सियासत की तपिश में कुम्हला रही खिलाड़ियों की पौध

जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाओं को नहीं दी थाप फुटबाल व ताइक्वांडो पर टिका है स्टेडियम का वजूद

JagranPublish: Tue, 18 Jan 2022 11:03 PM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 11:03 PM (IST)
सियासत की तपिश में कुम्हला रही खिलाड़ियों की पौध

बलरामपुर : जिले में खेल प्रतिभाओं के सपनों को उड़ान नहीं मिल पा रही है। बलरामपुर स्टेडियम में एकमात्र फुटबाल प्रशिक्षक की तैनाती है। हाकी के बाद यहां के नवोदित खिलाड़ियों ने ताइक्वांडो क्षेत्र में जिले का नाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी रोशन किया। दिव्यांग खिलाड़ी ने भी पैरा एथलेटिक्स में विश्व पटल पर जिले का मान बढ़ाया है। इसके अलावा अन्य खेलों के खिलाड़ी प्रशिक्षक व संसाधन के अभाव का दंश झेल रहे हैं। चारों विधानसभा में दो बार सत्तारूढ़ दल के विधायक रहे, लेकिन खिलाड़ियों को थाप देने की पहल किसी ने नहीं की। कभी इसे चुनावी एजेंडे में शामिल नहीं किया। यही वजह है कि मैदान में उतरने वाले खिलाड़ी भारी झंझावतों के बीच बिन गुरु ज्ञानी बन रहे हैं। इससे उनकी प्रतिभाएं कुंद हो रहीं है। हाकी मैदान को प्रशिक्षक की दरकार : कभी हाकी में अपना लोहा मनवा चुके बलरामपुर में आज खेल के लिए उपकरण हैं न योग्य प्रशिक्षक। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी केडी सिंह बाबू, अशोक कुमार, जफर इकबाल, सुजीत कुमार सहित अन्य खिलाड़ी यहां के घास मैदान पर हाकी का जादू दिखा चुके हैं। अब तक यहां के खिलाड़ी वसी अहमद इंडिया कैंप व अब्दुल सईद लासानी उत्तर प्रदेश की टीम से खेल चुके हैं। वहीं किरन चौहान, रूपाली चौहान, गुरमीत सिंह, एकता, समता, जया सिंह, अर्चना अग्रवाल, रश्मि सिंह राष्ट्रीय स्तर पर हाकी का कमाल दिखा चुकी हैं। आफताब ओएनजीसी, शहंशाह व परवेज ईस्टर्न रेलवे कोलकाता, नफीस अहमद, हबीब समेत कई खिलाड़ी एनई रेलवे की टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जिले के इकलौते स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में हाकी का मैदान तो है, लेकिन प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ियों का विकास रुक सा गया है। फुटबाल पर टिका है स्टेडियम का वजूद : जिले के फुटबाल खिलाड़ी मोहित राणा का वर्ष 2010 व आकाश मिश्र का चयन 2020 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए किया गया था। प्रशिक्षक शकील अहमद की तैनाती के बाद जिले में फुटबाल खिलाड़ियों की पौध तैयार होने लगी है। जो मंडल व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हो चुके हैं। जिले में ताइक्वांडो की नींव प्रशिक्षक जियाउल हशमत ने अक्टूबर 1999 में रखी थी। जियाउल के सानिध्य में बालक-बालिकाओं ने ताइक्वांडो के गुर सीख कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित कर जिले का नाम रोशन किया। वर्तमान में प्रशिक्षक नागेंद्र गिरि बच्चों को ताइक्वांडो की बारीकियां सिखा रहे हैं। इन खेलों का रुका विकास : - स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट अभ्यास के लिए मैदान तो है, लेकिन प्रशिक्षक व संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी बारीकियां सीखने से महरूम हैं। करीब 20 वर्ष से प्रशिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी है। स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में बैडमिटन प्रशिक्षण के लिए वर्ष 2007 में इनडोर हाल तो बनवाया गया, प्रशिक्षक की तैनाती अब तक नहीं हो सकी। एथलेटिक्स, वालीबाल, बास्केट बाल समेत अन्य खेलों के प्रशिक्षक व संसाधन न होने से खिलाड़ियों की पौध नहीं तैयार हो पा रही है। गुम हुई खेल प्रोत्साहन समिति : - जिले में कमजोर वर्ग के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जिला खेल प्रोत्साहन समिति का गठन वर्ष 2008 में किया गया था। इसमें जिलाधिकारी को समिति का अध्यक्ष व क्रीड़ाधिकारी को सचिव बनाया गया था। समिति में नगर के धनाढ्य व्यक्तियों व खेल प्रेमियों को जोड़ा गया था, जिससे गरीब खिलाड़ियों को आवश्यक संसाधन खरीदने में मदद मिल सके। वर्तमान में समिति के निष्क्रिय होने से खेल प्रतिभाएं कुंठित हैं।

Edited By Jagran

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