भूरागढ़ मेले में पहले दिन उमड़ी भक्तों की भीड़

जागरण संवाददाता बांदा भूरागढ़ दुर्ग में मकर संक्रांति के मौके पर नटबली मेले में भक्तों क

JagranPublish: Fri, 14 Jan 2022 07:04 PM (IST)Updated: Fri, 14 Jan 2022 07:35 PM (IST)
भूरागढ़ मेले में पहले दिन उमड़ी भक्तों की भीड़

जागरण संवाददाता, बांदा : भूरागढ़ दुर्ग में मकर संक्रांति के मौके पर नटबली मेले में भक्तों की भीड़ उमड़ी। दो दिवसीय मेले के पहले दिन भक्तों ने नटबली मंदिर में मत्था टेका और रेवड़ी का प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगी। इस दौरान मेले में सैकड़ों दुकानें सजी रहीं। महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीददारी की। केन नदी में युवा जोड़ों तथा अन्य लोगों ने स्वजन के साथ नौका बिहार का आनंद लिया।

भूरागढ़ दुर्ग के नीचे केन नदी किनारे स्थित नटबली मंदिर में शुक्रवार को मेले की धूम रही। महिलाओं और प्रेमी जोड़ों ने नटबली की मजार पर मत्था टेका और रेवड़ी का प्रसाद चढ़ाया। इसे आशिकों का मेला भी कहा जाता है। इस साल मकर संक्रांति का पर्व लोगों ने दो दिन मनाया। शुक्रवार को लोगों ने त्योहार मनाया और मेले का लुत्फ उठाया। लेकिन ज्यादातर लोग बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे। पहले दिन शुक्रवार को लोगों ने केन नदी पहुंचकर श्रद्धा की डुबकी लगाई और पूजा पाठ किया। केन नदी तट पर बने नटबली मंदिर में पूरे दिन भीड़ रही। लोगों ने श्रद्धा से माथा टेक कर मंगलकामना की। मेला देखने के लिए शहर समेत दूर दराज से लोग जुटे। लोगों ने प्राचीन भूरागढ़ किला घूमकर आनंद उठाया। महिलाओं और बच्चों ने मेले का जमकर लुत्फ उठाया। उधर मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। मटौंध व भूरागढ़ समेत आसपास थानों की फोर्स तैनात रही। बड़ी संख्या में स्त्री, पुरुष, युवक-युवती व बच्चे शरीक हुए। प्रेमी जोड़ों ने भी यहां हाजिरी दी। कुछ श्रद्धालुओं ने खिचड़ी लंगर का आयोजन किया।

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1880 से लग रहा है मेला

बांदा : युवा नटबली प्रेमी की कहानी से जुड़े इस मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शरीक होते हैं। यहां दो मंदिर हैं। किवदंती है कि एक प्रेमी नटबली की और दूसरा मंदिर उसकी प्रेमिका किलेदार नोने अर्जुन सिंह की पुत्री का है। वर्ष 1850 में मकर संक्रांति के दिन प्रेमिका के पिता की शर्त पूरी करते समय सूत की रस्सी पर नदी पार कर रहे नटबली प्रेमी की गिरकर मौत हो गई थी। प्रेमिका के पिता ने नट युवक की रस्सी काट दी थी। तब से हर वर्ष यहां मकर संक्रांति पर मेले की परंपरा चली आ रही है।

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मेले में महिलाओं व बच्चों ने की खरीदारी

बांदा: भूरागढ़ में नटबली की समाधि पर लगने वाले दो दिवसीय मेले में पहले दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मेला में महिलाओं व बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया और खरीददारी भी की। इस मेले में नवविवाहित जोड़ों के अलावा प्रेमी-प्रेमिकाओं की ज्यादा भीड़ उमड़ती है।

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1857 के बलिदानियों को किया नमन

बांदा : भूरागढ किले में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में देश के लिये प्राण न्योछावर करने वाले बलिदानियों के स्थल में मोमबत्ती जलाकर दो मिनट का मौन रख श्रद्धाजलि अर्पित की गई। शहर के तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि समेत समाजसेवियों ने शुक्रवार को जनपद के एतिहासिक दुर्ग भूरागढ़ में 1857 के प्रथम युद्ध में हुये बलिदानियों की याद में श्रद्धाजलि दी। इस दौरान समाजसेवियों ने बलिदानियों को पुष्पाजलि देकर उनकी कृतज्ञता ज्ञापित की।

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सेल्फी प्वाइंट पर दिखी होड़

बांदा : मकर संक्रांति के मौके पर केन नदी घाट पर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही।दिन चढ़ने के साथ केन नदी सेल्फी प्वाइंट पर बड़ी संख्या में युवक और युवतियां व उनका परिवार पहुंचा। जहां पर पानी के साथ जमकर मस्ती की। हर कोई सेल्फी लेकर इस पल को कैमरे में कैद करने की होड़ में लगा रहा। दोस्तों के साथ पहुंचे युवाओं ने जमकर मस्ती की।परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने घर से खाना बनाकर वहीं रेत में साथ बैठकर खाने का आनंद लिया।

Edited By Jagran

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