अग्निपथ बवाल के बाद निशाने पर कोचिंग संस्थान, एक जुलाई से होगी सबकी जांच

बगैर पंजीकरण के चल रहे कोचिंग संस्थानों की सरकार नकेल कसने की तैयारी में है।

JagranPublish: Wed, 22 Jun 2022 03:27 PM (IST)Updated: Wed, 22 Jun 2022 03:27 PM (IST)
अग्निपथ बवाल के बाद निशाने पर कोचिंग संस्थान, एक जुलाई से होगी सबकी जांच

अग्निपथ बवाल के बाद निशाने पर कोचिंग संस्थान, एक जुलाई से होगी सबकी जांच

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : बगैर पंजीकरण के चल रहे कोचिंग संस्थानों की सरकार नकेल कसने की तैयारी में है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसके लिए एक जुलाई से अभियान चलाएगा। ऐसे में कोचिंग संचालकों को नया पंजीकरण व नवीनीकरण कराने का फरमान जारी हो गया है। जांच में पंजीयन न मिलने पर संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। निर्देश यह कि विद्यालय समय में भी कोई कोचिंग संस्थान नहीं चल पाएंगे। माना जा रहा कि अग्निपथ बवाल में कोचिंग संचालकों की भूमिका संदिग्ध होने पर यह कदम उठाया गया है। विद्यालय समय में संचालित कोचिंग सेंटर में किसी विद्यालय की छात्र-छात्राएं पढ़ती मिलीं तो उस विद्यालय की भी मान्यता खत्म करने की कार्रवाई होगी। कारण कोचिंग के नाम पर कक्षाएं संचालित करने की शिकायत सामने आती रही है। अभिभावकों को भी सचेत किया गया है कि ऐसे स्कूलों व कोचिंग सेंटरों ने अपने बच्चों का नामांकन न कराएं जिसकी मान्यता व रजिस्ट्रेशन न हो।

रजिस्टर्ड 16, सैकड़ों मनमर्जी के खुले कोचिंग संस्थान

भले ही जगह-जगह कोचिंग सेंटर खोलकर कर शिक्षा देने के नाम पर छात्र-छात्राओं का दोहन किया जा रहा हो लेकिन सच्चाई यही है कि पूरे जिले में मात्र 16 कोचिंग सेंटर ही रजिस्टर्ड हैं। जबकि बिना पंजीयन के सैकड़ों चल रहे हैं।

कैसे होता है रजिस्ट्रेशन

- कोचिंग सेंटर चलाने के लिए डीआइओएस कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है। 50 छात्र-छात्राओं तक की संख्या पर 10 हजार रुपये व इससे ऊपर की छात्र संख्या पर 25 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में ट्रेजरी में जमा किया जाता है। इसके साथ ही कोचिंग सेंटर में छात्र-छात्राओं को बैठने, शौचालय, पेयजल, अग्नि सुरक्षा जैसी सुविधाएं हैं कि नहीं, इन सब चीजों को देखकर रजिस्ट्रेशन किया जाता है।

अक्सर होता यह है कि छात्र कोचिंग करते हैं लेकिन उनका दाखिला किसी न किसी स्कूल में होता है। वह स्कूल छोड़कर कोचिंग करते हैं। अमुक स्कूल की मान्यता भी नहीं होती है, वहीं कोचिंग संचालक बकायदा कक्षाएं चलाते हैं। ऐसे संचालक व विद्यालयों को भी चिन्हित किया जाएगा कि उनके छात्र विद्यालय क्यों नहीं आते हैं। इस बारे में अभिभावकों को भी सचेत किया जा रहा है कि ऐसे स्कूलों व कोचिंग सेंटरों ने अपने बच्चों का नामांकन न कराएं जिसकी मान्यता व रजिस्ट्रेशन न हो।

-नंदलाल गुप्ता, डीआइओएस

Edited By Jagran

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