चुनाव में महंगाई का तड़का और मुफ्त की दाल भी

पक्ष-विपक्ष की बहस का मुद्दा है मदद और महंगाई मतदाता परख रहे हर पार्टी का एजेंडा

JagranPublish: Sun, 23 Jan 2022 05:09 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 05:09 AM (IST)
चुनाव में महंगाई का तड़का और मुफ्त की दाल भी

जासं, एटा: विधानसभा चुनाव में मुद्दों की बात न हो तो वह चुनाव ही क्या। जिले के मतदाता तमाम मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें महंगाई का तड़का भी है। इसके साथ ही मदद के नाम पर दी गई राशन कोटे की मुफ्त की दाल भी। चर्चा दोनों की हो रही है। पक्ष-विपक्ष की राजनीति भी मानो इस मुद्दे पर केंद्रित हो गई है। राजनीतिक पार्टियों के समर्थक मुद्दों को सामने रखकर सवाल-जवाब कर रहे हैं।

इसमें कोई दोराय नहीं कि वर्ष 2017 के चुनाव की अपेक्षा महंगाई बढ़ी है। पेट्रो-डीजल मूल्यों से लेकर खाद्य तेलों और राशन का सामान आदि पर महंगाई बढ़ी है। चुनाव में जब वोट देने की लोगों से पूछा जाए तो वे दो धड़ों में बंटे नजर आते हैं। एक पक्ष कहना है कि हर चीज की कीमतें बढ़ीं हैं और महंगाई की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ी है। दूसरे पक्ष के पास इसका हाजिर जवाब है। वह कहता है कि महंगाई बढ़ी है तो मदद भी तो लोगों की खूब हुई है। लोग अपने अपने तर्क से अपनी बात को पुख्ता करने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों की जुबां पर आंकड़े हैं। वे कहते हैं कि खाद्य तेल 200 रुपये के पार चला गया, अन्य किसी सरकार में इतनी कीमत नहीं बढ़ी, लेकिन तमाम लोग ऐसे भी हैं जो इसका जवाब यूं दे रहे हैं कि सरकार ने अगर खाद्य तेलों की कीमत बढ़ाई तो राशन की दुकानों से मुफ्त में राशन भी तो दिया है। इसमें दाल, खाद्य तेल, चावल, गेहूं जैसी चीजें शामिल हैं। जनपद में 832 राशन की दुकानें हैं जिनसे मुफ्त में राशन का आवंटन हुआ है। जिले में उपभोक्ताओं की संख्या तीन लाख से अधिक है। जातिगत आंकड़े हावी

-इस चुनाव में बहस का मुद्दा जातीयता भी है। जातिगत आंकड़े भी खूब लगाए जा रहे हैं। जनपद की सदर, जलेसर, अलीगंज, मारहरा चारों विधानसभा सीटों पर मतदाता जातीय तराजू में पार्टियों की ताकत तोल रहे हैं। राजनीति के हर घटनाक्रम पर उनकी नजर है। संचार माध्यमों से वे खबरों को लेकर वे अपडेट भी रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जो भी गणित लगाता है वह पिछली बार के नफा नुकसान और इस बार की परिस्थिति को देखकर ही लगाता है। सबके पत्ते खुलने का इंतजार

-मतदाताओं को सबके पत्ते खुलने का इंतजार है। वे कह रहे हैं कि जब सभी पार्टियों के प्रत्याशी मैदान में आ जाएंगे तब ही समीकरणों की स्थिति साफ होगी। पहले यह देख रहे हैं कि किस पार्टी से कौन चुनाव मैदान में आता है।

इसमें कोई दोराय नहीं है कि महंगाई का सामना हर वर्ग को करना पड़ा है। कई चीजें इतनी महंगी नहीं होनी चाहिए थीं।

- राकेश कुमार, ठंडी सड़क महंगाई बढ़ी है तो मुफ्त में राशन भी मिला है, इस सच्चाई को हम कैसे नकार सकते हैं, लेकिन महंगाई में वृद्धि नहीं होनी चाहिए थी।

- गणेश गुप्ता, आगरा रोड हमारी तो यही मांग है कि अगली सरकार जो भी बने महंगाई पर अंकुश लगाए और आम जनता को राहत दे।

- शुभम वाष्र्णेय कोरोना काल में सरकार द्वारा की गई मदद को नकारा नहीं जा सकता। वोट का निर्णय करते वक्त हम सबको सोचना चाहिए।

- शैलेंद्र कुमार, व्यवसायी

Edited By Jagran

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