फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, आठ गिरफ्तार

जागरण संवाददाता गाजियाबाद नगर कोतवाली पुलिस व साइबर सेल ने नेपाल और बांग्लादेशी नागरिकों

JagranPublish: Fri, 28 Jan 2022 08:53 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 08:53 PM (IST)
फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, आठ गिरफ्तार

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : नगर कोतवाली पुलिस व साइबर सेल ने नेपाल और बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर गुरुवार को आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपितों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से भारी संख्या में आधार कार्ड बनाने के उपकरण व दस्तावेज बरामद किए हैं। फर्जी आधार कार्ड बनाने का यह धंधा एक्सप्रेस मार्केट में चल रहा था। पुलिस के मुताबिक आरोपित फर्जी मुहर से जाली नाम-पते के आधार पर आधार कार्ड बनाते थे। यह फर्जीवाड़ा पिछले एक साल से चल रहा था। आरोपित रबड़ के फिगरप्रिट और रेटीना स्कैनर का इस्तेमाल कर पिछले एक साल में 30 हजार से अधिक फर्जी आधार कार्ड बनवा चुके हैं। पुलिस को आधार के लिए आइडी व लाग-इन बनाने वाली कंपनियों की भूमिका संदिग्ध मिली है, इसके लिए पुलिस यूआइडीएआइ को रिपोर्ट भेजेगी।

सीओ सिटी प्रथम स्वतंत्र कुमार सिंह ने शुक्रवार प्रेसवार्ता कर बताया कि मुखबिर से अंबेडकर रोड की एक्सप्रेस मार्केट स्थित यमुनोत्री मार्केट में फर्जी आधार कार्ड बनाने की सूचना मिली थी। इस पर नगर कोतवाली पुलिस ने साइबर सेल के साथ मौके पर छापेमारी की तो फर्जी आधार कार्ड बनते हुए पाए गए। पुलिस ने मौके से गोविदपुरम निवासी अंकित गुप्ता, संजयनगर सेक्टर 23 निवासी शिवम, अटौर-नंगला निवासी मोनू गुप्ता, गुलधर निवासी सचिन, हापुड़ के पिलखुआ निवासी विशाल रघुवंशी, दिल्ली गेट निवासी लक्ष्य शर्मा, रजापुर निवासी पूजा रावत व डासना निवासी सुजीता को गिरफ्तार किया। अंकित गुप्ता गिरोह का सरगना है और बीएससी पास है, जबकि मोनू गुप्ता व सुजिता के नाम असम की कंपनी की आइडी है, जिसके आधार पर वह फर्जी आधार बनाते हैं। क्या-क्या हुआ बरामद

पुलिस ने मौके से 209 रबड़ के अंगूठे के निशान, 137 फर्जी आधार कार्ड, 61 आइ रेटीना क्लोन सफेद कागज पर बने, 67 आधार रसीद, 30 लैपटाप, नौ मोबाइल फोन, छह आइ स्केनर, तीन थंब स्केनर, छह फिगर स्केनर, 11 मानिटर मय सीपीयू, आठ मुहर, एक प्रिटर समेत अन्य सामान बरामद किया। ऐसे चल रहा था फर्जीवाड़े का पूरा धंधा

सीओ सिटी प्रथम स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि असम की असूजा कंपनी आधार कार्ड बनाने के लिए सर्टिफिकेट और लाग-इन आइडी उपलब्ध कराती है। इसके लिए एनएसइआइटी की परीक्षा पास करनी होती है। नोएडा में असूजा कंपनी की सहयोगी कंपनी फ्रनटेक साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी चल रही है। गिरोह के सरगना अंकित ने पूछताछ में बताया कि नोएडा की कंपनी की एक मालिक जया चौहान से उसकी मुलाकात हुई थी। जया ने असम की कंपनी से अंकित का असम के पते पर फर्जी आधार बनवाया और असम में आधार कार्ड बनाने की आइडी और लाग-इन पासवर्ड ले लिया। गिरोह के मोनू गुप्ता व सुजिता ने भी असम के फर्जी आधार कार्ड के आधार पर लाग-इन आइडी लेकर वह सुपरवाइजर और आपरेटर बन गए। एक आइडी को कई-कई जगह करते थे लाग-इन

