वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में शिवलिग की प्राण प्रतिष्ठा

शुकुलपुरा गांव में स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर में रविवार को वैदिक मंत्रोचार के बीच शिवलिग की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।

JagranPublish: Sun, 23 Jan 2022 11:18 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 11:18 PM (IST)
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में शिवलिग की प्राण प्रतिष्ठा

जासं, कुदरहा, बस्ती : कुदरहा विकास क्षेत्र के डिहुकपुरा उर्फ शुकुलपुरा गांव में स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर में रविवार को वैदिक मंत्रोचार के बीच शिवलिग की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके पूर्व भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव का जयघोष करते हुए दुग्धेश्वर नाथ शिव मंदिर छरदही, झारखंडेश्वर नाथ शिव मंदिर गायघाट, सोमेश्वर नाथ शिव मंदिर पाऊं सहित पांच शिव मंदिरों पर मंत्रोच्चार के बाद शिवलिग का मिलान कराया गया। भोलेनाथ का जयकारा लगाते हुए महिलाएं व युवतियां पैदल यात्रा करती हुईं मंदिर तक पहुंची। वहां यज्ञाचार्य सत्यदेव पांडेय और सुरेश गिरी के साथ सीताराम यादव, कलाधर यादव, दिव्य प्रकाश पांडेय, गंगाराम मिश्रा, शंभू नाथ अग्रहरि, पन्ना लाल यादव, जानकी यादव, शिवाकांत यादव, मधुर कुमार शुक्ला, प्रधान योगेंद्र कुमार, योगेंद्र प्रसाद समेत अन्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवलिग की प्राण-प्रतिष्ठा की। मौके पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया गया। धन्य है वशिष्ठ की नगरी जहां पुत्रेष्टि यज्ञ होने से अवतरित हुए थे परमात्मा जासं,बस्ती : श्री बाबा झुंगीनाथ धाम में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम महायज्ञ श्रीराम कथा में रविवार को कथा वाचक मारकंडेय महाराज ने पुत्र कामेष्टी यज्ञ की कथा का वर्णन किया। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के नारे का जयघोष किया। कथा वाचक ने कहा कि वशिष्ठ की नगरी धन्य है। जहां पुत्रेष्टि यज्ञ से अयोध्या में परमात्मा का अवतार हुआ। दशरथ के पास वशिष्ठ जैसे समर्थ गुरु होने के बाद भी वे नि:संतान थे, उसका कारण मात्र यही कि उन्होंने इच्छा ही प्रकट नहीं किया। जैसे ही दशरथ ने इच्छा प्रकट किया श्रृंगीऋषि के मार्ग दर्शन में यज्ञ अनुष्ठान सफल हुआ। धरती पर श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म हुआ। दशरथ के घर साक्षात पर ब्रह्म श्री हरि अवतरित हुए। जो निर्गुण थे वही भक्तों के प्रेम के कारण सगुण हो गए। कथा पांडाल में जैसे ही श्रीराम का जन्म हुआ भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी के गान के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। संतोष शरण महाराज ने कहा कि परमात्मा सर्व समर्थ है। जैसे ही श्रीराम का जन्म हुआ आकाश से देव और गन्धर्वो ने पुष्प वर्षा किया। संयोजक ध्रुवचंद्र पाठक ने विधि विधान से आचार्यो का वंदन किया। मुख्य यजमान माता बदल पाठक, सीमा पाठक, गंगाराम चौधरी, गुड्डू तिवारी, शीतला गोसाई, रामकेवल यादव, राजेन्द्र यादव, अनिल पाठक, रामनिहोर चौधरी, शुभम पाठक, बब्बू तिवारी, विनोद पांडेय, धीरेंद्र पाठक, विकास मिश्रा, हीरा दास, गुरु चरण मौजूद रहे।

Edited By Jagran

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