UPSC 2020 Result: सिविल सेवा परीक्षा में संगम नगरी की धमक, चार युवाओं को मिला मुकाम

UPSC 2020 Result दो दशक पहले तक प्रयागराज की पहचान आइएएस और पीसीएस की फैक्ट्री के रूप में रही है। यहां के छात्र-छात्राओं का परीक्षा में दबदबा रहता था। यूपीएससी 2020 के परीक्षा परिणाम में प्रयागराज के चार युवाओं को सफलता मिली है।

Brijesh SrivastavaPublish: Sat, 25 Sep 2021 12:53 PM (IST)Updated: Sat, 25 Sep 2021 12:53 PM (IST)
UPSC 2020 Result: सिविल सेवा परीक्षा में संगम नगरी की धमक, चार युवाओं को मिला मुकाम

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2020 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। इस परीक्षा में संगम नगरी यानी प्रयागराज के चार युवाओं ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया। एक बार फिर प्रयागराज की धमक सिविल सेवा की परीक्षा में दिखाई दी। जिस प्रकार के अभी परिणाम आ रहे हैं, उसके आधार पर माना जा रहा है कि आगामी वर्षों में परिणामों में प्रयागराज के युवा कई कीर्तिमान बना सकते हैं।

शाश्‍वत त्रिपुरारी को मिली 19वीं रैंक

प्रयागराज के साउथ मलाका के रहने वाले शाश्वत त्रिपुरारी ने 19वीं रैंक हासिल की है। आइआइटी दिल्ली से 2018 में बीटेक करने वाले शाश्वत के पिता शरद चंद मिश्र दूरदर्शन महानिदेशालय दिल्ली में उप महानिदेशक के पद पर तैनात हैं। वह प्रयागराज में निदेशक रह चुके हैं।

सृजन को 39वें रैंक पर मिली सफलता

दूसरे युवा सृजन वर्मा हैं। उन्होंने 39वीं रैक हासिल कर की है। पहले ही प्रयास में सफलता अर्जित की है। आरकेपुरम करबला के रहने वाले सृजन के पिता नीरज वर्मा उत्तर मध्य रेलवे मंडल विद्युत अभियंता के पद से पिछले महीने सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी मां अनुपमा किदवई मेमोरियल गल्र्स इंटर कालेज हिम्मतगंज में शिक्षक हैं। बड़ी बहन अरुनी वर्मा आर्मी अस्तपाल दिल्ली में सर्जरी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं।

अपूर्वा को 68वीं व अंशिका को 136वीं रैंक मिली

प्रयागराज की बेटी अपूर्वा त्रिपाठी ने 68वीं रैंक हासिल की है। राजापुर की रहने वाली अपूर्वा त्रिपाठी ने वाईएमसीए से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। 2019 में उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ था। फिर 2020 में वह एआरटीओ पद पर चयनित हुईं। 136वीं रैंक पर काबिज होने वाली अंशिका वर्मा प्रयागराज के स्टेनली रोड की रहने वाली हैं। उन्होंने 12वीं तक एसएमसी से शिक्षा हासिल की। उसके बाद नोएडा से बीटेक किया।

आइएएस और पीसीएस की फैक्ट्री के रूप में रही है पहचान

दो दशक पहले तक प्रयागराज की पहचान आइएएस और पीसीएस की फैक्ट्री के रूप में रही है। यहां के छात्र-छात्राओं का परीक्षा में दबदबा रहता था। बाहर के युवा भी यहीं आकर तैयारी करते थे। यह माना जाता था कि अगर कोई युवा संगम नगरी में कंपटीशन की तैयारी करने के लिए गया है तो उसकी सफलता तय है।

Edited By Brijesh Srivastava

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