यात्रा से साहित्य का संव‌र्द्धन और मिली पहचान

26 सितंबर से 11 चरणों में 80 पूर्वज साहित्यकारों के जन्मस्थान तक पहुंची यात्रा

JagranPublish: Wed, 26 Jan 2022 01:50 AM (IST)Updated: Wed, 26 Jan 2022 01:50 AM (IST)
यात्रा से साहित्य का संव‌र्द्धन और मिली पहचान

बाराबंकी : यात्राएं समाज के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराने का काम करती हैं। साहित्य संव‌र्द्धन का संकल्प लेकर जिले के साहित्यकारों ने पूर्वज साहित्यकारों के अवदान से समाज को परिचित कराने के लिए यात्रा की। 11 चरणों में संपन्न यात्रा में करीब 80 साहित्यकारों की जन्मस्थली को नमन करने यह यात्री पहुंचे। इतना ही नहीं उनके जीवन परिचय और साहित्यिक गतिविधियों पर केंद्रित बाराबंकी का साहित्य इतिहास (शोध संदर्भ) एक पुस्तक भी प्रकाशित की, जिसका डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति ने विमोचन किया था। साहित्य संव‌र्द्धन की दिशा में किए गए इन प्रयासों की सराहना की जा रही है।

पूर्वज साहित्यकारों का अधूरा परिचय बनी प्रेरणा

आंखें फाउंडेशन के संस्थापक व यात्रा आयोजन मंडल के अध्यक्ष प्रदीप सारंग ने बताया कि जनपद के अनेक साहित्यकार ऐसे थे जिनकी रचनाएं हम-सबको प्रेरित करती थीं और विभिन्न मौकों पर उनके उद्धरण भी दिए थे। लेकिन, उनका परिचय अधूरा ही मिल पाता था। अवध भारती संस्थान के अध्यक्ष डा. राम बहादुर मिश्र, अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद के जिलाध्यक्ष पंकज कंवल, साहित्यकार समिति के अध्यक्ष डा. विनय दास व अन्य साहित्यकारों से चर्चा कर यात्रा करने का संकल्प लिया गया। इसके बाद पंकज कंवल के संयोजन में पूर्वज साहित्यकारों की जन्मस्थली तक यात्रा और बाद में शोध संदर्भ का प्रकाशन किया गया। अद्भुत और अविस्मरणीय हैं यात्रा के अनुभव

संयोजक पंकज कंवल बताते हैं कि धार्मिक और पर्यटन की ²ष्टि से अनेक यात्राएं कीं, लेकिन पूर्वज साहित्यकारों की जन्मस्थली की यात्रा अद्भुत और अविस्मरणीय रही। विश्वास है कि यात्रा के अनुभव और बाराबंकी का साहित्य इतिहास शोध संदर्भ साहित्य प्रेमियों को साहित्यकारों का समग्र परिचय कराने में सफल साबित होगी। अजय सिंह गुरुजी, डा. श्याम सुंदर दीक्षित, डा. बलराम वर्मा, डा. कुमार पुष्पेंद्र व विष्णु कुमार शर्मा ने यात्रा की सफल बनाने में हर स्तर पर सहयोग किया।

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नवोदित कवियों को मिलेगा लाभ

डा. विनय दास ने बताया कि यात्रा में 50 से अधिक साहित्यकार शामिल रहे। यात्रा से निकले सार का लाभ वैसे तो सभी साहित्यप्रेमियों को मिलेगा, लेकिन नवोदित कवियों के लिए यह काफी उपयोगी सिद्ध होगी। नई रचनाओं के सृजन की उन्हें प्रेरणा मिलेगी।

Edited By Jagran

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