आवारा कुत्तों और बंदरों से हर कोई खौफजदा

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों बंदरों की उद्दंडता पर रोक लगाए जाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई जबकि बेसहारा पशुओं के संरक्षित किए जाने के लिए गोशालाएं तो बनी हैं कितु लोगों के अपने पशुओं को खुला छोड़ दिए जाने की वजह से बेसहारा पशु खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

JagranPublish: Wed, 19 Jan 2022 10:54 PM (IST)Updated: Wed, 19 Jan 2022 10:54 PM (IST)
आवारा कुत्तों और बंदरों से हर कोई खौफजदा

बिजनौर, जागरण टीम। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों, बंदरों की उद्दंडता पर रोक लगाए जाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जबकि बेसहारा पशुओं के संरक्षित किए जाने के लिए गोशालाएं तो बनी हैं, कितु लोगों के अपने पशुओं को खुला छोड़ दिए जाने की वजह से बेसहारा पशु खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसान लगातार इन बेसहारा पशुओं से फसलों के बचाव की गुहार लगा चुके हैं, कितु अभी तक किसी स्तर से इस मुद्दे का निदान नहीं ढूंढा गया। तेजी से बढ़ रही संख्या

जनपद में पिछले पांच साल से आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया। जनपद की 12 नगर पालिका परिषदों, छह नगर पंचायतों और 1123 ग्राम पंचायतों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब जनपद में आवारा कुत्तों और बंदरों की संख्या करीब 20 हजार से ऊपर पहुंच गई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन आवारा कुत्तो और बंदरों की कई बार पकड़ने की मांग कर चुके हैं। धरपकड़ को नहीं चला अभियान

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और बंदरों की धरपकड़ के लिए अभी तक कोई अभियान नहीं चला। इस कारण जिले में आवारा कुत्तों और बंदरों की संख्या 20 हजार से ऊपर पहुंच गई, जहां बंदरों के आतंक की वजह से लोग अपनी छतों पर नहीं बैठ पाते। वहीं आवारा कुत्ते अक्सर लोगों पर हमला कर देते हैं। बताते हैं कि साल 2019 में थाना शहर कोतवाली के गांव मुकीमपुर धर्मसी निवासी राधेश्याम पर जंगल में काम करते वक्त आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया था। नौ दिसंबर 2021 को स्योहारा में गैस एजेंसी के कुत्ते ने एक नवजात को निवाला बना लिया था। हालांकि सरकार ने कुत्तों की संख्या पर लगाम लगाने के लिए नसबंदी कराए जाने की व्यवस्था की है, कितु जिले में अभी तक कुत्तों की नसबंदी कराए जाने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया। फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं बेसहारा पशु

सरकारी स्तर कान्हा पशु आश्रम, वृहद गोशाला और कांजी हाउस बनाए जाने के बावजूद बेसहारा पशु खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई बार खेतों से खदेड़ते वक्त बेसहारा पशु संबंधित किसान पर हमलावर तक हो जाते हैं। किसान लगातार इन पशुओें से निजात दिलाए जाने की मांग करते आ रहे हैं।

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पालिका क्षेत्र में गोशाला-12

क्रियाशील वृहद गोशाला-्02

निर्माणाधीन वृहद गोशाला-01

कांजी हाउस -04

अस्थाई गोशाला-11

प्रति पशुचारे की दर-30 रुपये

जिले में संरक्षित पशु- 1,010

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इनका कहना है:

बेसहारा पशुओं को संरक्षित किए जाने के लिए संबंधित विभागों के अफसरों को निर्देशित किया जा चुका है। वहीं लोगों से अपील की जा रही है कि वह अपने पशुओं को खुला ना छोड़ें।

-उमेश मिश्रा, डीएम।

Edited By Jagran

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