ध्वनि प्रदूषण से अवरुद्ध होता शारीरिक व मानसिक विकास

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को ध्वनि प्रदूषण विषयक जागरूकता संगोष्ठी हुई। प्राचार्य डा. मुरलीधर राम ने छात्र-छात्राओं से ध्वनि प्रदूषण न करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। विभिन्न प्रकार की व्याधियां और समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

JagranPublish: Sat, 22 Jan 2022 05:51 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 05:51 PM (IST)
ध्वनि प्रदूषण से अवरुद्ध होता शारीरिक व मानसिक विकास

जागरण संवाददाता, भदोही : डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को ध्वनि प्रदूषण विषयक जागरूकता संगोष्ठी हुई। प्राचार्य डा. मुरलीधर राम ने छात्र-छात्राओं से ध्वनि प्रदूषण न करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। विभिन्न प्रकार की व्याधियां और समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कहा कि ईयर फोन का प्रयोग सीमित समय के लिए कम आवाज के साथ करना चाहिए। मुख्य वक्ता डा. यशवीर सिंह ने कहा कि ध्वनि वाहनों, कल-कारखानों, पटाखों आदि से निकलने वाली आवाज जब मानव शरीर और मस्तिष्क के लिए असहनीय हो जाती है तब प्रदूषण होता है। ऐसे वातावरण में आठ घंटे तक लगातार रहने वाला व्यक्ति विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार होता है।

गर्भ में पल रहे बच्चे में भी शारीरिक या मानसिक विकलांगता आ सकती है। कहा रिहायशी इलाकों में 45 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक डा. गौतम गुप्ता और समन्वयक नैक प्रभारी डा. अनुराग सिंह ने कहा कि सड़कों, फैक्ट्रियों के आसपास व डीजे के प्रयोग वाले क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण अधिक होता है। इससे बचने के लिए हमें दूरी बनाना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन शिखा तिवारी ने किया। डा. राजकुमार सिंह यादव, डा. श्वेता सिंह, डा. भावना सिंह, बृजेश कुमार, डा. अनीश कुमार मिश्र, डा. रुस्तम अली, डा. अमित तिवारी, पूनम द्विवेदी आदि थीं।

Edited By Jagran

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