इंटीग्रेटेड टाउनशिप की आड़ में गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों पर शासन सख्त, तलब की रिपोर्ट

जागरण संवाददाता गाजियाबाद इंटीग्रेटेड टाउनशिप की आड़ में मनमानी करते हुए गड़बड़ी क

JagranPublish: Fri, 28 Jan 2022 10:40 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 10:40 PM (IST)
इंटीग्रेटेड टाउनशिप की आड़ में गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों पर शासन सख्त, तलब की रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : इंटीग्रेटेड टाउनशिप की आड़ में मनमानी करते हुए गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों पर शासन सख्त हो गया है। यूपी के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द बैठक बुलाई है। उक्त बैठक की तैयारियों के संबंध में प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने प्रगति रिपोर्ट तलब की है। इसके चलते आवास बंधु, यूपी शासन के निदेशक रवि जैन ने गाजियाबाद समेत अन्य विकास प्राधिकरणों में इंटीग्रेटेड टाउनशिप की प्रगति व वर्तमान स्थिति के संबंध में सूचना मांगी है। 31 जनवरी की शाम चार बजे तक हर हाल में निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट भेजने के निर्देश जीडीए समेत अन्य विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष को दिए हैं। - एकमात्र इंटीग्रेटेड टाउनशिप क्रासिग रिपब्लिक में गड़बड़ी की भरमार -

गाजियाबाद की एकमात्र इंटीग्रेटेड टाउनशिप क्रासिग रिपब्लिक में गड़बड़ी की भरमार है। वरिष्ठ भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने मामले को उठाते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासन हरकत में आया। उन्होंने कहा कि क्रासिग रिपब्लिक की पुनरीक्षित डीपीआर भू-स्वामित्व का परीक्षण किए बिना नियम विरूद्ध स्वीकृत की गई है। वर्ष 2006 में इंटीग्रेटेड टाउनशिप क्रासिग रिपब्लिक की डीपीआर 360 एकड़ जमीन पर स्वीकृत की गई थी। वर्ष 2016 में फिर से क्रासिग रिपब्लिक की पुनरीक्षित डीपीआर 360 एकड़ जमीन पर ही स्वीकृत की गई, जबकि क्रासिग रिपब्लिक पर आज तक भी स्वामित्व मात्र 270 एकड़ जमीन का ही है। ऐसे में बिना स्वामित्व वाली 90 एकड़ जमीन, जिस पर क्रासिग रिपब्लिक टाउनशिप बसाने वाले बिल्डरों का स्वामित्व ही नहीं है। उस पर नियम विरूद्ध सड़क, फायर स्टेशन, क्रीडास्थल, सरकारी स्कूल, ग्रीन बेल्ट व अन्य आवश्यक सुविधाएं बिना स्वामित्व वाली जगह पर ही प्रस्तावित कर दी गई। बिना स्वामित्व का परीक्षण किए गलत तरीके से पुनरीक्षित डीपीआर स्वीकृत करने का खामियाजा क्रासिग रिपब्लिक के निवासी आज तक भुगत रहे हैं। 16 साल बाद भी उपरोक्त सुविधाओं समेत डीपीआर में दर्शायी गई अन्य जनसुविधाएं विकसित नहीं की जा सकी हैं। उन्होंने इस कृत्य सीधे तौर पर धोखाधड़ी करार देते हुए डीपीआर निरस्त करने की मांग की थी। - सुपरटेक का नक्शा निरस्त कर चुका है जीडीए -

वरिष्ठ भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने कहा कि क्रासिग रिपब्लिक में सुपरटेक बिल्डर का नक्शा गलत पास हुआ था। भूखंड संख्या जीएच-14 पर सुपरटेक ने किसानों के स्वामित्व वाली व सरकारी जमीन पर नक्शा पास कराया था। जांच में गड़बड़ी स्पष्ट उजागर हुई, जिसके बाद सुपरटेक बिल्डर का नक्शा निरस्त किया गया। जीएच-12 पर एसोटेक बिल्डर व जीएच-1 पर पंचशील बिल्डर का नक्शा भी गलत पास किया गया है। जीएच-12 का नक्शा निरस्त करने के लिए जीडीए नोटिस भी दे चुका है। बिल्डरों ने यहां नियमानुसार न तो ग्रीन बेल्ट छोड़ी है और न ही अन्य जनसुविधाएं विकसित की है। मास्टर ग्रीन का क्षेत्र 1.50 लाख वर्गमीटर दर्शाया गया है जबकि मौके पर काफी कम क्षेत्र मास्टर ग्रीन का छोड़ा गया है।

Edited By Jagran

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