबर थाना भवन का निर्माण

बस्ती में साइबर थाने के लिए हाईवे के किनारे गोटवा कस्बे से थोड़ा पहले 0.168 हेक्टेयर जमीन मिल गई। इस जमीन की दो बार राजस्व कर्मियों द्वारा पैमाइश भी की गई, चिन्हित जमीन पर प्रस्तावित साइबर थाने का बोर्ड भी लगा दिया गया, मगर अब तक साइबर थाने के भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका। परिक्षेत्र स्तर पर बस्ती में साइबर थाना पुलिस महानिरीक्षक आवास से सटे भवन में संचालित किया जा रहा है। इसमें न तो पर्याप्त स्टाफ हैं और न ही समुचित संसाधन। बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के साइबर अपराध से जुड़े बड़े मामले ही इस थाने तक पहुंचते हैं।

भवन के निर्माण को लेकर शासन से नहीं मिला दिशा-निर्देश

पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्‍तव ने बताया कि बस्ती में साइबर थाना भवन का निर्माण तो नहीं हुआ है, मगर परिक्षेत्रीय साइबर थाना संचालित किया जा रहा है। साइबर थाने के भवन निर्माण को लेकर अभी शासन से कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है।

Edited By Navneet Prakash Tripathi

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