विधानसभा चुनाव : गंगा प्रसाद ने हर बार बदला पाला और लगाई डबल हैट्रिक

छह बार अंगद की तरह विधानसभा क्षेत्र में पैर जमाए रहे कई धुरंधरों को तीसरी बार नहीं दिया है जनता ने मौका

JagranPublish: Wed, 19 Jan 2022 05:06 AM (IST)Updated: Wed, 19 Jan 2022 05:06 AM (IST)
विधानसभा चुनाव : गंगा प्रसाद ने हर बार बदला पाला और लगाई डबल हैट्रिक

जासं, एटा : एटा विधानसभा सीट पर सिर्फ एक ही धुरंधर गंगा प्रसाद वर्मा ऐसे रहे जिन्होंने हैट्रिक ही नहीं डबल हैट्रिक लगाई अन्य प्रत्याशी चूकते रहे। कई को दोहराने का भी मौका नहीं मिला कुछ ऐसे रहे जो दो बार जीते मगर तीसरी बार हार गए। हालांकि कुछ विधायक ऐसे भी रहे जो तीन बार जीते, मगर बीच में गेप देकर। जनता ने उन्हें निरंतर तीन बार जीतने का मौका नहीं दिया। खास बात यह है कि गंगा प्रसाद कभी एक दल में नहीं रहे, हर बार उन्होंने पार्टी बदलकर चुनाव लड़ा और जीतते गए।

एटा विधानसभा सीट पर गंगा प्रसाद वर्मा राजनीति में ऐसी शख्सियत थे जिनके आगे विपक्ष एक बार नहीं बल्कि लगातार छह बार ढेर हुआ। अच्छे-अच्छे धुरंधर गंगा प्रसाद को जीतने से रोक नहीं पाए। विपक्षी प्रत्याशियों को राजनीतिक पार्टियां काफी सोच-समझकर टिकट देती थीं कि वे गंगा प्रसाद के आगे टिक पाएंगे या नहीं। गंगा प्रसाद वर्मा की उस समय लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1957 में कांग्रेस की लहर थी और उस लहर में वे निर्दलीय चुनाव जीत गए। उन्होंने कांग्रेस के गिरधर गोपाल को हराया। गंगा प्रसाद का विजय रथ यहीं से शुरू हुआ और 1977 तक अनवरत दौड़ता रहा। 1962 में गंगा प्रसाद ने दल बदल दिया और हिदू महासभा में चले गए। इस बार उन्होंने कांग्रेस के सहदेव सिंह को हराया। 1967 में उन्होंने एसडब्ल्यूए से चुनाव लड़ा और इस बार भारतीय जन संघ केपी सिंह को हराया। 1969 में गंगा प्रसाद कांग्रेस में चले गए और उन्होंने भारतीय जन संघ के देवराज को पराजित कर दिया। 1974 में गंगा प्रसाद एनसीओ से लगे और कांग्रेस को करा दिया। 1977 में जेएनपी से उन्होंने चुनाव लड़ा और निर्दलीय बदन सिंह को हराया। तीसरी बार रहे वंचित

-वर्ष 1985 में एटा सीट पर एलकेडी के अतर सिंह यादव चुनाव जीते, जबकि 1989 में वे जनता दल में चले गए और फिर से चुनाव जीत गए, लेकिन 1991 में वे जनता पार्टी से चुनाव लड़े और हार गए। 1991 और 1993 में भाजपा के पीतम सिंह वर्मा चुनाव जीते थे, मगर 1996 में वे हार गए। इस वर्ष सपा के शिशुपाल सिंह यादव जीते और 2002 में भी सपा से ही विधायक बने, लेकिन 2007 में सपा उम्मीदवार के रूप में वे चुनाव हार गए। वर्ष 1996 में सकीट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के सूरज सिंह शाक्य चुनाव हारे, जबकि इससे पहले 1991 और 1993 में उन्होंने चुनाव जीता था। वर्ष 1989 और 1991 में जलेसर सुरक्षित विधानसभा से भाजपा के माधव नट जीते थे, मगर तीसरी बार उन्हें मौका नहीं मिला। इसी तरह वर्ष 2002 और 2007 में निधौली कलां विधानसभा सीट से अनिल कुमार सिंह यादव दो बार विधायक रहे। वर्ष 1996 और 2002 में अलीगंज विधानसभा सीट पर सपा के रामेश्वर सिंह यादव लगातार दो बार जीते, मगर तीसरी बार वे विधानसभा की सीढ़ी नहीं चढ़ सके। डबल हैट्रिक बनाई

-वर्ष-विधानसभा-जीते प्रत्याशी-हारे प्रत्याशी

1957-एटा-गंगा प्रसाद वर्मा, निर्दलीय-गिरधर गोपाल, इंडियन नेशन कांग्रेस

1962-एटा-गंगा प्रसाद वर्मा, हिदू महासभा-सहदेव सिंह, इंडियन नेशन कांग्रेस

1967-एटा-गंगा प्रसाद वर्मा, एसडब्ल्यूए-पी सिंह, भारतीय जन संघ

1969-एटा-गंगा प्रसाद वर्मा, इंडियन नेशनल कांग्रेस-देवराज, भारतीय जन संघ

1974-एटा-गंगा प्रसाद वर्मा, एनसीओ-नवाब सिंह यादव, इंडियन नेशन कांग्रेस

1977-एटा-गंगा प्रसाद वर्मा, जेएनपी-बदन सिंह, निर्दलीय हैट्रिक से चूकने वाले उम्मीदवार

-वर्ष-विधानसभा-जीते प्रत्याशी-हारे प्रत्याशी

1985-एटा-अतर सिंह यादव, एलकेडी-गंगा प्रसाद वर्मा, जेएनपी

1989-एटा-अतर सिंह यादव, जनता दल-हंसराज सिंह, इंडियन नेशन कांग्रेस

1991-एटा-पीतम सिंह वर्मा, भाजपा-अतर सिंह यादव, जनता पार्टी

1993-एटा-पीतम सिंह वर्मा, भाजपा-अतर सिंह यादव, सपा

1996-एटा-शिशुपाल सिंह यादव, सपा-पीतम सिंह वर्मा, भाजपा

2002-एटा-शिशुपाल सिंह यादव, सपा-भारत सिंह वर्मा, बसपा

1991-सकीट-सूरज सिंह शाक्य, भाजपा-वीरेंद्र सिंह सोलंकी, जनता पार्टी

1993-सकीट-सूरज सिंह शाक्य, भाजपा-वीरेंद्र सिंह सोलंकी, जनता दल

1989-जलेसर-माधव नट, भाजपा-प्रेमपाल सम्राट, कांग्रेस

1991-जलेसर-माधव नट, भाजपा-रामखिलाड़ी, जनता पार्टी

2002-निधौली कलां-अनिल कुमार सिंह यादव, सपा-ओमप्रकाश यादव, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी

2007-निधौली कलां-अनिल कुमार सिंह यादव, सपा-महेशचंद्र, बसपा

1996-अलीगंज-रामेश्वर सिंह यादव, सपा-सत्यपाल सिंह राठौर, बसपा

2002-अलीगंज-रामेश्वर सिंह यादव, सपा-सत्यपाल सिंह राठौर, बसपा

Edited By Jagran

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