रेहरा-सादुल्लाहनगर की बेटियों का दर्द, आने-जाने में डेढ़ सौ का खर्च

सरकारी बस न चलने से तीन बार बदलना पड़ता है वाहन निजी वाहन चालकों पर भरोसा नहीं कर पा रहे अभिभावक।

JagranPublish: Sun, 12 Jun 2022 10:24 PM (IST)Updated: Sun, 12 Jun 2022 10:24 PM (IST)
रेहरा-सादुल्लाहनगर की बेटियों का दर्द, आने-जाने में डेढ़ सौ का खर्च

संवादसूत्र, बलरामपुर : मुख्यालय से सीधी बस सेवा न होने के कारण गोंडा सीमा पर बसे रेहरा-सादुल्लाहनगर की सैंकड़ों बेटियों के सपनों को उड़ान नहीं मिल पा रही है। सादुल्लाहनगर, रेहरा व उतरौला में कई बार जीप, टैक्सी व टैंपो बदलकर लोग मुख्यालय पहुंच पाते हैं। कहीं भी वाहन न मिला तो रास्ते से ही वापस चले जाना पड़ता है। तीनों जगहों पर लगे डग्गामार वाहन खचाखच सवारियां भरने के बाद ही रवाना होते हैं। इसमें चार से पांच घंटे का समय लगता है। डग्गामार वाहनों से यात्रा बेटियों को महंगी होने के साथ अक्सर जोखिम भरी भी साबित होती है। ऐसे में माता पिता व अभिभावक बेटियों को मुख्यालय भेजने में ही संकोच करते हैं, जिससे उनके सपने टूट जाते हैं।

जिला मुख्यालय से नहीं साधन, उतरौला से सुबह-शाम ही बस:

-मुख्यालय पर प्रतिदिन आकर सिलाई सीख रही बिरवा गौरी की पूनम मौर्या कहती हैं कि जिला मुख्यालय से रेहरा व सादुल्लाहनगर के लिए कोई बस सेवा नहीं है। सादुल्लाहनगर से उतरौला के लिए सिर्फ एक निजी बस है जो सुबह आकर शाम को वापस होती है। यह छूट गई तो फिर लोग यात्रा ही रद्द कर देते हैं। सरायखास के दतलूपुर की दीक्षा मौर्या का दर्द है कि सादुल्लाहनगर से रेहरा तक दो घंटे व रेहरा से उतरौला तक पहुंचने डेढ़ घंटा लग जाता है। बलरामपुर आना हो तो दो घंटे और लगना है। तेलिया रतनपुर की शिवानी श्रीवास्तव का कहना है कि आने जाने में पांच घंटे के साथ 150 रुपये से कम से कम खर्च हो जाते हैं फिर भी उन्हें डर ही लगा रहता है। दतौली की सावित्री का कहना है कि सीधी बस सेवा न होने से माता,पिता व भाई इतनी दूर भेजने से कतराते हैं। रागिनी श्रीवास्तव कहती हैं कि जनप्रतिनिधि भी बेटियों के दर्द को नहीं समझ रहे हैँ। रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक वीके वर्मा का कहना है कि इस मार्ग के लिए शीघ्र ही एक बस चलाई जाएगी।

Edited By Jagran

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