सिगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत

हर बार कुछ दिन चलकर फुस्स हो जाता अभियान अब दुकानदारों को भुगतना पड़ेगा 25 हजार का जुर्माना

JagranPublish: Wed, 29 Jun 2022 05:21 AM (IST)Updated: Wed, 29 Jun 2022 05:21 AM (IST)
सिगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत

जासं, एटा : सिगल यूज प्लास्टिक पालीथिन पर प्रतिबंध लगभग हर साल लगता है, लेकिन इसका चलन आज तक बंद नहीं हो पाया। एक बार फिर प्रतिबंध की तिथि तय हुई है, लेकिन बिना प्रभावी कार्रवाई के प्रतिबंध कारगर नहीं हो सकता।

सरकार ने एक जुलाई से सिगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जिसको लेकर जागरूकता अभियान की तैयारी भी जनपद के स्थानीय निकायों में की जा रही है। घोषणा कर दी गई है कि जो भी सिगल यूज प्लास्टिक बेचते मिलेगा उसे 25 हजार रुपये का अर्थदंड भुगतना होगा। शहर के व्यापारियों की स्थिति यह है कि गोदामों में माल भरा पड़ा है। ऐसे में अगर बिक्री रुक गई तो उन्हें नुकसान होगा, हालांकि व्यापारियों को माल खपाने का पूरा मौका दिया गया। दूसरी तरफ जिन व्यापारियों ने स्टाक कर रखा है उन्हें भी पहले से यह पता है कि प्रतिबंध की घोषणा हो चुकी है फिर भी वे स्टाक बढ़ाने में जुटे रहे। इसका खामियाजा उन्हें अब भुगतना पड़ सकता है। 2018 में जारी हुआ था गजट

-पालीथिन पर प्रतिबंध की घोषणा कोई नई नहीं है। प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई 2018 से पालीथिन को प्रतिबंधित कर दिया था। केवल निर्माण और भंडारण ही नहीं, इसका इस्तेमाल भी गैर कानूनी किया गया था। आदेश के क्रियान्वयन के लिए नीतियां और दिशा-निर्देश भी जारी हुए। इस पर अमल करते हुए शुरुआती दौर में खूब कवायद की गई। एटा जनपद में अधिकारियों-कर्मचारियों ने पसीना बहाया और तमाम जगह से पालीथिन बैग जब्त कर नष्ट कराए गए। प्रशासन की सख्ती का असर भी हुआ। व्यापारियों ने पालीथिन बैग रखना बंद कर दिए और लोग कपड़े के थैले साथ में लेकर बाजार निकलने लगे, मगर कुछ समय बाद ही उपयोग फिर शुरू हो गया। नाले-नालियां चोक, पशुओं को खतरा

-समाजसेवी मेधाव्रत शास्त्री का कहना है कि पालीथिन के दुष्प्रभाव हर ओर नजर आ रहे हैं। इस्तेमाल के बाद पालीथिन यहां-वहां फेंक दी जाती हैं। जो नाले-नालियों में पहुंचकर उन्हें चोक कर देती हैं। वहीं पालीथिन बैग में कूड़ा और व्यर्थ खाद्य सामग्री भरकर कूड़े के ढेरों पर फेंक दी जाती हैं। इनमें भोजन तलाशते हुए पशु अक्सर पालीथिन भी खा जाते हैं। पेट में एकत्रित होने वाली पालीथिन उनके लिए जानलेवा बन जाती है। इसलिए प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। प्रतिबंध के प्रविधान

-कोई भी व्यक्ति किसी खाद्य पदार्थ या अखाद्य वस्तु की बिक्री में पालीथिन कैरी बैग का प्रयोग नहीं करेगा। इस्तेमाल भी नहीं किया जाएगा।

- पालीथिन कैरी बैग का निर्माण, आयात, भंडारण, बिक्री या ढुलाई नहीं की जा सकती है।

- पहली बार उल्लंघन पर एक माह की जेल या एक से 10 हजार रुपये तक जुर्माना।

- दूसरी बार उल्लंघन पर छह महीने की जेल या पांच से बीस हजार रुपये तक जुर्माना। 2020 में जब्त हुई 29 कुंतल पालीथिन

---शहर में एक साल में प्रतिष्ठानों पर पालीथिन अभियान चलाकर करीब 29 कुंतल पालीथिन जब्त की गई। वहीं दुकानदारों से करीब 49 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया। ये है नियम

---------

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधित) नियम, 2021 के अनुसार, 75 माइक्रोन (यानी 0.075 मिमी मोटाई) से कम वर्जिन या पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक से बने कैरी बैग के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग को पीडब्लूएम नियम, 2016 के तहत पहले अनुशंसित 50 माइक्रोन के विपरीत 30 सितंबर, 2021 से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ------

पालीथिन प्रतिबंध के अनुपालन के लिए जल्द अभियान चलाया जाएगा। उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

- आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept