बरेली में बीमार होकर ठीक भी हो गए ओमिक्रोन संदिग्ध, नहीं आई रिपोर्ट

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आई तो सबसे ज्यादा सतर्कता ओमिक्रोन को लेकर बरती जा रही थी। शासनादेश हुए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि ऐसे मरीजों को अलग रखकर इलाज कराया जाए। ये सब हुआ ओमिक्रोन जैसे लक्षण वाले मरीजों की पहचान भी कर ली गई मगर इसके आगे बात नहीं बढ़ी। अब तक करीब 50 ओमिक्रोन संदिग्धों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए लखनऊ भेजे गए लेकिन रिपोर्ट अबतक नहीं आई। इनमें से कुछ मरीज को स्वस्थ होकर घर भी जा चुके हैं।

JagranPublish: Mon, 17 Jan 2022 05:17 AM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 05:17 AM (IST)
बरेली में बीमार होकर ठीक भी हो गए ओमिक्रोन संदिग्ध, नहीं आई रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, बरेली: कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आई तो सबसे ज्यादा सतर्कता ओमिक्रोन को लेकर बरती जा रही थी। शासनादेश हुए, स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि ऐसे मरीजों को अलग रखकर इलाज कराया जाए। ये सब हुआ, ओमिक्रोन जैसे लक्षण वाले मरीजों की पहचान भी कर ली गई मगर, इसके आगे बात नहीं बढ़ी। अब तक करीब 50 ओमिक्रोन संदिग्धों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए लखनऊ भेजे गए लेकिन, रिपोर्ट अबतक नहीं आई। इनमें से कुछ मरीज को स्वस्थ होकर घर भी जा चुके हैं।

16 जनवरी तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 1680 हो गई है। सिर्फ 23 को अस्पतालों में भर्ती कराने की जरूरत हुई, बाकी होम आइसोलेशन में रखे गए। चिकित्सक मानते हैं कि तीसरी लहर का वैरिएंट ज्यादा घातक नहीं है। लेकिन यह पता करना जरूरी है कि तेजी से फैल रहा वैरिएंट कौन सा है। इस बीच विदेश या दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से भी लोगों का आना हुआ। जांच में संक्रमण की पुष्टि और ओमिक्रोन वैरिएंट जैसे लक्षण देखकर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लिए। यह जानने का प्रयास किया कि जिले में आए इन लोगों को ओमिक्रोन ने घेरा या डेल्टा वैरिएंट ने। विभाग के अधिकारी अब तक इंतजार कर रहे मगर, लखनऊ से जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट नहीं आई। वैक्सीन ने संभाले हालात

चिकित्सक मानते हैं कि बड़ी संख्या में वैक्सीनेशन होने से वायरल का प्रभाव कम पड़ा है। जिन लोगों में सामान्य लक्षण मिले, उनमें से अधिकतर ने दोनों डोज लगवा ली हैं। कोरोना संक्रमितों को रात में पसीना आए तो ओमिक्रोन की संभावना

एसआरएमएस इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस में रेस्पेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष एवं क्रिटिकल केयर प्रभारी प्रोफेसर डाक्टर ललित सिंह का कहना है कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर में कोरोना संक्रमितों में सामान्य लक्षण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार के साथ गंध और स्वाद भी चला जाता था। दूसरी लहर में आए वैरिएंट डेल्टा में लोगों की गंध और स्वाद जाने के साथ फेफड़ों तक संक्रमण ने अटैक किया। इससे अस्पताल में भर्ती होने वाले 30 प्रतिशत मरीजों को आक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ी। डा. ललित का कहना है कोरोना वायरस की तीसरी लहर में आया नया वैरिएंट ओमिक्रोन में संक्रमितों में सामान्य लक्षणों ही हैं। संक्रमितों गंध और स्वाद एकदम सही रहता है। लेकिन संक्रमितों को रात में पसीना आता है। अगर ऐसा है तो कोरोना संक्रमण भी हो सकता है। इसकी प्रबल संभावना है। जीनोम सीक्वेंसिग रिपोर्ट को लेकर अफसर खामोश

जीनोम सीक्वेंसिग की जांच के लिए भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट के बारे में अधिकांश अफसर खामोशी साध लेते हैं। इस मामले में सीएमओ, एसीएमओ समेत अन्य अफसरों को जब रिपोर्ट के संबंध में पूछो तो सिर्फ इतना बताया जाता है कि सैंपल भेजा गया है, रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बरेली से करीब 50 सैंपल जीनोम सीक्वेंसिग के लिए भेजे जा चुके हैं। लेकिन अब तक उनमें से एक भी रिपोर्ट नहीं आई है। कुछ मरीज तो घर भी लौट चुके हैं। अभी तक जिले में ओमिक्रोन की पुष्टि भी नहीं हुई है।

डा. अनुराग गौतम, प्रभारी, कोविड-19 जिला सर्विलांस टीम

Edited By Jagran

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