सीओ ने बताया कि आरोपित असम व नोएडा की कंपनी से असम के फर्जी आधार कार्ड के आधार पर सुपरवाइजर व आपरेटर बनते थे और यूआइडीएआइ का लाग-इन व पासवर्ड ले लेते थे। इसके बाद व आपरेटर व सुपरवाइजरों के रबड़ फिगरप्रिट व रेटीना स्कैनर बनाते थे। आरोपित एक आइडी को कई-कई जगह लाग-इन करते थे। जांच में आया है कि एनसीआर में आरोपितों ने दर्जनों सेंटर बनाए हुए हैं, जहां से ये लोग एक आइडी से अनेक लाग-इन कर फर्जी आधार कार्ड बनाने का धंधा संचालित कर रहे हैं। आरोपित ऐसे स्थानों पर जाकर कार्ड बनाने का कैंप लगाते थे, जहां नेपाल व बांग्लादेश के लोगों की बड़ी आबादी होती थी। दो से पांच हजार रुपये में बनाते हैं आधार

आरोपितों ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए वह पांच हजार रुपये लेते हैं। जबकि आधार कार्ड में पता बदलने के नाम पर वह दो से तीन हजार रुपये लेते हैं। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के तार पूरे एनसीआर में जुड़े हुए हैं। गिरोह के कई बदमाश अभी फरार हैं। पूरे गिरोह को पकड़ने के लिए पुलिस आरोपितों से पूछताछ के आधार पर कार्रवाई कर रही है। इन लोगों की धरपकड़ के लिए पुलिस दबिश दे रही है। पार्षद व प्रधानाचार्य की मुहर का करते थे इस्तेमाल

आरोपितों के पास से बड़ी संख्या में पार्षद व प्रधानाचार्यों की फर्जी मुहर मिली हैं। इनके माध्यम से वह पते का प्रमाण बनाकर मुहर के माध्यम से आधार कार्ड बनाते थे। यूआइडीएआइ के अधिकारियों ने की पूछताछ

सीओ ने बताया कि बृहस्पतिवार व शुक्रवार को यूआइडीएआइ के अधिकारी गाजियाबाद पहुंचे और उन्होंने आरोपितों से पूछताछ की। आरोपितों द्वारा बनाए गए आधार कार्ड को निरस्त कराने के लिए अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। इसके साथ ही सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को भी मामले की जानकारी दी गई है। यूआइडीएआइ के अधिकारी आधार का डेटाबेस खंगाल रहे हैं। 33 और लोगों को बनाना था सुपरवाइजर व आपरेटर

आरोपितों के पास से सुपरवाइजर व आपरेटर बनाने के लिए इस्तेमाल में आने वाले 33 फार्म पुलिस को मिले हैं। आने वाले समय में 33 आपरेटर व सुपरवाइजरों के माध्यम से आइडी व लाग-इन तैयार किया जाना था। पूर्व में भी पकड़ा गया था गिरोह

थाना लोनी बार्डर पुलिस ने 29 दिसंबर 2021 को आम आदमी पार्टी के विधायक हाजी यूनुस की मुहर पर दिल्ली के पते का फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनसे लैपटाप, फिगर व रेटिना स्केनर के साथ क्रास मैच की डिवाइस, वेब कैमरा, पांच मोहर, पहचान पत्र व आधार कार्ड के भरे हुए प्रारूप, भरण पोषण भत्ता के भरे हुए प्रारूप, आंखों के रेटीना की जगह इस्तेमाल किया जाने वाले फोटो, तीन मोबाइल और 19.50 हजार रुपये मिले थे।

Edited By Jagran

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