आसमान में बादल,बर्फीली फुहार से कांपे लोग

जागरण संवाददाता इटावा बुधवार को तापमान में वृद्धि हुई लेकिन कड़ाके की सर्दी कम नहीं ह

JagranPublish: Wed, 19 Jan 2022 06:01 PM (IST)Updated: Wed, 19 Jan 2022 07:14 PM (IST)
आसमान में बादल,बर्फीली फुहार से कांपे लोग

जागरण संवाददाता, इटावा : बुधवार को तापमान में वृद्धि हुई लेकिन कड़ाके की सर्दी कम नहीं हुई। तड़के आसमान में घने बर्फीले बादल छाने धरातल पर 100 मीटर की दूरी साफ नजर नहीं आ रही थी। यदाकदा बर्फीली फुहार गिरने से सर्दी की सिहरन और अधिक महसूस की गई। तापमान सुबह न्यूनतम 07 तो दोपहर में अधिकतम 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बर्फीले बादलों ने सारा दिन सूर्यदेव को चमकने नहीं दिया। इससे हाड़कंपाऊ सर्दी से सभी त्रस्त नजर आए।

तड़के आसमान साफ था इससे प्रतीत हो रहा था मौसम खुशगवार रहेगा लेकिन थोड़ी ही देर आसमान घने बर्फीले बादल छा गए और धरती पर धुंध होने से मौसम में फिर से बदलाव हो गया। सर्दी की सिहरन वातावरण में बढ़ने से आवागमन करने वालों को गलनभरी सर्दी का ही अहसास हुआ। अपराह्न तीन बजे सूरज हल्के चमके लेकिन कोई राहत नहीं दे सके इससे लोगों ने कड़ाके की सर्दी का एहसास किया। मौसम की मार से दिन भी रात जैसा मौसम नजर आया। विवशता के तहत ही लोग आवागमन करने कर रहे थे। अधिकांश घरों में ही सर्दी से बचाव कर रहे थे। बीते पखवारा से जारी कड़ाके की सर्दी का दौर अभी थम नहीं रहा है, इससे हर वर्ग के लोग परेशान हैं।

सरकारी राहत नहीं, भगवान भरोसे

विधानसभा चुनाव 2022 की आचार संहिता के चलते कोई राजनैतिक दल कंबल वितरण नहीं कर सकता है। शासन की ओर से जलाए जाने वाले अलाव प्रभावशाली लोगों तक सीमित रह गए है। आम जनमानस भगवान भरोसे सर्दी से बचाव कर रहा है। अब आसपास जंगल और बाग न होने से लकड़ियों के बजाए कूड़ा-कचरा के साथ पुराने टायर और प्लास्टिक कचरा मिलाकर जलाया जा रहा है। इससे वातावरा में और अधिक प्रदूषण फैल रहा है।

फसलों की सुरक्षा में जुटे किसान

यह मौसम सिर्फ गेहूं की फसल के लिए मुफीद माना जा रहा है। आलू-सरसों तथा सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसान काफी परेशान हैं। जरा सी देर के लिए धूप निकलने पर किसान खेतों में निराई-गुड़ाई में जुटकर फसलों की देखरेख कर रहे है। अधिकांश किसान फसलों को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करते नजर आए।

पशु-पक्षी भी सर्दी से त्रस्त

बीते पखवारे से जारी सर्दी के प्रकोप से पशु-पक्षी भी परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इनकी चहचहाट भी काफी कम हो गई। हालात इसकदर बदहाल है कि अधिकतर पशुपालक सिर्फ दुधारू पशुओं का बचाव कर रहे हैं। बेसहारा पशु तो सड़क किनारे पेड़ों की छाया तले ही सर्दी से बचाव करते नजर आ रहे है। हाईवे पर इनके विचरण से सड़क हादसे घटित हो रहे हैं।

थोड़े-थोड़े अंतराल पर पश्चिमी विक्षोभ बनने से मौसम में परिवर्तन हो रहा है। अभी आगामी 48 घंटों तक इसी तरह की सर्दी-कोहरा का मौसम रहेगा। 22 से 24 जनवरी के मध्य बारिश होने की संभावना है। यह सर्दी गेहूं की फसल के लिए उपयोगी है जबकि अन्य फसलों के लिए नुकसानदेय साबित हो सकती है। आलू-सरसों तथा सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसान इन फसलों की सजगता से देखरेख करें†ा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।

- एसएन सुनील पाण्डेय कृषि मौसम विज्ञानी

Edited By Jagran

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