Pandit Birju Maharaj Memories : खानकाह नियाजिया के मुरीद थे पंडित बिरजू महाराज, उर्स में आता था पूरा घराना

Pandit Birju Maharaj Memories करीब आठ साल पहले विदेश में बिरजू महाराज के सीने में दर्द हुआ था। उसके बाद भी वह उर्स में शिरकत करने आए थे। तबीयत बहुत अच्छी नही थी। उनके लिए खानकाह में दुआ भी पढ़ी गई।

Ravi MishraPublish: Mon, 17 Jan 2022 04:38 PM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 04:38 PM (IST)
Pandit Birju Maharaj Memories : खानकाह नियाजिया के मुरीद थे पंडित बिरजू महाराज, उर्स में आता था पूरा घराना

बरेली, जेएनएन। Pandit Birju Maharaj Memories : करीब आठ साल पहले विदेश में बिरजू महाराज के सीने में दर्द हुआ था। उसके बाद भी वह उर्स में शिरकत करने आए थे। तबीयत बहुत अच्छी नही थी। उनके लिए खानकाह में दुआ भी पढ़ी गई। तबीयत नासाज होने के बावजूद महफिलखाने में उन्होंने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अपनी भाव-भंगिमाओं से ही लोगों को मोहित कर दिया। अचानक उनके निधन से कला प्रेमियों में दुख है।

यह कहना है शहर में मुहल्ला ख्वाजा कुतुब स्थित खानकाह नियाजिया के प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी का। उन्होंने बताया कि कथक सम्राट बिरजू महाराज खानकाह के मुरीद थे। उनका पूरा घराना वर्षों से यहां आता जाता रहा है। उर्स के मौके पर वह महीनों तक यही ठहरते थे। यहां एक कमरा सिर्फ उनके परिवार वालों के लिए ही रखना पड़ता था। बिरजू महाराज का बचपन यही खानकाह में गुजरा है।

अपने पिता अच्छन महाराज के साथ वह यहां आते रहते थे। यही खेलते-कूदते थे और शास्त्रीय नृत्य भी अपने पिता से सीखा करते थे। खानकाह के प्रति उनमें हमेशा प्यार बना रहा। ऊंचे मुकाम पर पहुंचने के बाद भी उर्स में यहां आना नहीं भूलते थे। कुछ समय से अधिक उम्र होने के कारण नहीं आ पा रहे थे। आठ साल पहले आखिरी बार यहां उर्स पर दुआ कराने के लिए आए थे। उसके बाद एक बार उनके चाचा शंभू महाराज भी अपने बेटे के साथ आए। 

Edited By Ravi Mishra

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