कंचौसी व फफूंद के बीच चटकी पटरी, रोकी गईं ट्रेन

संसू कंचौसी (औरैया) चढ़ते-उतरते तापमान ने रेलवे की मुश्किलों को बढ़ाना शुरू कर दिया ह

JagranPublish: Mon, 24 Jan 2022 05:59 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 05:59 PM (IST)
कंचौसी व फफूंद के बीच चटकी पटरी, रोकी गईं ट्रेन

संसू, कंचौसी (औरैया): चढ़ते-उतरते तापमान ने रेलवे की मुश्किलों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। दिल्ली-हावड़ा रूट की मेन लाइन पर सोमवार की सुबह करीब नौ बजे कंचौसी स्टेशन से पांच किमी दूर पश्चिम में बिझाई हाल्ट समीप ज्वाइंट के पास पटरी चटक गई। मालगाड़ी निकलने के बाद पेट्रोलिग कर रहे कीमैन की नजर पड़ी। उसे कंट्रोल रूम को सूचना देकर दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रुकवाया। इसके बाद ट्रेनों के पहियों पर ब्रेक लगा गया। गोमती एक्सप्रेस समेत दो मालगाड़ी रोकी गई। रेलपथ विभाग की टीम ने सुबह करीब 10.15 मिनट पर काशन पर यातायात बहाल कराया। इसके बाद दोपहर 1.20 बजे से 40 मिनट का ट्रैफिक ब्लाक लेकर पटरी दुरुस्त की।

कंचौसी रेलवे स्टेशन से पांच किमी दूर बिझाई हाल्ट है। इसके बाद फफूंद स्टेशन। कानपुर से दिल्ली की ओर से आ रही एक मालगाड़ी के निकलने पर हाल्ट के पास ड्यूटी पर तैनात कीमैन राजेश कुमार की नजर अप (दिल्ली छोर) की मेन लाइन पर पड़ी। पटरियों के ज्वाइंट से पहले फिश प्लेट के पास पटरी चटकी थी। जिसे देखते हुए आने वाली सभी ट्रेनों को रोका गया। मालगाड़ी समेत गोमती एक्सप्रेस (02419) के अलावा दो और ट्रेनों को कंचौसी से पहले रोक दिया गया। ट्रेनों पर लगे ब्रेक से यात्रियों का सफर प्रभावित हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही रेलपथ विभाग की टीम पहुंची। स्टेशन मास्टर कंचौसी महेंद्र बाबू के मुताबिक हाल्ट पर पटरी चटकने की वजह से ट्रेनें रोकी गई थीं। सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेनों का संचालन 30 किमी प्रति घंटा के काशन पर शुरू कराय गया। पीडब्ल्यूआइ जितेंद्र कुमार ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर मंडल को पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद दोपहर 1.20 बजे ट्रैफिक ब्लाक लेकर क्षतिग्रस्त पटरी को दुरुस्त कराया गया। करीब 40 मिनट तक यह कार्य चला, क्योंकि दबाव के चलते पटरी का चटका हिस्सा धंस गया था। निकली मालगाड़ी के पहले घटना हुई। इसकी फिलहाल पुष्टि नहीं। दोपहर दो बजे के बाद ट्रेनों की गति सामान्य हो सकी। ट्रेनों के शेड्यूल को देखते हुए ब्लाक लिया गया था। इससे संचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

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सामान्य तौर पर तापमान ट्रैक के लिए

रेलपथ विभाग के एक वरिष्ठ इंजीनियर के मुताबिक सामान्य तौर पर ट्रैक के लिए न्यूनतम तापमान चार डिग्री या इससे अधिक होना चाहिए। इसके अलावा अधिकतम 21 से 40 डिग्री सेल्सियस। इससे तापमान कम होने या उतार-चढ़ाव बना होने की वजह से पटरी चटकने की संभावना बढ़ जाती है।

Edited By Jagran

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