लोकल ट्रैवल: सुरक्षा, विकास के साथ रोजगार और महंगाई के मुद्दे पर भी हो बात

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन शुरू हो गए हैं। एक तरफ जहां सर्दी अपने शवाब पर है वहीं चुनाव ने विधानसभा क्षेत्र का माहौल गर्मा दिया है। गली चौराहा बस व ट्रेन में लोग चुनावी चर्चाओं में मशगूल हैं। दैनिक जागरण संवाददाता आयुष गंगवार ने सोमवार को पुराने बस अड्डे से मेरठ जाने वाली बस में सफर कर यात्रियों से उनके मुद्दे जानने की कोशिश की। पेश है एक रिपोर्ट..

JagranPublish: Mon, 17 Jan 2022 09:47 PM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 09:47 PM (IST)
लोकल ट्रैवल: सुरक्षा, विकास के साथ रोजगार और महंगाई के मुद्दे पर भी हो बात

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन शुरू हो गए हैं। एक तरफ जहां सर्दी अपने शवाब पर है, वहीं चुनाव ने विधानसभा क्षेत्र का माहौल गर्मा दिया है। गली, चौराहा, बस व ट्रेन में लोग चुनावी चर्चाओं में मशगूल हैं। दैनिक जागरण संवाददाता आयुष गंगवार ने सोमवार को पुराने बस अड्डे से मेरठ जाने वाली बस में सफर कर यात्रियों से उनके मुद्दे जानने की कोशिश की। पेश है एक रिपोर्ट..

----------- पुराना बस अड्डा से बस निकलते ही जाम में फंस गई, क्योंकि यहां जगह कम है और वाहन ज्यादा। हालांकि बस अड्डे को पार कर बस ने रफ्तार पकड़ी। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे बनने से बस यात्रियों को कोई राहत नहीं मिली, क्योंकि डीएमई से मेरठ की बसें नहीं गुजरती। मेरठ तक की बस में दुहाई, मुरादनगर और मोदीनगर के भी यात्री बैठते हैं। यात्रियों ने कहा कि मेरठ का सफर पहले से आसान हुआ है, क्योंकि डीएमई के बनने से दिल्ली-मेरठ रोड पर वाहनों का दबाव कम हो गया है। रैपिड रेल का निर्माण पूरा हो जाए तो फिर राहत मिलेगी। बुजुर्ग ओमबीर अपना मास्क नीचे कर कुछ खफा अंदाज में बोले, एक घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बस अड्डे के सामने वाले अस्पताल में आए थे तो बस अड्डे से बसें ही नहीं निकलने दीं। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं करता। युवा राधे ने उन्हें शांत कराते हुए मुख्यमंत्री की सुरक्षा का हवाला दिया। थोड़ी राहत, तो थोड़े आहत : बस अब गाजियाबाद शहर से निकल चुकी थी। हाईवे के एक किनारे फैक्ट्रियां हैं तो दूसरी ओर अवैध कालोनियों का अतिक्रमण। सावित्री ने कहा कि सब्सिडी सीधे खाते में भेजने का काम अच्छा है, लेकिन अब एलपीजी सिलेंडर के दाम इतने बढ़ गए हैं कि सब्सिडी का मतलब ही नहीं बचा। राजेश ने भी उनकी हां में हां मिलाई। साहिबाबाद की कंपनी में बतौर तकनीशियन कार्यरत राजेश ने बताया कि लाकडाउन में कंपनी ने दो माह 15-15 दिन का वेतन घर बैठे दिया था और इसके एवज में अब रविवार को बुलाकर काम कराते हैं। चार माह तक बिना छुट्टी के काम करना पड़ेगा। तनु बोलीं रोजगार को बढ़ावा शिक्षा से मिलेगा। उनकी दोस्त गायत्री ने खेलों को बढ़ावा देने की बात कही। साथ बैठे राजनीति शास्त्र से एमए करने वाले टेकचंद बोले कि सुविधाओं के साथ उन मुद्दों पर भी बात करनी चाहिए, जिनसे समाज व राष्ट्र को सम्मान मिला हो।

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept