सात साल से जमे फिसड्डी अधीक्षकों पर कार्रवाई से डर रहा प्रशासन

दो सीएचसी अधीक्षकों ने एक ही जगह बिताए सात साल कार्रवाई से बच रहे जिम्मेदार।

JagranPublish: Sun, 19 Jun 2022 10:12 PM (IST)Updated: Sun, 19 Jun 2022 10:12 PM (IST)
सात साल से जमे फिसड्डी अधीक्षकों पर कार्रवाई से डर रहा प्रशासन

संवादसूत्र, बलरामपुर :

सरकार पारदर्शी भले ही व्यवस्था लागू करना चाह रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में सात साल से जमे चिकित्सकों का काकस आमजन के हक को छीन रहा है। कई ब्लाकों के अधीक्षक समेत अन्य एक ही जगह पर जमे होने के बावजूद गर्भवती पंजीकरण, संस्थागत प्रसव, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम समेत कई योजनाओं में पीछे हैं, लेकिन विभाग के मुखिया भी इन्हें टस से मस नहीं कर पा रहे हैं। मैनेजमेंट के माहिर इन चिकित्सकों पर जब भी कार्रवाई का दबाव बढ़ता है तो वह खेल में जुट जाते हैं।

एक ही जगह सात से आठ साल से जमे दो अधीक्षकों में एक का तबादला एक साल पहले तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विजय बहादुर सिंह ने किया था, तो उन्होंने टीकाकरण समेत सारे कार्यक्रम ठप कर स्वास्थ्य कर्मियों को डीएम के यहां प्रदर्शन करा दिया था। यही नहीं कार्यभार ग्रहण करने गए नए अधीक्षक को भगा दिया। उनके रसूख का आलम यह रहा कि सीएमओ को आदेश बदलना पड़ा। पड़ोसी जिले की विधायक के करीबी यह अधीक्षक अधिकांश कार्यक्रमों में पीछे हैं, लेकिन अफसर पर कार्रवाई करने से डर रहे हैं।

एक और अधीक्षक हैं, जो करीब आठ साल से पड़ोसी देश के बगल वाले सीएचसी की कमान संभाल रहे थे लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे पीछे हैं। मैनेजमेंट के माहिर यह अधीक्षक सेवाएं सुधारने के बजाय खामियों को छिपाने पर जोर देते हैं। इन्हीं के क्षेत्र के एक हेल्थ वेलनेस सेंटर ने शनिवार को जिले में बेहतर सेवाएं देने का गौरव हासिल किया है। 15 दिन पहले अधीक्षक ने इस सेंटर को सबसे खराब बताकर वहां की सीएचओ को हटवा दिया था। हालांकि सीएचओ ने तभी आरोप लगाया था कि निजी अस्पतालों में हुए प्रसव को सरकारी उपकेंद्र में दिखाने के लिए अधीक्षक दबाव बना रहे हैं। अब सेंटर के टाप होने के बाद अधीक्षक के साजिश का राजफाश हो गया है। सीएमओ डा.सुशील कुमार ने बताया कि सभी के कार्य की निगरानी हो रही है जो भी फिसड्डी है, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

Edited By Jagran

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