बाउंड्री पिलर फिक्सिग में 90 लाख का घपला

अयोध्या-गोरखपुर खंड के 116 किमी फोरलेन पर होना था पिलर फिक्सिग का कार्य

JagranPublish: Mon, 29 Nov 2021 10:49 PM (IST)Updated: Mon, 29 Nov 2021 10:49 PM (IST)
बाउंड्री पिलर फिक्सिग में 90 लाख का घपला

जागरण संवाददाता,बस्ती : फोरलेन पर सीमांकन के लिए बाउंड्रीवाल पिलर फिक्सिग के 93.45 लाख के कार्य में भी खेल हो गया। 50 मीटर पर एक पिलर लगने थे लेकिन सौ से दो सौ मीटर की दूरी पर कहीं-कहीं यह पिलर लगाए गए। कागजों में यह कार्य पूर्ण दिखा दिया गया है। बिना स्थलीय सत्यापन किए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने कार्य संतुष्टि के प्रमाणपत्र पर मुहर भी लगा दी है।

फोरलेन की जमीन का सीमांकन न होने से सड़क किनारे तेजी से अवैध कब्जे हो रहे हैं। इससे बेफिक्र एनएचएआइ के अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। जमीन को सुरक्षित करने के लिए एनएचएआइ की ओर से एनएच 27 के अयोध्या-गोरखपुर खंड के 116 किमी की दूरी में दो तरफ बाउंड्री पिलर फिक्सिग के निर्देश 2017 में दिए गए। 2019-20 में कार्य पूरे किए जाने थे। इस क्रम में 50 मीटर की दूरी पर दोनों साइड कुल 4590 पिलर लगाए जाने थे। 90 लाख की लागत से होने वाला यह कार्य भी जैसे-तैसे पूरा दिखा धन के बंदरबांट की साजिश रच दी गई। इस खेल में टोल कंपनी से लेकर एनएचएआई तक के कर्मियों के शामिल होने की चर्चा है। मिट्टी में गाड़ दिए गए पिलर बाउंड्री पिलर के लिए 500 मिमी के आयताकार में 750 मिमी गहराई में गड्ढे की खोदाई की जानी थी। इसमें पिलर को कंक्रीट से जाम करने थे। इसके लिए एक पिलर की लागत 2036 रुपये निर्धारित की गई थी। कार्यदायी संस्था ने मिट्टी में जैसे तैसे पिलर गाड़ दिए। नतीजतन बारिश के मौसम में यह उखड़ गए। अधिकांश जगहों पर लगाए गए यह पिलर भी गायब हो गए हैं। बीते जनवरी में ही 885 पिलर के बिल का 20.18 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। यूं खुली पिलर फिक्सिग के खेल की पोल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के दिल्ली कार्यालय तक बाउंड्री पिलर फिक्सिग के खेल की शिकायत पहुंच चुकी है। शिकायतकर्ता हरिकेश निवासी बस्ती ने आरोप लगाया कि अमानक गड्ढे खोदे गए और उसे कंक्रीट की जगह मिट्टी से दबा दिया गया। इस तरह पिलर फिक्सिग के कार्य के लिए मिले धन का बंदरबांट कर लिया गया। इस प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए यह शिकायत एचएनएआई के क्षेत्रीय कार्यालय में भी की गई है। हैंडओवर के समय होगा पिलर का सत्यापन

बाउंड्री पिलर फिक्सिग का कार्य सहीं नहीं पाए जाने पर उसे ठीक कराया जाएगा। कार्यदायी संस्था ने कार्य पूरा कर दिया है, भुगतान ले लिया है लेकिन अभी इसे हैंडओवर नहीं किया है। हैंडओवर लेने के पहले इसका स्थलीय सत्यापन कराया जाएगा। टूटे और गायब पिलर उसी दर में फिर से कार्यदायी संस्था को ही लगाने होंगे। केपी सिंह, टीम लीडर एनएचएआइ

Edited By Jagran

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