रहें सावधान, बेहद खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ रहा प्रदूषण

बुलंदशहर जेएनएन। प्रदूषण का रोजाना बढ़ता स्तर हवा की सेहत बिगाड़ रहा है। जिम्मेदारों क

JagranPublish: Sun, 28 Nov 2021 08:53 PM (IST)Updated: Sun, 28 Nov 2021 08:53 PM (IST)
रहें सावधान, बेहद खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ रहा प्रदूषण

बुलंदशहर, जेएनएन। प्रदूषण का रोजाना बढ़ता स्तर हवा की सेहत बिगाड़ रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही जहां इसे बेहद खतरनाक स्थिति ओर बढ़ा रही है। वहीं, हवा नहीं चलने की वजह से प्रदूषण वायुमंडल से छट नहीं पा रहा है। ऐसे में रविवार को भी 56 पायदान की उछाल के साथ एक्यूआइ 374 दर्ज किया गया।

दरअसल, साप्ताहिक अवकाश के कारण रविवार को प्रदूषण की रोकथाम की कवायद ढीली पड़ी रही। साथ ही हवा नहीं चलने की वजह धूल एवं धुएं के महीन कण वातावरण में घुले रहे। जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर कम होने की बजाय बढ़ता रहा। रेड जान से बाहर आने की बजाय एक्यूआइ बेहद खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ने लगा। देर शाम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में एक्यूआइ 374 दर्ज किया गया। ऐसे में हवा में घुले जहर की वजह से लोगों की सेहत बिगड़ने लगी है। श्वास और ह्दय रोगियों को परेशानी होने लगी हैं। इसके अलावा लोगों में एलर्जी, खांसी-जुखाम के साथ गले में जलन, छींक और खासी की शिकायत बढ़ गई है। घर से बाहर निकलने पर जरूर लगाएं मास्क : डा. नीरज

बढ़ता प्रदूषण जनमानस के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा। फिजीशियन डा. नीरज सिघल का कहना है कि प्रदूषण से बचाव करने के लिए घर से कम ही बाहर निकलें। सांस लेने में दिक्कत होने पर पांच से दस मिनट तक भाप लें। यदि घरसेबाहर निकले भी तो मास्क जरूर लगाएं। इससे नाक, आंख सुरक्षित रहेंगी। घी या अणु तेल (आयुर्वेदिक औषधि) का इस्तेमाल भी करें। वायु प्रदूषण के कारण गले में खराश या दर्द होने पर गुनगुने पानी में नमक या बीटाडीन डालकर गरारे करें। इसके अलावा एक चम्मच शहद में थोड़ा सा मुलेठी चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करने से भी राहत मिलेगी। आंखों में जलन, पानी बहने या लाल होने पर पलकों पर घी लगाएं। जलाने की बजाय जमीन में मिलाएं बचे हुए कृषि अवशेष

कृषि मौसम वैज्ञानिक भी बढ़ते प्रदूषण को लेकर किसानों को सलाह दे रहे हैं। केवीके के डा. रामानंद पटेल ने कहा है कि किसान खरीफ फसलों के बचे हुए अवशेषों को ना जलाएं। क्योंकि इससे वातावरण में प्रदूषण ज्यादा होता है। स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। उत्पन्न धुंध होने के कारण सूर्य की किरणें फसलों तक कम पहुंचती हैं। जिससे फसलों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे फसल में अधिक उत्पादन नहीं मिल पाता एवं गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। किसानों को सलाह है कि मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिए जलाने की बजाय बचे हुए फसल अवशेषों को जमीन में मिला दें।

इन्होंने कहा..

प्रदूषण का स्तर और न बढ़े। इसके लिए सड़कों पर छिड़काव कराया जा रहा है। अन्य विभाग भी इसकी रोकथाम में लगे हुए हैं।

सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

Edited By Jagran

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