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बिल्डर ने तालाब की जमीन पर कर रखा था कब्जा, प्रशासन का चला बुलडोजर

डेलापीर तालाब पर कब्जे वाली जगह को तालाब घोषित करने के बाद बरेली प्रशासन ने सिविल लाइंस का दिल कहे जाने वाले अक्षर विहार की बेशकीमती जमीन को भी दो बिल्डरों के कब्जे से मुक्त करवा लिया। प्रशासन की जांच में तालाब पर बिल्डर का अधिकार गलत पाया गया था।

By Sant ShuklaEdited By: Published: Sat, 23 Jan 2021 05:05 PM (IST)Updated: Sat, 23 Jan 2021 05:05 PM (IST)
बिल्डर ने तालाब की जमीन पर कर रखा था कब्जा, प्रशासन का चला बुलडोजर
यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अब सुंदरीकरण होगा।

बरेली, जेएनएन।  डेलापीर तालाब पर कब्जे वाली जगह को तालाब घोषित करने के बाद बरेली प्रशासन ने सिविल लाइंस का दिल कहे जाने वाले अक्षर विहार की बेशकीमती जमीन को भी दो बिल्डरों के कब्जे से मुक्त करवा लिया। प्रशासन की जांच के बाद तालाब पर बिल्डर का अधिकार गलत पाया गया था। इसके बाद शुकवार सुबह सदर तहसील के एसडीएम विशु राजा, तहसीलदार आशुतोष गुप्ता तालाब पर पहुंचे। तकरीबन 2100 वर्ग मीटर जमीन के टुकड़े पर बिल्डर ने नींव भरवाने के बाद निर्माण कराया था। सर्वे टीम से पैमाइश कराने के बाद तालाब की चिह्नित जमीन पर हुए अतिक्रमण को जेसीबी से हटवा दिया गया। प्रशासन ने जमीन अपर नगर आयुक्त को हस्तांतरित कर दी है। यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अब सुंदरीकरण होगा।

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 फ्री होल्ड जमीन के 6284 वर्ग मीटर में बिल्डर संदीप झावर, अभिषेक अग्रवाल, कपिल अग्रवाल समेत 23 साझेदार है।वर्ष 2000 में उन्होंने गर्वनर के पक्ष में डीएम द्वारा जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी। 20 साल में कई बार इस जमीन की पैमाइश हो चुकी है। 2013 में नगर निगम इसी जमीन पर नाला निर्माण भी करवा दिया था। मामला उछलने के बाद नाला निर्माण अधूरा छोड़ा गया था। इस मामले में तत्कालीन एडीएम प्रशासन ने तहसील की पैमाइश और नगर निगम के नक्शे से मिलान के बाद तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा माना था। तत्कालीन एडीएम प्रशासन अरुण कुमार ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में किसी भी जलाशय की भूमि पर अतिक्रमण अवैध है। जांच में यह बात साफ हो गई कि तालाब के 1.670 हेक्टेयर रकबे में से 3370 वर्ग मीटर भूमि बिल्डर को फ्री होल्ड की गई भूमि में शामिल कर दी गई थी। तत्कालीन डीएम सुभाषचंद्र शर्मा ने भूमि को फ्री होल्ड किया था। संदीप झावर की जमीन के पीछे का हिस्सा बिल्डर प्रिंस छावड़ा के पास है। शुक्रवार को तालाब पर पहुंची टीम ने संदीप झावर के कब्जे वाली जमीन से 1403 वर्ग मीटर और प्रिंस छावड़ा के कब्जे से 791 वर्ग मीटर जमीन को अपने कब्जे में लिया है। इस पर बिल्डरों ने प्रशासन की कार्रवाई को मनमाना रवैया बताया है।

 जेसीबी चलते ही बोले, अरे रोक दो..

डीएम नितीश कुमार और सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग ने पिछले हफ्ते अक्षर विहार के तालाब का जायजा लिया था। शुक्रवार को एसडीएम विशु राजा ने नगर निगम से स्टाफ और जेसीबी मंगवाई। बिल्डर का स्टाफ भी मौके पर पहुंचा। उन्होंने दरख्वास्त करते हुए कहा कि समय दिया जाए तो हम खुद निर्माण हटवा लेंगे। निर्माण को ढहाने के लिए जेसीबी जैसे ही आगे बढ़ी। बिल्डर का स्टाफ चिल्लाया कि जेसीबी रोक दो.. हम हटवा रहे हैं। लेकिन एसडीएम ने जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटवाना शुरू किया।

 बिल्डर बोले - एनओसी तो बीडीए और निगम ने ही दी

प्रिंस छावड़ा के वकील तालाब पर पहुंचे। उनका कहना था कि हमारा बैनामा 2012 का है। सिविल कोर्ट में मामला चल रहा है। निर्माण कराने से पहले नगर निगम और बीडीए ने ही नोटिस दी थी। अब अचानक प्रशासन और नगर निगम की टीम निर्माण को तुड़वाने के लिए पहुंच गई।

अब होगा सुंदरीकरण, तालाब में चलेंगी बोट

तालाब के सुंदरीकरण पर 11.68 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे। तालाब के पानी को साफ करने के लिए एसटीपी भी लगाए जाएंगे। इसके साथ नकटिया नदी से लेकर तालाब तक ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जाएगा। वहीं फिशिंग डेक भी बनाया जाएगा। यहां पर म्यूजिकल फाउंटेन भी लगाया जाएगा। यहां तालाब में लोग बोट भी चला सकेंगे।

 बिल्डर संदीप ने कहा - कई रिपोर्ट हमारे पक्ष में

बिल्डर संदीप झावर का कहना है कि प्रशासन कहता है कि तालाब की जमीन पर हमनें कब्जा किया। गूगल इमेज में 20 साल पहले और अब की तस्वीरें हमारे पास है। एक इंच जमीन पर भी अवैध कब्जा नहीं हुआ है। हमारी जमीन को फ्री होल्ड होने के बाद एडीएम रामदास की तरफ से रजिस्ट्री हुई थी। 20 साल में कई बार हुई पैमाइश और जांच रिपोर्ट हमारे पक्ष में दी गई। अवैध कब्जा नहीं माना गया। फिर अचानक आज कार्रवाई क्यों की गई।एसडीएम सदर का कहना है कि जांच अभिलेखों में जमीन पर कब्जा मिला। इसके बाद जमीन से कब्जा हटवाने के बाद नगर निगम को हस्तातंरित कर दी गई है।


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